CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की 10 बड़ी खबरें PSC पेपर लीक में 3 करोड़ की वसूली का ED खुलासा, जन्माष्टमी पर शराब-मांस और भांग पर पाबंदी, BJP ने 15 प्रकोष्ठों के प्रभारी बदले, सरकारी कॉलेजों में 1295 शिक्षकों की भर्ती, पत्नी की कमाई पर पति को सवाल पूछने का हाईकोर्ट से अधिकार, बाल संरक्षण गृहों के बदलेंगे नाम, सरकारी दफ्तरों में 122 दिन छुट्टी, राम के ननिहाल चंद्रखुरी के कॉटेज अब लीज पर, कोरबा में 6000 टन राखड़ डंप करने पर NTPC पर 90 लाख जुर्माना समेत पढ़ें छत्तीसगढ़ की बड़ी खबरें…

CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की सभी बड़ी और छोटी खबरें रोजाना हमारी नजर में रहती हैं। दक्षिण कोसल के विशेष सेगमेंट ‘CG की 10 बड़ी खबरें’ में हम आपको समाचार जगत की हर गतिविधि का अपडेट सरल और सहज भाषा में प्रदान करेंगे। तो आइए, पत्रकारिता की इस दुनिया में बने रहें और छत्तीसगढ़ की हर ताजातरीन खबर से अपनी जानकारी को और विस्तृत करे
CGPSC पेपर लीक में ED का बड़ा खुलासा, OSD के नाम पर वसूले 3 करोड़ रुपये
Crime Update: CGPSC-2021 भर्ती घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने नौकरी दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों से 3 करोड़ रुपये से अधिक नकद वसूले जाने का दावा किया है। जांच के अनुसार निजी दलालों के माध्यम से लीक प्रश्न-पत्र चुनिंदा अभ्यर्थियों और आरोपियों के रिश्तेदारों तक पहुंचाए गए। डिप्टी कलेक्टर और DSP जैसे महत्वपूर्ण पदों पर चयन प्रभावित करने के लिए कथित तौर पर पैसों का लेन-देन किया गया। ED के मुताबिक उत्कर्ष चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने प्रश्न-पत्र उपलब्ध कराने के नाम पर इच्छुक अभ्यर्थियों से रकम जुटाई। ED का दावा है कि वसूली गई रकम अपराध से अर्जित आय यानी Proceeds of Crime थी। जांच के मुताबिक इसमें से लगभग 2.80 करोड़ रुपये अनिल चंद्राकर को दिए गए। सबसे गंभीर आरोप यह है कि अभ्यर्थियों को प्रभावित करने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री के तत्कालीन PA के.के. चंद्रवंशी और तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय के OSD के नाम, पद और प्रभाव का कथित इस्तेमाल किया गया। इससे चयन पक्का होने का भरोसा दिलाने का प्रयास किया गया। 1 सितंबर को ED रायपुर जोनल कार्यालय ने रायपुर, दुर्ग, धमतरी और जशपुर में पांच परिसरों पर तलाशी ली। इसके बाद उत्कर्ष चंद्राकर को PMLA की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया। तलाशी में दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस, वित्तीय रिकॉर्ड और संपत्ति से जुड़े कागजात जब्त किए गए। ED ने मोबाइल डेटा, बैंक खातों और PMLA की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों के आधार पर कथित भूमिका सामने आने की बात कही है। मामला EOW/ACB और CBI की FIR से जुड़ी जांच का हिस्सा है।
जन्माष्टमी पर शराब-मांस और भांग पर पाबंदी, 4 सितंबर को ड्राई डे
