CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की 10 बड़ी खबरें जाति प्रमाणपत्र पर हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला और 1950 के रिकॉर्ड की अनिवार्यता खत्म, सीएम हेल्पलाइन की धीमी चाल पर उठते सवाल, स्मार्ट मीटर से बिल सुधारने वसूली जा रही 500 से 1000 रुपये फीस, अलनार खदान में बिना माइनिंग कागजों पर निकला 4.87 लाख टन लोहा, ईवी सब्सिडी का 100 करोड़ बजट खत्म होने से 155 करोड़ का भुगतान अटका, रायपुर में 22 स्कूल बसें पाई गईं अनफिट और लगा 53 हजार का जुर्माना, पाठ्य पुस्तक निगम में 192 करोड़ के वित्तीय घोटाले का खुलासा, बीजापुर के नक्सल पीड़ित परिवारों को 20 लाख रुपये की सहायता मंजूर, महतारी वंदन योजना का नया पंजीयन पोर्टल जल्द खुलेगा और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास नीति का विस्तार समेत पढ़ें छत्तीसगढ़ की बड़ी खबरें…

CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की सभी बड़ी और छोटी खबरें रोजाना हमारी नजर में रहती हैं। दक्षिण कोसल के विशेष सेगमेंट ‘CG की 10 बड़ी खबरें’ में हम आपको समाचार जगत की हर गतिविधि का अपडेट सरल और सहज भाषा में प्रदान करेंगे। तो आइए, पत्रकारिता की इस दुनिया में बने रहें और छत्तीसगढ़ की हर ताजातरीन खबर से अपनी जानकारी को और विस्तृत करे

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जाति प्रमाणपत्र पर हाई कोर्ट की बड़ी राहत: 1950 का रिकॉर्ड न होने पर भी नहीं रुकेगा काम

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य में जाति प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ किया है कि हर मामले में 1950 से पहले के दस्तावेज मांगना जरूरी नहीं है। यदि परिवार के किसी सदस्य के पास पहले से वैध स्थायी जाति प्रमाणपत्र उपलब्ध है, तो उसी आधार पर नया आवेदन स्वीकार किया जाना चाहिए।यह मामला बिलासपुर जिले की बोदरी तहसील के ग्राम मुढ़ीपार का है। निष्ठा बघेल और अभय बघेल ने स्थायी जाति प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया था, जिसे अधिकारियों ने 1950 से पहले का रिकॉर्ड न होने का हवाला देकर खारिज कर दिया था। जबकि याचिकाकर्ताओं के पिता और बहन के पास पहले से स्थायी जाति प्रमाणपत्र मौजूद था। हाई कोर्ट की एकलपीठ ने अधिकारियों के इस रवैये पर नाराजगी जताते हुए निर्देश दिया कि नियमों के नाम पर मनमानी नहीं की जा सकती। अदालत ने संबंधित राजस्व अधिकारियों को 60 दिनों के भीतर कानून के मुताबिक जांच पूरी कर तर्कसंगत आदेश जारी करने के आदेश दिए हैं।

सीएम हेल्पलाइन पर उठ रहे सवाल: एक महीने बाद भी अटका रहा आवेदन

छत्तीसगढ़ में आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए बनाई गई सीएम हेल्पलाइन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। राज्य में 9 जून को दर्ज कराई गई एक शिकायत एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी केवल प्रक्रियाधीन की स्थिति में दिखाई दे रही है।प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस शिकायत को 8 जुलाई को संबंधित अधिकारी के पास भेजा गया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इतने दिन बीत जाने के बाद भी न तो किसी जांच की सूचना दी गई और न ही समस्या के हल के लिए कोई कदम उठाया गया। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि मामलों में पारदर्शिता लाई जाए और समय सीमा तय कर अधिकारियों की जवाबदेही निश्चित की जाए, ताकि हेल्पलाइन का मूल उद्देश्य प्रभावित न हो।

