CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की 10 बड़ी खबरें रावघाट वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, महासमुंद में मिले हीरे के पुख्ता संकेत, रायपुर में नल टैक्स पर घमासान, पेंशनर्स को हाई कोर्ट से बड़ी राहत, 29 जून से सहकारिता सप्ताह, CGMSC में 1136 करोड़ का हेरफेर, बालोद के किसमा गांव में सरपंच का बहिष्कार, धमतरी बनेगा हल्दी का नया हब, हाई कोर्ट की स्टेटस रिपोर्ट में कई बड़े नेताओं पर केस और स्कूल शिक्षा विभाग में शिक्षकों के अटैचमेंट पर कड़ा रुख समेत पढ़ें छत्तीसगढ़ की बड़ी खबरें…

CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की सभी बड़ी और छोटी खबरें रोजाना हमारी नजर में रहती हैं। दक्षिण कोसल के विशेष सेगमेंट ‘CG की 10 बड़ी खबरें’ में हम आपको समाचार जगत की हर गतिविधि का अपडेट सरल और सहज भाषा में प्रदान करेंगे। तो आइए, पत्रकारिता की इस दुनिया में बने रहें और छत्तीसगढ़ की हर ताजातरीन खबर से अपनी जानकारी को और विस्तृत करे

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रावघाट में अवैध सड़क निर्माण पर बड़ा एक्शन: 7 अधिकारियों को नोटिस, 5 वनकर्मी सस्पेंड

छत्तीसगढ़ के रावघाट लौह अयस्क परियोजना क्षेत्र में वन विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई की है। बिना अनुमति के नियमों को ताक पर रखकर सड़क बनाने और भारी संख्या में पेड़ों को काटने के मामले में विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि करीब 1.34 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण पूरी तरह गैर-कानूनी तरीके से किया गया था। इस लापरवाही के सामने आने के बाद भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। साथ ही एसडीओ और रेंजर सहित सात अधिकारियों-कर्मचारियों पर गाज गिरी है। मीडिया में इस अवैध निर्माण की खबर आने के बाद वन विभाग ने पांच सदस्यों की एक विशेष जांच टीम बनाई थी। पूर्व वनमंडल भानुप्रतापपुर की इस टीम ने मौके पर जाकर देखा कि 1340 मीटर लंबी और करीब 10 मीटर चौड़ी सड़क बनाने के लिए पूरा पहाड़ ही काट दिया गया। इस दौरान लगभग 540 हरे-भरे पेड़ों को भी काट डाला गया। अधिकारियों का कहना है कि अभी जांच जारी है और काटे गए पेड़ों की यह संख्या आगे और भी बढ़ सकती है। पूर्व वनमंडलाधिकारी ऋषभ जैन के मुताबिक, इस निर्माण के लिए वन विभाग से कोई मंजूरी नहीं ली गई थी। यह सीधे तौर पर भारतीय वन अधिनियम 1927 और वन संरक्षण अधिनियम 1980 का उल्लंघन है। इसी आधार पर बीएसपी रावघाट प्रबंधन से जवाब मांगा गया है। जवाब मिलते ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। लापरवाही बरतने के आरोप में पांच वनकर्मियों को तुरंत प्रभाव से वहां से हटा दिया गया है, जिनमें दीनदयाल नेताम, आत्माराम पोटाई, अश्विनी कुमार नेताम, सहादुर सिंह ठाकुर और योगेश कुमार ठाकुर शामिल हैं।

