
CG Assembly Monsoon Session 2026: छत्तीसगढ़ विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र आगामी 13 जुलाई 2026 से शुरू होने जा रहा है. इस छोटे से सत्र को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ही दलों ने अपनी रणनीतियों को धार देना शुरू कर दिया है. इस बार विधानसभा सचिवालय में सरकार से जवाब मांगने के लिए विधायकों की तरफ से कुल 1033 प्रश्न जमा किए गए हैं. सत्र की अवधि भले ही केवल पांच दिनों की है, लेकिन इसमें जनता से जुड़े गंभीर मुद्दों पर भारी हंगामे के आसार जताए जा रहे हैं. विपक्ष के साथ ही सत्ताधारी दल के विधायकों ने भी अपने क्षेत्रों की समस्याओं को लेकर इस बार बड़ी संख्या में सवाल लगाए हैं.
कानून व्यवस्था और बढ़ते अपराध के ग्राफ पर विपक्ष साधेगा सरकार पर निशाना
राज्य में पिछले कुछ समय में सामने आई हत्या, लूट, चोरी और महिलाओं के खिलाफ अपराध की घटनाओं को विपक्ष सदन में प्रमुखता से उठाएगा. विपक्षी विधायकों ने कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर कई तीखे सवाल तैयार किए हैं. इस मुद्दे पर सदन के भीतर गृह विभाग और सरकार को बैकफुट पर धकेलने की रणनीति बनाई गई है जिससे सत्र के पहले ही दिन से गरमागरम बहस देखने को मिल सकती है.
खरीफ सीजन में खाद और बीज की किल्लत का मुद्दा सदन में गरमाएगा
वर्तमान में खरीफ फसलों की बुआई का काम चल रहा है और ऐसे समय में किसानों को आ रही परेशानियां एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनने जा रही हैं. प्रदेश के कई जिलों से रासायनिक खाद और उन्नत बीजों की कमी की शिकायतें आ रही हैं. इसके साथ ही सोसायटियों में वितरण व्यवस्था में गड़बड़ी के मामलों को लेकर भी विपक्षी दल कृषि मंत्री और सरकार से जवाब मांगेगा.
अवैध उत्खनन और जंगलों की कटाई को लेकर सरकार से पूछे जाएंगे तीखे सवाल
राज्य के अलग-अलग हिस्सों में नदियों से रेत और मैदानों से मुरुम सहित अन्य खनिजों के अवैध उत्खनन का मामला भी इस सत्र में गूंजेगा. विपक्ष का आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया जा रहा है. इसके अलावा वनों की अवैध कटाई और पर्यावरण सुरक्षा की अनदेखी से जुड़े मुद्दों पर भी वन विभाग को घेरने के लिए विधायकों ने पूरी तैयारी कर रखी है.
ग्रामीण इलाकों में नल-जल योजनाओं की सुस्त रफ्तार पर होगी खिंचाई
गांवों में पीने के पानी की समस्या और केंद्र सरकार की नल-जल योजनाओं के क्रियान्वयन में हो रही देरी पर भी सदन में चर्चा होगी. कई ग्रामीण क्षेत्रों में पाइपलाइन बिछाने या पानी की टंकी बनने के बाद भी लोगों के घरों तक नियमित पानी नहीं पहुंच पा रहा है. इस पेयजल संकट और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग से जवाब तलब किया जाएगा.
बरसात में सड़कों की बदहाली और बिजली कटौती पर सत्तापक्ष को घेरेगी कांग्रेस
मानसून की शुरुआत होते ही राज्य की कई प्रमुख सड़कों और ग्रामीण मार्गों की हालत खराब हो गई है. अधूरी निर्माण परियोजनाओं के कारण राहगीरों को हो रही दिक्कतों और बरसात के मौसम में बार-बार होने वाली अघोषित बिजली कटौती के मुद्दे पर भी सरकार की घेराबंदी होगी. लोक निर्माण विभाग और ऊर्जा विभाग से जुड़े इन सवालों पर विपक्ष सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहता.
स्कूलों में शिक्षकों और अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी पर भी होगा हंगामा
प्रदेश की बुनियादी सुविधाओं यानी शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली पर भी इस पांच दिवसीय सत्र में लंबी बहस हो सकती है. ग्रामीण और आदिवासी अंचलों के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के खाली पदों और जिला अस्पतालों व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों तथा जरूरी दवाइयों की कमी का मामला भी विधायकों के सवालों में शामिल है. इन मुद्दों के जरिए विपक्ष सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करेगा.