Government: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर छत्तीसगढ़ में 4 सितंबर को शराब और भांग की बिक्री पूरी तरह बंद रहेगी। सरकार ने नगरीय क्षेत्रों में पशुवध गृह और मांस-मटन की दुकानों को भी बंद रखने के निर्देश दिए हैं। यानी जन्माष्टमी के दिन नगर निगम, नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों की सीमा में पशुवध और मांस बिक्री पर रोक रहेगी। प्रशासन को आदेश का सख्ती से पालन कराने की जिम्मेदारी दी गई है। आबकारी विभाग ने 4 सितंबर को प्रदेशभर में ड्राई डे घोषित किया है। इस दौरान देशी और विदेशी मदिरा की फुटकर दुकानें, रेस्टोरेंट-बार, होटल-बार, क्लब, अहाते और कंपोजिट अहाते बंद रहेंगे। भांग और भांगघोटा की फुटकर दुकानों पर भी बिक्री नहीं होगी। लाइसेंसधारी होटल, रेस्टोरेंट, क्लब और अन्य प्रतिष्ठानों में शराब परोसने की अनुमति भी नहीं होगी। सरकार ने धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले विशेष अवसरों पर मांस बिक्री और पशुवध पर रोक की पूर्व व्यवस्था के तहत जन्माष्टमी को भी प्रतिबंध के दायरे में रखा है। ड्राई डे के दौरान अवैध शराब के परिवहन, भंडारण और बिक्री पर नजर रखने के लिए आबकारी विभाग के उड़नदस्ते सक्रिय रहेंगे। जिला, संभाग और राज्य स्तर की टीमें संभावित ठिकानों और संदिग्ध वाहनों की जांच करेंगी। अवैध शराब मिलने पर सिर्फ जब्ती नहीं होगी, बल्कि आरोपियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण भी दर्ज किया जाएगा। ऐसे में 4 सितंबर को नियमों का उल्लंघन करने वालों पर प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की संभावना रहेगी।
छत्तीसगढ़ भाजपा में बड़ा फेरबदल, 15 प्रकोष्ठों के प्रभारी घोषित
Politics: छत्तीसगढ़ भाजपा ने संगठन को मजबूत करने के लिए 15 प्रकोष्ठों के नए प्रभारियों की घोषणा की है। प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव की सहमति के बाद प्रदेश महामंत्री एवं मुख्यालय प्रभारी डॉ. नवीन मारकण्डेय ने 2 सितंबर को नियुक्ति आदेश जारी किया। सभी नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं। चुन्नीलाल साहू को प्रकोष्ठ संकुल का संयोजक और लाभचंद बाफना को सहसंयोजक बनाया गया है। पार्टी का उद्देश्य अलग-अलग सामाजिक, आर्थिक और पेशेवर वर्गों के बीच संगठनात्मक गतिविधियों को और मजबूत करना है। भाजपा ने मछुआरा प्रकोष्ठ की जिम्मेदारी कृष्णबिहारी जायसवाल, झुग्गी-झोपड़ी प्रकोष्ठ का प्रभार जोगेश लाम्बा और आर्थिक प्रकोष्ठ की जिम्मेदारी राजेश अग्रवाल को दी है। एनजीओ प्रकोष्ठ में एसडी बड़गैया, बुनकर प्रकोष्ठ में सीमा साहू, विधि प्रकोष्ठ में जयप्रकाश चंद्रवंशी और चिकित्सा प्रकोष्ठ में डॉ. ललित माखीजा को प्रभारी बनाया गया है। व्यापार प्रकोष्ठ श्रीचंद सुंदरानी और व्यवसायी प्रकोष्ठ प्रदीप सिंह संभालेंगे। आरटीआई प्रकोष्ठ में डॉ. विजयशंकर मिश्रा को जिम्मेदारी मिली है। सांस्कृतिक प्रकोष्ठ का प्रभार मोना सेन, पंचायत प्रकोष्ठ श्वेता शर्मा और नगरीय निकाय प्रकोष्ठ देवजी भाई पटेल संभालेंगे। शिक्षा प्रकोष्ठ में राजेश साहू और सहकारिता प्रकोष्ठ में विक्रांत सिंह को जिम्मेदारी दी गई है। पार्टी अब शिक्षा, पंचायत, नगरीय निकाय, व्यापार, चिकित्सा और सहकारिता जैसे क्षेत्रों में गतिविधियां बढ़ाने की तैयारी कर रही है। नए प्रभारियों के सामने संबंधित वर्गों के बीच संगठन की सक्रियता बढ़ाने और प्रदेश नेतृत्व के निर्देशों को जमीन तक पहुंचाने की चुनौती होगी।