महासमुंद में खिलेगी हीरों की चमक: बलौदा-बेलमुंडी ब्लॉक में खनन को हरी झंडी

छत्तीसगढ़ की धरती से अब सिर्फ कोयला और लोहा ही नहीं बल्कि कीमती हीरे भी निकलेंगे। महासमुंद जिले के बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में बड़े पैमाने पर खुदाई शुरू करने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। एनएमडीसी-सीएमडीसी (NCL) के बोर्ड ने इस परियोजना को मंजूरी दे दी है। इस फैसले को छत्तीसगढ़ के खनिज इतिहास में एक बहुत बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इस इलाके में हीरा होने के पुख्ता सबूत पहले ही मिल चुके हैं। कंपनी ने जांच के लिए यहां से करीब 200 टन मिट्टी का सैंपल मध्य प्रदेश के पन्ना में बने प्रोसेसिंग प्लांट भेजा था। वहां हुई जांच में 1.22 कैरेट वजन के पांच असली हीरे मिले थे। इस शुरुआती सफलता के बाद अब कंपनी ने जमीन के भीतर गहरे व्यास की ड्रिलिंग करने का फैसला लिया है। दुनिया के बड़े हीरा उत्पादक देशों जैसे बोत्सवाना, दक्षिण अफ्रीका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के अनुभवों को देखें तो शुरुआती दौर में मिलने वाली ऐसी सफलता भविष्य में हीरों के बड़े भंडार का संकेत होती है। बोर्ड बैठक में निर्देश दिए गए हैं कि ड्रिलिंग का काम तेजी से पूरा किया जाए ताकि यह पता चल सके कि जमीन के नीचे किम्बरलाइट पाइप कितनी गहराई पर है और उसमें कितने हीरे मौजूद हैं। इसके बाद एक फाइनल रिपोर्ट तैयार होगी जिसके आधार पर खदान शुरू की जाएगी।

रायपुर नगर निगम में नल टैक्स पर घमासान: विपक्ष ने दी आंदोलन की चेतावनी

रायपुर नगर निगम द्वारा अवैध नल कनेक्शनों को वैध करने के लिए अचानक शुल्क बढ़ाने पर राजनीति तेज हो गई है। नगर निगम ने इसके लिए करीब 15,882 रुपये का शुल्क तय किया है जो टैक्स मिलाकर लगभग 20 हजार रुपये तक पहुंच जाता है। इस फैसले का विरोध करते हुए नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने इसे गरीबों के साथ अन्याय बताया है और इसे वापस लेने की मांग की है। यह मामला शहर के हजारों गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के पानी जैसे बुनियादी हक से जुड़ा है। शुल्क में हुई इस भारी बढ़ोतरी से आम जनता पर बड़ा आर्थिक बोझ पड़ेगा। विपक्ष का कहना है कि इसके विरोध में आने वाले दिनों में शहर के सभी 10 जोनों में पार्षद और जनता मिलकर बड़ा प्रदर्शन करेंगे। नेता प्रतिपक्ष ने पुरानी सरकार के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जून 2023 में मात्र 100 रुपये शुल्क और 500 रुपये जुर्माना लेकर अवैध कनेक्शन वैध करने का फैसला हुआ था। अब इसे सीधे 200 गुना तक बढ़ा दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि शहर में न तो सफाई की ठीक व्यवस्था है और न ही नलों में पर्याप्त पानी आ रहा है, इसके बाद भी जनता पर लगातार टैक्स का बोझ डाला जा रहा है।

छत्तीसगढ़ के पेंशनर्स को हाई कोर्ट से बड़ी राहत: मिलेगा 59 महीने का बकाया एरियर

छत्तीसगढ़ के हजारों रिटायर्ड सरकारी कर्मचारियों के लिए बिलासपुर हाई कोर्ट से एक बहुत अच्छी खबर आई है। हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार की उस अपील को खारिज कर दिया है जिसमें सरकार ने एरियर देने से मना किया था। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद अब प्रदेश के लाखों बुजुर्ग पेंशनर्स को उनके 59 महीने का बकाया एरियर मिल सकेगा। यह पूरी कानूनी लड़ाई छत्तीसगढ़ पेंशनर्स समाज ने लड़ी थी। मामला छठवें और सातवें वेतन आयोग के लाभ से जुड़ा था, जिसमें सरकार ने एक कट-ऑफ तारीख तय कर दी थी। इस वजह से बुजुर्ग कर्मचारियों को 32 महीने और 27 महीने का एरियर नहीं मिल पा रहा था। पेंशनर्स का कहना था कि यह उनके साथ भेदभाव है। सरकार काफी समय से मध्य प्रदेश के साथ वित्तीय बंटवारे का बहाना बनाकर इस मामले को टाल रही थी। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की बेंच ने सुनवाई के दौरान सरकार की दलीलों को पूरी तरह से नकार दिया। अदालत ने स्पष्ट तौर पर कहा कि दो राज्यों के बीच चल रहे आपसी वित्तीय विवाद का खामियाजा बुजुर्ग पेंशनर्स को नहीं भुगतना पड़ सकता। इस फैसले से कर्मचारियों में खुशी की लहर है।