स्मार्ट मीटर का नया नियम: बिल की जांच कराने के लिए भी देनी होगी फीस

प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगने के बाद से बिजली के बढ़े हुए बिलों को लेकर उपभोक्ताओं की शिकायतें बढ़ गई हैं। इस बीच बिजली विभाग के नए नियमों ने उपभोक्ताओं की चिंता और बढ़ा दी है। अब यदि किसी उपभोक्ता को अपने बिल पर संदेह है और वह मीटर की जांच कराना चाहता है, तो उसे इसके लिए शुल्क देना होगा। विभागीय नियमों के अनुसार, सिंगल फेज स्मार्ट मीटर की जांच के लिए 500 रुपये और थ्री फेज मीटर की जांच के लिए 1000 रुपये की फीस तय की गई है। विभाग का पक्ष है कि यदि जांच में मीटर खराब पाया जाता है, तो उपभोक्ता के बिल का पुनर्मूल्यांकन कर अधिक ली गई राशि को आगे समायोजित कर दिया जाएगा। हालांकि, आम लोगों और उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि जांच प्रक्रिया के लिए पहले से शुल्क वसूलना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालता है।

अलनार लौह अयस्क खदान मामला: बिना खनन के रिकॉर्ड में दर्ज हुआ उत्पादन

दंतेवाड़ा जिले की अलनार लौह अयस्क खदान को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक विवाद सामने आया है। आरोपों के मुताबिक, पिछले 9 वर्षों से खदान में खनन कार्य बंद रहने के बावजूद सरकारी दस्तावेजों में 4 लाख टन से अधिक लौह अयस्क का उत्पादन दर्ज कर दिया गया। यह खदान आरती स्पंज एंड पावर लिमिटेड के पास 50 साल की लीज पर है। स्थानीय संगठनों का दावा है कि जिस जगह पर खनन दिखाया गया है, वहां तक जाने के लिए भारी वाहनों के लायक रास्ता भी नहीं है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने प्राथमिक जांच के आदेश दिए हैं। वहीं, शिकायतकर्ताओं ने दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों व संबंधित कंपनी पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।

ईवी सब्सिडी का बजट समाप्त: 155 करोड़ रुपये का भुगतान अटका

छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग के बीच राज्य सरकार द्वारा तय किया गया 100 करोड़ रुपये का सब्सिडी बजट समाप्त हो गया है। वाहनों की रिकॉर्ड बिक्री के कारण अब सब्सिडी का कुल बकाया बढ़कर 155 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वर्ष की तुलना में इस साल ईवी दोपहिया और चार पहिया वाहनों की बिक्री में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कई मॉडल्स के लिए ग्राहकों को हफ्तों तक इंतजार करना पड़ रहा है। परिवहन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सब्सिडी की बकाया राशि का ब्योरा शासन को भेज दिया गया है। जैसे ही नया बजट स्वीकृत होगा, सभी पात्र खरीदारों को सब्सिडी राशि का भुगतान कर दिया जाएगा।

रायपुर में स्कूल बसों की जांच: सुरक्षा में खामी पर 22 बसों पर लगा जुर्माना

राजधानी रायपुर के पुलिस परेड ग्राउंड में आयोजित विशेष जांच शिविर के दौरान 360 स्कूल बसों का निरीक्षण किया गया। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के सुरक्षा दिशा-निर्देशों का पालन न करने पर 22 बसों पर कार्रवाई करते हुए कुल 53 हजार रुपये का जुर्माना वसूला गया। जांच में कई बसों में सीसीटीवी कैमरे बंद मिले, प्राथमिक चिकित्सा किट गायब थीं और अग्निशामक यंत्र एक्सपायर हो चुके थे। इसके अलावा चालकों और परिचालकों के स्वास्थ्य परीक्षण में 48 कर्मचारी बीपी और शुगर से पीड़ित पाए गए, जबकि 22 चालकों की दृष्टि कमजोर मिली। प्रशासन ने सभी संबंधित स्कूल प्रबंधनों को 15 दिनों के भीतर पाई गई कमियों को दुरुस्त करने की सख्त हिदायत दी है।