सरकारी कॉलेजों में 1295 शिक्षकों की भर्ती, 700 सहायक प्राध्यापक और 595 प्राध्यापक होंगे नियुक्त
Education News: छत्तीसगढ़ के सरकारी कॉलेजों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए 1295 पदों पर भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसमें 700 सहायक प्राध्यापक और 595 प्राध्यापक के रिक्त पद शामिल हैं। सहायक प्राध्यापकों के 700 पदों पर भर्ती प्रक्रिया पहले से जारी है और इसमें आ रही रुकावटों को दूर कर आगे बढ़ाने की तैयारी है। नई नियुक्तियों से लंबे समय से शिक्षकों की कमी झेल रहे सरकारी कॉलेजों को राहत मिलने की उम्मीद है। सहायक प्राध्यापकों के साथ प्राध्यापकों के 595 रिक्त पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया में भी तेजी लाई जा रही है। इसका उद्देश्य उच्च कक्षाओं में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी दूर करना है। विभाग ने नई भर्ती के साथ विभागीय पदोन्नति पर भी ध्यान दिया है। डिग्री कॉलेजों के प्राचार्यों के पदों पर लंबित पदोन्नति प्रक्रिया को 15 सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही ऐसे मामलों की जांच भी की जा रही है, जहां अपात्र प्राध्यापकों को पदोन्नति मिलने की शिकायत है। वरिष्ठ और प्रवर श्रेणी वेतनमान से जुड़े लंबित मामलों तथा न्यायालयीन प्रकरणों के निराकरण के लिए भी समयसीमा तय की गई है। लंबित न्यायालयीन मामलों और याचिकाओं को 1 अक्टूबर 2026 तक निपटाने का लक्ष्य रखा गया है। कॉलेजों में अतिथि व्याख्याताओं के शिक्षकीय कार्यों का नियमित आकस्मिक निरीक्षण भी किया जाएगा। सीट बढ़ाने के प्रस्ताव दिसंबर तक लेने और जनवरी तक मंजूरी देने की योजना है। चार वर्षीय B.Ed. पाठ्यक्रम के लिए NCTE की नैक ग्रेडिंग शर्तों और BCI के नियमों के अनुसार व्यवस्थाओं पर भी काम किया जाएगा।
पत्नी की कमाई पर सवाल कर सकता है पति, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बताया अधिकार
Court Update: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने गुजारा भत्ता से जुड़े मामले में स्पष्ट किया है कि पति को पत्नी की आय और कमाई के स्रोत से जुड़े सवाल पूछने का अधिकार है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि यही अधिकार पत्नी को पति की आय के संबंध में हासिल है। मामले में जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की अदालत ने निष्पक्ष सुनवाई के महत्व पर जोर दिया। कोर्ट के अनुसार यदि पत्नी ने अपनी आय और कमाई के स्रोत की जानकारी शपथ पत्र में दी है, तो पति को उस जानकारी पर सवाल पूछने और जिरह करने का अवसर मिलना चाहिए। रायपुर की एक महिला ने दुर्ग फैमिली कोर्ट में पति से गुजारा भत्ता मांगने के लिए आवेदन दिया था। उसने अपनी संपत्ति और आय का विवरण शपथ पत्र के जरिए प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान पति के वकील ने उसकी आय और कमाई के स्रोत से जुड़े सवाल पूछे, लेकिन दुर्ग फैमिली कोर्ट के द्वितीय अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश ने 3 अगस्त 2026 को ऐसे सवाल पूछने पर रोक लगा दी। इसके बाद पति ने हाईकोर्ट में इस आदेश को चुनौती दी। हाईकोर्ट ने पति