CG Solar Power Rate: बदल गया ग्रिड बिजली का नियम, छत्तीसगढ़ विद्युत नियामक आयोग ने सौर ऊर्जा की खरीद दर घटाई, जानें अब कितना होगा भुगतान

CG Surplus Solar Power Rate: छत्तीसगढ़ में पर्यावरण अनुकूल हरित ऊर्जा यानी सोलर पैनल लगाने वाले आम उपभोक्ताओं को एक बड़ा आर्थिक झटका लगा है। राज्य विद्युत नियामक आयोग ने ग्रिड को वापस बेची जाने वाली अतिरिक्त सौर बिजली की कीमतों में भारी कटौती करने का फैसला किया है। इस नए आदेश के लागू होने के बाद से अब उपभोक्ताओं को अपने घरों या प्रतिष्ठानों में बने सोलर प्लांट से पैदा होने वाली बची हुई बिजली बेचने पर पहले के मुकाबले काफी कम दाम मिलेंगे। सरकार के इस कदम से उन लोगों को सीधा नुकसान होगा जो नेट मीटरिंग के जरिए ग्रिड को बिजली ट्रांसफर कर कमाई कर रहे थे।

छत्तीसगढ़ विद्युत नियामक आयोग का नया फैसला, सौर बिजली की खरीद दरों में की कटौती

छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने नए दिशा-निर्देश जारी करते हुए सरप्लस यानी अतिरिक्त सौर ऊर्जा की खरीद दरों को घटा दिया है। आयोग के इस फैसले का सीधा असर उन सभी घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं पर पड़ेगा जिन्होंने अपने छतों पर सोलर पैनल स्थापित किए हैं। नियामक आयोग का मानना है कि समय के साथ सौर ऊर्जा उत्पादन की तकनीक सस्ती हुई है, जिसके चलते दरों में यह बदलाव किया जाना जरूरी था। हालांकि, इस फैसले से उन उपभोक्ताओं की वित्तीय गणित बिगड़ गई है जो बिजली बेचकर मुनाफा कमा रहे थे।

पिछले साल के मुकाबले अब प्रति यूनिट मिलेंगे 56 पैसे कम, वित्तीय वर्ष के साथ बदला नियम

दामों में हुई इस कटौती के आंकड़ों को देखें तो पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान बिजली वितरण कंपनी उपभोक्ताओं से उनकी अतिरिक्त सौर बिजली को 2.50 रुपये प्रति यूनिट की तय दर से खरीद रही थी। अब नए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए इस दर को करीब 20 फीसदी तक घटा दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत अब उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट सिर्फ 1.94 रुपये का भुगतान किया जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि उपभोक्ताओं को अब हर एक यूनिट बिजली बेचने पर सीधे 56 पैसे का नुकसान उठाना पड़ेगा।

नेट मीटरिंग का इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा सीधा असर

इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर उन उपभोक्ताओं पर दिखाई देगा जो नेट मीटरिंग प्रणाली का उपयोग करते हैं। नेट मीटरिंग के तहत दिन के समय जब धूप तेज होती है और घर में बिजली की खपत कम होती है, तब सोलर पैनल से बनने वाली अतिरिक्त बिजली स्वतः ही सरकारी ग्रिड में चली जाती है। महीने के आखिर में इस बिजली का हिसाब करके बिजली कंपनी उपभोक्ता के बिल में से उतनी राशि घटा देती थी या उसका भुगतान करती थी। अब दरें घटने से उपभोक्ताओं को मिलने वाली क्रेडिट राशि काफी कम हो जाएगी।

ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के दावों के बीच इस फैसले से उपभोक्ताओं में दिखी नाराजगी

इस सरकारी आदेश के सामने आने के बाद से राज्य के सोलर उपभोक्ताओं और पर्यावरण प्रेमियों के बीच साफ तौर पर नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का तर्क है कि एक तरफ तो केंद्र और राज्य सरकारें लगातार विज्ञापन देकर आम जनता को छतों पर सोलर प्लांट लगाने के लिए प्रेरित कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ इस तरह अचानक खरीद दरें घटाकर वे लोगों को हतोत्साहित कर रही हैं। उपभोक्ताओं के अनुसार, इस तरह के फैसलों से रिन्यूएबल एनर्जी यानी नवीकरणीय ऊर्जा के प्रति लोगों का भरोसा कम होता है।

नए उपभोक्ताओं के उत्साह पर पड़ सकता है असर, सोलर पैनल लगाने का खर्च निकालना होगा मुश्किल

जानकारों का मानना है कि इस कटौती के कारण अब उन नए लोगों का उत्साह ठंडा पड़ सकता है जो अपने घरों में सोलर सिस्टम लगवाने की योजना बना रहे थे। एक सामान्य सोलर प्लांट को लगाने में अच्छा-खासा शुरुआती खर्च आता है। उपभोक्ता अक्सर यह सोचकर निवेश करते हैं कि बची हुई बिजली ग्रिड को बेचकर वे अगले कुछ सालों में अपनी लागत वसूल कर लेंगे। अब जब खरीद दर घटकर 1.94 रुपये रह गई है, तब उपभोक्ताओं को अपनी लागत वापस निकालने में पहले की तुलना में बहुत अधिक समय लगेगा।

सौर ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों की चिंता बढ़ी, बाजार में मांग घटने की आशंका

दरों में आई इस कमी से केवल उपभोक्ता ही नहीं बल्कि सोलर उपकरण बेचने वाले स्थानीय कारोबारी और वेंडर भी चिंतित हैं। कारोबारियों को डर है कि इस फैसले के बाद बाजार में सोलर पैनलों की मांग में गिरावट आ सकती है। यदि लोग आर्थिक फायदे को ध्यान में रखकर सोलर पैनल लगवाना बंद कर देंगे, तो इससे राज्य में हरित ऊर्जा के विस्तार की रफ्तार धीमी पड़ जाएगी। आने वाले समय में देखना होगा कि क्या सरकार उपभोक्ताओं के विरोध को देखते हुए इन दरों पर दोबारा विचार करती है या नहीं।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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