पाठ्य पुस्तक निगम की ऑडिट रिपोर्ट: 192 करोड़ की वित्तीय अनियमितता का खुलासा

छत्तीसगढ़ राज्य संपरीक्षा की ताजा रिपोर्ट में पाठ्य पुस्तक निगम के कामकाज में 192 करोड़ रुपये से अधिक की गड़बड़ियों की बात सामने आई है। यह ऑडिट रिपोर्ट वर्ष 2017-18 से 2019-20 के वित्तीय लेन-देन पर आधारित है। रिपोर्ट के अनुसार, नियमों को नजरअंदाज कर बिना सक्षम अधिकारियों के संयुक्त हस्ताक्षर के 72 करोड़ रुपये से अधिक के चेक जारी किए गए। इसके अलावा आवश्यकता से अधिक पुस्तकों की छपाई कराने से भी निगम को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचा है। ऑडिट विभाग ने बैंक समाधान पत्रक न बनाने और बिना स्वीकृति के विभिन्न मदों में किए गए खर्चों पर भी गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं।

नक्सल हिंसा पीड़ितों को राहत: बीजापुर के 4 परिवारों के लिए 20 लाख स्वीकृत

राज्य सरकार ने नक्सल हिंसा में जान गंवाने वाले नागरिकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने के लिए 20 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की है। छत्तीसगढ़ नक्सलवाद पुनर्वास नीति के तहत यह राशि बीजापुर जिले के चार प्रभावित परिवारों को दी जाएगी। इस निर्णय के तहत प्रत्येक पीड़ित परिवार को 5-5 लाख रुपये की वित्तीय सहायता मिलेगी। इसके साथ ही पात्र परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत पक्के मकान और अन्य शासकीय योजनाओं का लाभ भी प्राथमिकता के आधार पर दिया जा रहा है। शासन का उद्देश्य प्रभावित क्षेत्रों में पीड़ित परिवारों का सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास सुनिश्चित करना है।

महतारी वंदन योजना: जल्द खुलेगा नया पंजीयन पोर्टल

राज्य सरकार महतारी वंदन योजना का लाभ वंचित महिलाओं तक पहुंचाने के लिए दोबारा आवेदन प्रक्रिया शुरू करने जा रही है। विभागीय तैयारी के अनुसार, नए पंजीयन का पोर्टल जल्द ही क्रियाशील कर दिया जाएगा। इस नए चरण में विशेष रूप से बस्तर संभाग और दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों की पात्र महिलाओं पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जो पहले चरण में आवेदन करने से चूक गई थीं। योजना के तहत 21 वर्ष से अधिक आयु की पात्र विवाहित, विधवा और परित्यक्ता महिलाओं को प्रति माह 1,000 रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाती है। इच्छुक आवेदकों को अपने आवश्यक दस्तावेज तैयार रखने की सलाह दी गई है।

बीजापुर में पुनर्वास नीति का विस्तार: पीड़ितों को मिलेगी सीधी मदद

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास नीति को अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रशासन स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। बीजापुर में स्वीकृत की गई सहायता राशि के साथ-साथ अन्य कल्याणकारी योजनाओं को भी सीधे पीड़ितों से जोड़ा जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि बुनियादी सुविधाएं और त्वरित आर्थिक सहायता मिलने से प्रभावित परिवारों को संबल मिलता है। आने वाले दिनों में बीजापुर और आसपास के इलाकों में पुनर्वास से जुड़ी कुछ और प्रक्रियाओं को गति दी जाएगी, जिससे स्थानीय स्तर पर सामान्य जनजीवन की बहाली में मदद मिल सके।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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