की याचिका स्वीकार करते हुए फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया। दुर्ग फैमिली कोर्ट को 11 सितंबर 2026 की सुनवाई में पति को पत्नी के शपथ पत्र और आय के स्रोत पर सवाल पूछने की अनुमति देने का निर्देश दिया गया। हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि सवाल बार-बार नहीं दोहराए जाने चाहिए और अदालत का समय अनावश्यक रूप से बर्बाद नहीं होना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पत्नी भी पति की आय पर सवाल कर सकती है। गुजारा भत्ता से संबंधित प्रावधान अब BNSS की धारा 144 में है, जिसने पुराने CrPC की धारा 125 का स्थान लिया है।
बाल संरक्षण गृहों के बदलेंगे नाम, बच्चों की राय और स्थानीय संस्कृति को मिलेगा महत्व
Government: छत्तीसगढ़ में बाल संरक्षण गृहों के नाम बदलने की तैयारी शुरू हो गई है। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने इस दिशा में कार्रवाई शुरू करते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र लिखा है। आयोग चाहता है कि इन संस्थाओं के नाम सकारात्मक, सम्मानजनक और बच्चों के मन में अपनापन पैदा करने वाले हों। उद्देश्य यह है कि जिन बच्चों को सुरक्षा और बेहतर भविष्य के लिए इन संस्थाओं में रहना पड़ता है, उन्हें संस्था का नाम सुनकर अलगाव या अपराधबोध महसूस न हो। आयोग ने जम्मू में इस्तेमाल किए जा रहे ‘पलाश’ और ‘परिषा’ जैसे नामों का उदाहरण दिया है। ऐसे नाम सरकारी संस्थान जैसी कठोर पहचान के बजाय सहज और सकारात्मक भाव पैदा करते हैं। छत्तीसगढ़ में भी नाम तय करते समय स्थानीय भाषा, संस्कृति, प्रकृति, लोक परंपरा और क्षेत्रीय पहचान को महत्व देने का सुझाव दिया गया है। इससे अलग-अलग जिलों में स्थित बाल संरक्षण संस्थाओं की पहचान स्थानीय परिवेश से जुड़ सकती है। इस पहल में बच्चों की राय को विशेष महत्व दिया जा रहा है। आयोग ने कहा है कि नाम केवल ऊपर से तय नहीं किए जाने चाहिए, बल्कि बच्चों, देखरेख करने वालों और अन्य हितधारकों से भी सुझाव लिए जाएं। महिला एवं बाल विकास विभाग से जिलों से नए नामों की सूची और की गई कार्रवाई की जानकारी 21 सितंबर तक आयोग को देने का आग्रह किया गया है। आयोग का मानना है कि नाम में सम्मान और उम्मीद की भावना होना बच्चों के आत्मसम्मान से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
छत्तीसगढ़ में साल में करीब 122 दिन सरकारी छुट्टियां, कामकाज को लेकर उठे सवाल
Government Update: छत्तीसगढ़ में वर्ष 2026 के सरकारी अवकाश कैलेंडर को लेकर कामकाज और आम लोगों की सुविधा से जुड़े सवाल उठ रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार शनिवार-रविवार, राष्ट्रीय और सार्वजनिक अवकाश सहित साल में करीब 122 दिन सरकारी कार्यालयों में नियमित कामकाज नहीं होगा। राज्य में नुआखाई, पोला और तीजा सहित कई स्थानीय पर्वों पर भी अवकाश रहता है। इसके अलावा ऐच्छिक अवकाश और कर्मचारियों को मिलने वाली अन्य छुट्टियां अलग हैं। ऐसे में राशन कार्ड, जाति-निवास प्रमाण पत्र, नामांतरण और राजस्व संबंधी काम कराने वालों को कार्यालय जाने से पहले अवकाश की तारीख देखना जरूरी हो सकता है। साल के 365 दिनों में करीब 122 दिन अवकाश होने का अर्थ है कि नियमित कामकाज