छत्तीसगढ़ में मनेगा सहकारिता सप्ताह: रायपुर में लगेगा राज्य स्तरीय मेला

छत्तीसगढ़ में सहकारिता मंत्रालय के पांच साल पूरे होने के मौके पर 29 जून से 6 जुलाई तक पूरे प्रदेश में सहकारिता सप्ताह मनाया जाएगा। सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने जगदलपुर में इसकी आधिकारिक घोषणा की है। उन्होंने बताया कि इस दौरान पूरे राज्य में विभिन्न कार्यक्रम होंगे और 3 व 4 जुलाई को रायपुर में एक बड़ा सहकारी चिंतन शिविर और सहकार मेला लगाया जाएगा। इस सहकारिता सप्ताह के तहत राज्य के सभी जिलों, विकासखंडों और प्राथमिक सहकारी समितियों में गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। सरकार का मुख्य ध्यान किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों, दुग्ध उत्पादकों, मछुआरों और ग्रामीण उद्यमियों को सहकारिता के माध्यम से आगे बढ़ाने पर है। इसके लिए प्रदेश की 2573 प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) में ध्वजारोहण, नए सदस्य बनाने का अभियान और किसान क्रेडिट कार्ड बांटे जाएंगे। रायपुर के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर में होने वाले मुख्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। इस मेले में नाबार्ड, नैफेड और इफको जैसी राष्ट्रीय संस्थाएं भी हिस्सा लेंगी। कार्यक्रम के आखिरी दिन 6 जुलाई को केंद्रीय सहकारिता मंत्री की मौजूदगी में दुनिया की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना के तहत छत्तीसगढ़ की 9 समितियों में नए गोदाम निर्माण का भूमिपूजन भी किया जाएगा।

दवा निगम CGMSC में करोड़ों का फेरबदल: 4 साल में 5 एमडी बदले, 1136 करोड़ का हिसाब नहीं

छत्तीसगढ़ के सरकारी दवा और उपकरण खरीदी निगम (CGMSC) में एक बड़ा वित्तीय अंतर सामने आया है। साल 2021 से 2025 के बीच की एक आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट से पता चला है कि निगम ने कागजों पर 3261 करोड़ रुपये का खर्च दिखाया है, लेकिन उसके पास केवल 2125 करोड़ रुपये के ही उपयोगिता प्रमाण पत्र (UC) मौजूद हैं। इसका मतलब है कि करीब 1136 करोड़ रुपये का हिसाब सरकारी रिकॉर्ड से गायब है। सबसे बड़ी गड़बड़ी अस्पतालों के लिए उपकरण खरीदने और निर्माण कार्यों में पाई गई है। स्वास्थ्य सेवा संचालनालय (DHS) के उपकरण मद में 280 करोड़ का खर्च दिखाया गया, लेकिन सिर्फ 31.96 करोड़ रुपये का ही उपयोगिता प्रमाण पत्र मिला। इसी तरह चिकित्सा शिक्षा संचालनालय (DME) के उपकरण मद में भी 254 करोड़ के मुकाबले सिर्फ 25 करोड़ रुपये का ही हिसाब मिल पाया है। निर्माण कार्यों में भी करोड़ों का अंतर है। हैरानी की बात यह है कि कुछ जगहों पर खर्च से ज्यादा का सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया। जैसे डीएचएस की दवा खरीदी में खर्च 1511 करोड़ हुआ लेकिन सर्टिफिकेट 1549 करोड़ का बन गया। ऑडिट में यह भी सामने आया कि 13वें वित्त आयोग की योजना खत्म होने के बाद भी करीब 48 लाख रुपये बैंक खाते में ही पड़े रहे, जिन्हें नियमानुसार शासन को वापस लौट जाना चाहिए था। इस 4 साल के समय में 5 अलग-अलग आईएएस अधिकारी बतौर एमडी तैनात रहे। वर्तमान एमडी रितेश अग्रवाल का कहना है कि रिपोर्ट का अध्ययन कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

