
CG School Reopen Update: छत्तीसगढ़ सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए स्कूली शिक्षा व्यवस्था में एक बहुत बड़ा बदलाव किया है। राज्य के भीतर अब प्राथमिक कक्षाओं में दाखिले के नियमों को कड़ा कर दिया गया है। नए आदेश के मुताबिक, आगामी शैक्षणिक सत्र से कक्षा पहली में प्रवेश लेने के लिए बच्चे की न्यूनतम आयु 6 वर्ष होना अनिवार्य कर दिया गया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस महत्वपूर्ण फैसले को अमलीजामा पहनाने के लिए प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को आधिकारिक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं ताकि जमीनी स्तर पर इसकी तैयारियां समय रहते पूरी की जा सकें।
सीबीएसई की तर्ज पर अब 16 जून के बजाय 1 अप्रैल से शुरू होगा नया शैक्षणिक सत्र
इस ऐतिहासिक नीतिगत फैसले के तहत छत्तीसगढ़ सरकार अब केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के पैटर्न को अपनाने जा रही है। साल 2027 से प्रदेश के सभी सरकारी और छत्तीसगढ़ बोर्ड से मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों का नया शैक्षणिक सत्र 16 जून के पारंपरिक समय के बजाय 1 अप्रैल से ही शुरू हो जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि अब नया शिक्षा सत्र 1 अप्रैल से शुरू होकर अगले साल 31 मार्च तक चलेगा। इस बदलाव से राज्य के बच्चों का पढ़ाई का कैलेंडर पूरे देश के केंद्रीय स्कूलों के बराबर आ जाएगा।
अप्रैल के महीने में ही निपटाए जाएंगे दाखिले और मुफ्त सामग्री वितरण के सारे काम
अब तक की व्यवस्था में जून में स्कूल खुलने के बाद कई हफ्तों तक दाखिले की भागदौड़ चलती रहती थी। नई व्यवस्था के तहत अप्रैल के पहले महीने में ही प्रवेश की पूरी प्रक्रिया को मुकम्मल कर लिया जाएगा। इसी अवधि के दौरान सरकारी स्कूलों के छात्र-छात्राओं को किताबें, स्कूल यूनिफॉर्म और मुफ्त साइकिल बांटने का काम भी तेजी से पूरा किया जाएगा। इसके बाद 1 मई से लेकर 15 जून तक बच्चों को पहले की तरह ही भीषण गर्मी की छुट्टियां (ग्रीष्मकालीन अवकाश) दी जाएंगी और 16 जून से दोबारा नियमित कक्षाएं लगेंगी।
नर्सरी से लेकर पहली कक्षा तक के बच्चों के लिए यह होगी उम्र की नई समय-सीमा
स्कूल शिक्षा विभाग की गाइडलाइन के अनुसार, बच्चों की उम्र की गणना संबंधित शैक्षणिक वर्ष की 1 अप्रैल की स्थिति के आधार पर की जाएगी। नई नीति के तहत अलग-अलग प्राथमिक कक्षाओं के लिए उम्र का दायरा कुछ इस तरह तय किया गया है
- नर्सरी (बालवाटिका-1): बच्चे की उम्र 3 साल से 4 साल के बीच होनी चाहिए।
- केजी-1 (बालवाटिका-2): बच्चे की उम्र 4 साल से 5 साल के बीच होनी चाहिए।
- केजी-2 (बालवाटिका-3): बच्चे की उम्र 5 साल से 6 साल के बीच होनी चाहिए।
- कक्षा पहली: बच्चे की उम्र न्यूनतम 6 साल और अधिकतम 7 साल के बीच होनी चाहिए।

नियमों में मिलेगी 3 महीने की विशेष छूट, केजी पास कर चुके बच्चों को राहत
अभिभावकों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए सरकार ने उम्र के इस कड़े नियम में थोड़ी नरमी भी बरती है। अगर कोई बच्चा 1 अप्रैल की कट-ऑफ तारीख तक निर्धारित उम्र पूरी नहीं कर पाता है, लेकिन वह 1 जुलाई तक उस उम्र को छू लेता है, तो स्कूल प्रबंधन उसे अधिकतम 3 महीने की रियायत देकर दाखिला दे सकेगा। इसके साथ ही जो बच्चे पहले से ही किसी मान्यता प्राप्त स्कूल से प्री-प्राइमरी यानी केजी-2 की पढ़ाई पूरी करके सीधे पहली कक्षा में प्रोमोट हो रहे हैं, उन पर उम्र का यह नया बंधन लागू नहीं होगा। उन्हें पुरानी अंकसूची या ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) के आधार पर ही अगली कक्षा में प्रवेश मिल जाएगा।
शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए छात्रों को तैयार करना है मुख्य उद्देश्य
स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने इस बड़े बदलाव की वजह साफ करते हुए बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य राज्य में शिक्षा के स्तर को ऊपर उठाना है। अब तक सीबीएसई और छत्तीसगढ़ बोर्ड के कैलेंडर में करीब ढाई महीने का लंबा फासला रहता था। सीबीएसई के बच्चे अप्रैल से ही आगे का सिलेबस पढ़ना शुरू कर देते थे, जबकि छत्तीसगढ़ बोर्ड के बच्चों की पढ़ाई जुलाई तक ठीक से पटरी पर नहीं आ पाती थी। इस अंतर के कारण राज्य के बच्चे राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में पिछड़ जाते थे, लेकिन अब यह दूरी पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
शिक्षकों को मिलेगा कोर्स पूरा कराने का पूरा वक्त, कमजोर बच्चों की होगी विशेष तैयारी
नया सत्र अप्रैल से शुरू होने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि जून और जुलाई का जो कीमती वक्त पहले दाखिले और किताबें बांटने में बर्बाद होता था, उसकी पूरी बचत होगी। अप्रैल के आखिरी हफ्ते में छुट्टियां होने से पहले ही छात्र अपने नए सिलेबस का एक बड़ा हिस्सा पढ़ चुके होंगे। शिक्षकों को पूरा पाठ्यक्रम विस्तार से पढ़ाने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा, जिससे वे बोर्ड परीक्षाओं से पहले बच्चों का बेहतर रिवीजन करवा सकेंगे। इसके साथ ही पढ़ाई में कमजोर बच्चों के लिए विशेष अतिरिक्त कक्षाएं (रेमेडियल क्लासेज) चलाने में भी आसानी होगी, जिससे अंततः परीक्षा परिणामों में सुधार देखने को मिलेगा।