के लिए लगभग 243 दिन उपलब्ध रहते हैं। उपलब्ध सामग्री के अनुसार औसतन हर महीने 8 से 13 दिन तक छुट्टियां पड़ रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों के लिए इसका असर अधिक हो सकता है, क्योंकि आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, सीमांकन और भू-अभिलेख जैसे कामों के लिए उन्हें तहसील या जिला मुख्यालय तक पहुंचना पड़ता है। कार्यालय बंद मिलने पर उनका समय और यात्रा खर्च दोनों प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि छत्तीसगढ़ अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन का पक्ष अलग है। फेडरेशन का कहना है कि केवल छुट्टियों को काम प्रभावित होने की वजह बताना पूरी तरह सही नहीं है। मंत्रालय से लेकर जिला और ब्लॉक स्तर तक ई-ऑफिस और सेवा सेतु जैसी ऑनलाइन व्यवस्थाएं लागू हैं, जिनसे जरूरी फाइलों का निपटारा ऑनलाइन किया जा सकता है। साथ ही कई सरकारी विभागों में पद रिक्त होने के कारण मौजूदा कर्मचारियों पर काम का दबाव भी है। जरूरत पड़ने पर कर्मचारी अवकाश के दिनों में भी काम करते हैं।
राम के ननिहाल चंद्रखुरी में बंद पड़े कॉटेज, तीन टेंडर के बाद अब लीज पर देने की तैयारी
Tourism News: छत्तीसगढ़ के चंद्रखुरी स्थित माता कौशल्या धाम में पर्यटकों की सुविधा के लिए बनाए गए कॉटेज लंबे समय से बंद हैं। पर्यटन मंडल ने इनके संचालन और मेंटेनेंस के लिए तीन बार टेंडर बुलाए, लेकिन हर बार न्यूनतम आवश्यक प्रस्ताव नहीं मिलने के कारण निविदा प्रक्रिया निरस्त करनी पड़ी। अब पर्यटन मंडल इन कॉटेज को लीज मॉडल के जरिए संचालित कराने की तैयारी कर रहा है। चंद्रखुरी को भगवान राम की माता कौशल्या के मायके के रूप में धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व प्राप्त है। पर्यटन मंडल के अनुसार कॉटेज पर्यटकों को ठहरने की सुविधा देने के उद्देश्य से तैयार किए गए हैं। इनके संचालन और प्रबंधन के लिए निविदा प्रक्रिया अपनाई गई थी। पहली निविदा में आवश्यक न्यूनतम प्रस्ताव नहीं मिले। इसके बाद दूसरी और तीसरी बार भी यही स्थिति रही। नियमों के अनुसार तीनों निविदाएं निरस्त करनी पड़ीं। अब विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में लीज पर संचालन का प्रस्ताव तैयार कर प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी की है। प्रस्तावित प्रक्रिया पूरी होने के बाद कॉटेज का संचालन शुरू होने की उम्मीद है। इससे माता कौशल्या धाम आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को ठहरने, खान-पान और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। पर्यटन मंडल के अनुसार चंद्रखुरी केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल भी है। ऐसे में बंद पड़े कॉटेज को उपयोगी बनाने के लिए लीज मॉडल के जरिए संचालन शुरू करने की कोशिश की जा रही है।
कोरबा में सरकारी जमीन पर 6000 टन फ्लाई ऐश डंप, NTPC पर 90 लाख रुपये का जुर्माना