महज 20 रुपये के टैक्स पर विवाद: बालोद के किसमा गांव में सरपंच-उपसरपंच का हुक्का-पानी बंद

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के डौंडीलोहारा ब्लॉक से सामाजिक बहिष्कार का एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। किसमा गांव के ग्रामीणों ने मिलकर अपनी ही चुनी हुई सरपंच डोमेश्वरी यादव, उपसरपंच भालती साहू और दो पंचों का सामूहिक रूप से बहिष्कार कर दिया है। गांव वालों ने फैसला किया है कि इन जनप्रतिनिधियों के खेतों में कोई ट्रैक्टर नहीं जाएगा और न ही गांव का कोई दुकानदार उन्हें राशन या अन्य सामान बेचेगा। इस पूरे विवाद की शुरुआत पंचायत द्वारा प्रति परिवार 20 रुपये महीना टैक्स वसूलने के फैसले से हुई थी। नवंबर 2025 में इस टैक्स को लेकर पंचायत में तीखी बहस हुई थी। कुछ ग्रामीणों ने यह टैक्स देने से मना कर दिया, जिसके बाद मामला ग्राम सभा तक पहुंच गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी बीच-बचाव की कोशिश की लेकिन बात नहीं बनी। इसके साथ ही गांव के रोजगार सहायक के खिलाफ कोई एक्शन न होने से भी लोग नाराज थे। दूसरी तरफ सरपंच डोमेश्वरी यादव ने ग्रामीणों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कुछ लोग जानबूझकर उनके परिवार को प्रताड़ित कर रहे हैं। इससे पहले उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी लाया गया था जो फेल हो गया था। सरपंच का आरोप है कि गांव के कुछ रसूखदार लोगों ने मंदिर में बैठक करके ग्रामीणों को कसम दिलाई है कि जो भी सरपंच का साथ देगा, उसका भी हुक्का-पानी बंद कर दिया जाएगा। मामले की शिकायत अब एसपी और जिला पंचायत सीईओ तक पहुंच गई है।

हल्दी का नया केंद्र बनेगा धमतरी: 250 किसान मिलकर करेंगे वैज्ञानिक खेती

छत्तीसगढ़ का आदिवासी बाहुल्य धमतरी जिला अब हल्दी उत्पादन के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। जिले के नगरी विकासखंड के करीब 250 आदिवासी किसानों ने इस बार 10 टन उन्नत किस्म के हल्दी बीजों की बुवाई की है। इन किसानों ने मिलकर आगामी सीजन में 250 टन बंपर हल्दी उत्पादन का एक बड़ा लक्ष्य तय किया है। यह पूरी योजना जिला प्रशासन और ‘प्रदान’ नाम की संस्था के सहयोग से चलाई जा रही है। इसके तहत किसानों को पारंपरिक खेती के नुकसान से बचाकर सीधे ‘उत्पादन, प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग’ की आधुनिक व्यवस्था से जोड़ा गया है। धमतरी के इस पथरीले और ऊंचे इलाकों में पहले धान की खेती से किसानों को कोई खास मुनाफा नहीं होता था, लेकिन हल्दी की यह फसल इस क्षेत्र के लिए आर्थिक रूप से वरदान साबित हो सकती है। इस पूरी मुहिम को गट्टासिल्ली किसान उत्पादक कंपनी (FPC) संभाल रही है। कोर्रेमुडा गांव में हल्दी को पीसने और पैक करने के लिए एक आधुनिक मशीनरी भी लगाई जा रही है, ताकि यहां के बने हल्दी पाउडर को एक खास ब्रांड नाम के साथ सीधे बड़े बाजारों में बेचा जा सके। कृषि वैज्ञानिकों द्वारा स्थानीय स्तर पर किसानों को ट्रेनिंग भी दी जा रही है ताकि फसल की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय स्तर की बनी रहे।

