
Modi Cabinet Decision: देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने और धांधली पर रोक लगाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में ‘पेपर लीक संशोधन विधेयक’ को मंजूरी दे दी गई है। इस नए कानून के तहत पेपर लीक में शामिल अपराधियों के खिलाफ 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के भारी जुर्माने का कड़ा प्रावधान किया गया है। सरकार की योजना इसे आगामी सोमवार को ही संसद में पेश करने की है।
फास्ट ट्रैक कोर्ट में 3 महीने के भीतर पूरा होगा केस
प्रस्तावित विधेयक में मुकदमों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन को कानूनी मान्यता देने की बात कही गई है। इन अदालतों को तीन महीने की समय-सीमा के भीतर सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाने का आदेश होगा। सरकार का मानना है कि अदालती प्रक्रियाओं में तेजी आने से दोषियों को समय पर सजा मिलेगी और भावी परीक्षाओं के लिए एक कड़ा संदेश जाएगा। संभवतः यह बिल 27 जुलाई को ही सदन के पटल पर रखा जा सकता है।
छात्रों के भविष्य की सुरक्षा और प्रशासनिक फेरबदल
प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में अपने वक्तव्य में कहा था कि पेपर लीक की घटनाएं लाखों युवाओं और उनके परिवारों के मनोबल को प्रभावित करती हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया था कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। इसी कड़ी में प्रशासनिक मुस्तैदी दिखाते हुए केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग में भी फेरबदल किया है। 1994 बैच के राजस्थान कैडर के आईएएस अधिकारी नरेश पाल गंगवार को नया सचिव नियुक्त किया गया है, जो विनीत जोशी का स्थान लेंगे।
विपक्ष के हंगामे और प्रदर्शनों के बीच संसद में आएगा बिल
संसद के दोनों सदनों में नीट और अन्य परीक्षाओं के पेपर लीक मामले को लेकर लगातार गतिरोध बना हुआ है। भारी हंगामे के चलते कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा था। वहीं दिल्ली में विभिन्न संगठनों और छात्र समूहों द्वारा भी इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन किए जा रहे थे। इस चौतरफा दबाव के बीच सरकार द्वारा लाए जा रहे इस नए कठोर विधेयक को प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक निर्णायक कदम के रूप में देखा जा रहा है।