Environment News: कोरबा के छुरी क्षेत्र में सरकारी जमीन पर करीब 6000 टन फ्लाई ऐश यानी राखड़ डंप किए जाने का मामला सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह राखड़ लगभग 200 ट्रकों के जरिए सरकारी जमीन पर पहुंचाई गई थी। राखड़ NTPC के जमनीपाली स्थित धनरास राखड़ बांध से निकली थी और इसे दुर्ग-आरंग-रायपुर बायपास निर्माण परियोजना के लिए भेजा जाना था। निर्धारित जगह तक राखड़ पहुंचाने के बजाय उसे करीब 10 किलोमीटर दूर छुरी क्षेत्र में डंप किए जाने का आरोप है। मामले की जानकारी मिलने के बाद क्षेत्रीय पर्यावरण संरक्षण मंडल की टीम ने मौके पर पहुंचकर राखड़ डंप करने की स्थिति और परिवहन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की। जांच में नियमों की अनदेखी सामने आने के बाद NTPC प्रबंधन पर 90 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। पर्यावरण अधिकारी ने NTPC को 15 दिन के भीतर जुर्माने की राशि जमा करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने डंप की गई राखड़ को हटाकर निर्धारित स्थान तक पहुंचाने का निर्देश भी दिया है। खुले में बड़ी मात्रा में फ्लाई ऐश डंप होने से आसपास के क्षेत्र में प्रदूषण का खतरा बढ़ सकता है। हवा चलने पर राखड़ आसपास फैलने से वायु गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ जमीन और जल स्रोतों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई है। NTPC की ओर से बताया गया है कि जुर्माने की राशि ठेका एजेंसी के भुगतान से काटकर पर्यावरण संरक्षण मंडल में जमा कराई जाएगी। मामले के बाद फ्लाई ऐश के परिवहन और निपटारे की व्यवस्था पर भी सवाल उठे हैं।
चंद्रखुरी के माता कौशल्या धाम के कॉटेज फिर चर्चा में, लीज मॉडल से संचालन की तैयारी
Chhattisgarh Tourism: चंद्रखुरी स्थित माता कौशल्या धाम के कॉटेज को लीज पर संचालित करने की तैयारी एक बार फिर सामने आई है। उपलब्ध स्रोत में यह खबर दो बार दर्ज है और दोनों जगह समान जानकारी दी गई है। कॉटेज पर्यटकों के ठहरने की सुविधा के लिए तैयार किए गए थे, लेकिन संचालनकर्ता नहीं मिलने के कारण लंबे समय से बंद हैं। पर्यटन मंडल ने संचालन और मेंटेनेंस के लिए तीन बार टेंडर जारी किए, लेकिन न्यूनतम आवश्यक प्रस्ताव नहीं मिलने के कारण तीनों प्रक्रियाएं निरस्त करनी पड़ीं। अब पर्यटन मंडल लीज मॉडल के माध्यम से कॉटेज का संचालन शुरू कराने की प्रक्रिया पर आगे बढ़ रहा है। विभाग का उद्देश्य यह है कि चंद्रखुरी आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को ठहरने और खान-पान सहित आवश्यक सुविधाएं मिल सकें। माता कौशल्या धाम को प्रदेश के महत्वपूर्ण धार्मिक और पर्यटन स्थलों में विकसित किया जा रहा है। इसलिए उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और लंबे समय से बंद कॉटेज को पर्यटकों के लिए उपयोगी बनाने की दिशा में वैकल्पिक व्यवस्था अपनाई जा रही है। लीज पर संचालन के लिए प्रस्ताव तैयार कर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। इसके पूरा होने के बाद कॉटेज शुरू होने से चंद्रखुरी आने वाले पर्यटकों को स्थानीय स्तर पर ठहरने की सुविधा मिल सकती है। चंद्रखुरी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व इसे पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाता है। ऐसे में कॉटेज का संचालन शुरू होना पर्यटकों की सुविधा बढ़ाने की दिशा में अहम कदम होगा। फिलहाल उपलब्ध स्रोत में इस दसवीं प्रविष्टि के लिए नौवीं खबर से अलग कोई नया तथ्य नहीं दिया गया है।