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की रिपोर्ट: भूपेश बघेल और कवासी लखमा समेत कई नेताओं पर आपराधिक केस

बिलासपुर हाई कोर्ट ने सांसदों और विधायकों के खिलाफ चल रहे मुकदमों से जुड़ी साल 2026 की एक स्टेटस रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ के 15 से ज्यादा बड़े राजनेताओं के खिलाफ वर्तमान में 20 से अधिक गंभीर आपराधिक मामले अदालतों में लंबित हैं। इन सभी मामलों की सुनवाई को जल्द पूरा करने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। राज्य के सबसे हाईप्रोफाइल मुकदमों की सुनवाई राजधानी रायपुर की विशेष अदालतों में चल रही है। इन मामलों में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, कैलाश मुरारका और विजय भाटिया के नाम शामिल हैं। इसके अलावा रायपुर की जिला कोर्ट में कोंटा के वर्तमान विधायक कवासी लखमा के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की तरफ से दर्ज भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत सुनवाई आगे बढ़ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, बिलासपुर की सीजेएम कोर्ट में कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं में केस चल रहा है, जिसमें अगले महीने कोर्ट द्वारा आरोप तय किए जा सकते हैं। वहीं राजनांदगांव में पूर्व सांसद मुधसूदन यादव के खिलाफ वित्तीय गड़बड़ी से जुड़े 6 मामले चल रहे हैं, जिनमें से 3 में उन्हें राहत मिल चुकी है। इसके अलावा जांजगीर-चांपा कोर्ट में भी कुछ पूर्व और वर्तमान विधायकों के खिलाफ धोखाधड़ी के मामले विचाराधीन हैं।

स्कूल शिक्षा विभाग में संलग्नीकरण का खेल: बार-बार आदेश के बाद भी टस से मस नहीं हो रहे अफसर

छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग में कागजी आदेशों का जमीनी स्तर पर पालन कराना कितना मुश्किल काम है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक ही व्यवस्था को सुधारने के लिए विभाग को बार-बार रिमाइंडर भेजने पड़ रहे हैं। ताजा मामला शिक्षकों और विभागीय कर्मचारियों के संलग्नीकरण (अटैचमेंट) को खत्म करने से जुड़ा है, जिसे लेकर जिलों के अधिकारी लगातार सुस्ती बरत रहे हैं। विभाग ने पिछले साल साफ आदेश जारी किया था कि जो शिक्षक स्कूलों को छोड़कर दफ्तरों या गैर-शैक्षणिक कार्यों में अटैच हैं, उन्हें तुरंत हटाया जाए। इसके बावजूद कई जिलों से शिकायतें आ रही थीं कि रसूख के दम पर शिक्षक अब भी दफ्तरों में ही जमे हुए हैं। इसके बाद लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने 25 जून 2026 को फिर से एक कड़ा पत्र जारी कर सभी संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) से इसकी लिखित रिपोर्ट मांगी है। स्कूल शिक्षा मंत्री की हालिया समीक्षा बैठक के बाद जारी हुए इस नए आदेश में अधिकारियों से साफ तौर पर उन शिक्षकों के नाम, उनकी मूल पदस्थापना और उन्हें कार्यमुक्त करने के आदेश की तारीख की पूरी सूची निर्धारित प्रारूप में मांगी गई है। इस पूरी खींचतान के बीच आम शिक्षकों का कहना है कि एक तरफ तो विभाग अटैचमेंट खत्म करने की बात करता है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक जरूरत का हवाला देकर पिछले दरवाजे से नए अटैचमेंट भी कर दिए जाते हैं, जिससे यह समस्या खत्म नहीं हो पा रही है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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