Operation Trap Tree Forest Department: कीड़ा मारकर गांव वाले 20 लाख कमा लिए, जानें कैसे

Forest Department Operation Trap Tree: मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले में स्थित प्राचीन साल के जंगलों पर एक बड़े संकट के बादल मंडरा रहे हैं। लगभग 40 करोड़ साल पुराने इतिहास वाले इन विशाल पेड़ों को लंबी मूंछ वाला एक विशेष बोरर कीड़ा अंदर से खोखला कर रहा है। करीब तीन दशकों के अंतराल के बाद इस कीट का प्रकोप इतने बड़े पैमाने पर देखने को मिल रहा है। जिले के पूर्व करंजिया, पश्चिम करंजिया, दक्षिण समनापुर और बजाग वन परिक्षेत्र में 1.46 लाख से अधिक पेड़ इस कीट के हमले से प्रभावित हो चुके हैं। जंगलों को बर्बादी से बचाने के लिए वन विभाग ने स्थानीय ग्रामीणों के साथ मिलकर एक अनोखा अभियान शुरू किया है।

जंगलों को बचाने के लिए वन विभाग ने शुरू किया ऑपरेशन ट्रैप ट्री

Dindori Sal Borer Insect Attack: कीड़ों के तेजी से बढ़ते प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए वन विभाग ने ‘ऑपरेशन ट्रैप ट्री’ नाम से एक विशेष मुहिम शुरू की है। इस अभियान के तहत जंगल के पास रहने वाले ग्रामीणों को कीड़े पकड़ने के काम में जोड़ा गया है। विभाग ने प्रत्येक बोरर कीड़े को पकड़कर लाने पर 2 रुपये का नकद इनाम घोषित किया है। इस प्रोत्साहन राशि के कारण बड़ी संख्या में ग्रामीण रोज सुबह जंगलों में कीड़ों की खोज में निकल रहे हैं। इस पहल से एक तरफ जहां कीड़ों की संख्या पर लगाम लग रही है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय लोगों को रोजगार का एक नया जरिया मिल गया है।

ग्रामीणों ने पकड़े 10 लाख से अधिक कीड़े और कमाए 20 लाख रुपये

वन विभाग द्वारा इनाम की घोषणा के बाद से ग्रामीणों ने अभूतपूर्व तत्परता दिखाई है। 20 जून से शुरू हुए इस अभियान के अंतर्गत अब तक ग्रामीण 10 लाख से अधिक बोरर कीड़ों को पकड़ चुके हैं। इसके बदले में विभाग द्वारा ग्रामीणों को 20 लाख रुपये से अधिक की राशि का भुगतान किया जा रहा है। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह राशि सीधे ग्रामीणों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जा रही है। ग्रामीण पकड़े गए कीड़ों की गिनती आसान बनाने के लिए उनकी मालाएं बनाकर वन कार्यालय में जमा कराते हैं।

जानिए क्या है पेड़ों को सुखाने वाला यह खतरनाक बोरर कीट

साल के मजबूत से मजबूत पेड़ों को सुखा देने वाले इस कीट की अपनी कुछ खास शारीरिक और जैविक विशेषताएं होती हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से इसे बेहद विनाशकारी माना जाता है।

  • इसका वैज्ञानिक नाम हॉपलोसिरेंबिक्स स्पाइनिकॉर्निस (Hoplocerambyx spinicornis) है।
  • यह कीट गहरे भूरे रंग का होता है और इसके सिर पर शरीर से लंबी मूंछें होती हैं।
  • यह जून और जुलाई के महीनों में साल के पेड़ों की छाल के भीतर अंडे देता है।
  • अंडों से निकलने के बाद इसके लारवा तने के भीतर प्रवेश करके लकड़ी को खाना शुरू करते हैं।
  • प्रभावित पेड़ के तने के निचले हिस्से में लकड़ी के महीन बुरादे का ढेर जमने लगता है।
  • कीट के लगातार हमले से पेड़ का विकास रुक जाता है और 300 साल तक जीने वाला पेड़ सूख जाता है।
  • इस कीड़े की मुख्य विशेषता यह है कि यह केवल सुबह के समय शांत रहता है और धूप खिलते ही उड़ने लगता है।

तड़के सुबह 5 से 7 बजे के बीच चलाया जाता है विशेष सर्च अभियान

बोरर कीड़े को पकड़ने का काम बेहद चुनौतीपूर्ण होता है क्योंकि सूरज उगने के बाद यह उड़ने में सक्षम हो जाता है। यही वजह है कि ग्रामीण सुबह 5 बजे से 7 बजे के बीच ही जंगलों में उतरते हैं। इस दौरान कीड़े सुस्त अवस्था में होते हैं और तनों पर चिपके रहते हैं। धूप निकलने से पहले कीड़ों को पकड़ना आसान होता है, इसलिए ग्रामीण बिना कोई समय गंवाए मुस्तैदी से अपनी थैलियां भरते हैं। 7 बजे के बाद जब तापमान बढ़ता है, तो ये कीड़े तेजी से उड़कर हाथ से निकल जाते हैं।

पेड़ों की छाल के रेजिन और धुएं से बिछाया जाता है जाल

वन विभाग और ग्रामीणों ने इन कीड़ों को आकर्षित करने और बाहर निकालने के लिए कुछ पारंपरिक और कारगर तरीके अपनाए हैं।

  • वन विभाग साल के पेड़ की छाल से निकलने वाले ‘रेजिन’ को कूटकर उसका पाउडर तैयार कराता है।
  • इस पाउडर को ग्रामीणों के घरों और जंगलों के आसपास रखा जाता है, जिसकी तीखी गंध से कीड़े खिंचे चले आते हैं।
  • ग्रामीण पेड़ों के तनों में बने उन छोटे छेदों की पहचान करते हैं जहां कीड़े और उनके लारवा छिपे होते हैं।
  • छेदों को गीली मिट्टी या पत्तियों से आंशिक रूप से बंद कर दिया जाता है, जिससे दम घुटने पर कीड़े बाहर आते हैं।
  • कई स्थानों पर पेड़ों के तने के पास हल्का धुआं किया जाता है ताकि ऑक्सीजन की कमी से कीड़े तुरंत बाहर आ जाएं।

डिब्बे और थैलियों में जमा कर वैज्ञानिक तरीके से किया जाएगा नष्ट

जैसे ही कीड़ा तने से बाहर निकलता है, ग्रामीण उसे चिमटी, पतली लकड़ी या हाथों की मदद से सावधानीपूर्वक पकड़कर डिब्बों या थैलियों में बंद कर लेते हैं। इसके बाद इन कीड़ों की निश्चित गिनती करके माला तैयार की जाती है और वन विभाग के दफ्तर में जमा कराया जाता है। वन अधिकारियों की मौजूदगी में प्रति सिर के हिसाब से सूची तैयार की जाती है। जुलाई महीने के अंत में एकत्र किए गए इन सभी 10 लाख से अधिक कीटों को वैज्ञानिकों की देखरेख में सुरक्षित तरीके से नष्ट कर दिया जाएगा ताकि इनका दोबारा प्रसार न हो सके।

1.50 लाख हेक्टेयर में फैले जंगलों को बचाने की बड़ी चुनौती

डिंडौरी जिले का लगभग 1.50 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र साल के कीमती और घने पेड़ों से घिरा हुआ है। 1995 में भी इस क्षेत्र में बोरर कीट का भारी हमला देखने को मिला था, जिसके बाद बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई करनी पड़ी थी। इस बार वन विभाग समय रहते स्थिति को नियंत्रण में लाने का प्रयास कर रहा है ताकि करोड़ों की वन संपत्ति को बचाया जा सके। ग्रामीणों की सहभागिता से चलाया जा रहा यह ‘ऑपरेशन ट्रैप ट्री’ पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय आजीविका का एक अनूठा उदाहरण बन चुका है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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