Bankipur Assembly Election Result: PM के ‘बॉस’ की सीट पर PK की ऐतिहासिक जीत, बिहार में तीसरे विकल्प का उदय, बांकीपुर में 31 साल बाद गिरा BJP का किला

Bankipur Assembly Prashant Kishor Jan Suraaj Win: बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीति में बड़ा भूचाल ला दिया है। तीन दशकों से भारतीय जनता पार्टी का अभेद्य किला मानी जाने वाली इस सीट पर जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने शानदार जीत दर्ज की है। इस ऐतिहासिक चुनावी जीत के साथ ही प्रशांत किशोर ने न केवल अपने चुनावी सफर का विजयी आगाज किया है, बल्कि बिहार में एक मजबूत तीसरे विकल्प की नींव भी रख दी है।

प्रशांत किशोर बांकीपुर उपचुनाव में जीत के बाद प्रमाण पत्र लेते हुए

बांकीपुर उपचुनाव के नतीजे एक नजर में

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के कुल मतों की गिनती के बाद चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए अंतिम आंकड़े इस प्रकार हैं:

उम्मीदवारपार्टीप्राप्त कुल वोटअंतर / स्थिति
प्रशांत किशोरजन सुराज पार्टी64,15119,324 वोटों से विजयी
नीरज कुमार सिन्हाभारतीय जनता पार्टी44,827दूसरे स्थान पर
रेखा कुमारीराष्ट्रीय जनता दल14,273तीसरे स्थान पर

तीन दशक पुराने बीजेपी के गढ़ में लगी बड़ी सेंध

बांकीपुर सीट को भारतीय जनता पार्टी का सबसे सुरक्षित और मजबूत शहरी गढ़ माना जाता रहा है। वर्ष 1995 (तब पटना पश्चिम) से लेकर अब तक इस सीट पर बीजेपी का लगातार कब्जा रहा है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद यह सीट खाली हुई थी। इस उपचुनाव में अपनी विरासत को बचाने के लिए पूरी पार्टी ने ताकत झोंक दी थी, लेकिन जनता ने प्रशांत किशोर के पक्ष में एकतरफा जनादेश देकर इतिहास बदल दिया।

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन

बीजेपी प्रत्याशी नीरज सिन्हा की हार के मुख्य कारण

बांकीपुर में भाजपा की इस करारी हार के पीछे कई बड़े राजनीतिक कारण सामने आए हैं। पार्टी का अत्यधिक आत्मविश्वास और शुरुआत में उम्मीदवार को लेकर दिखा भ्रम हार की बड़ी वजह बना। भाजपा ने पहले अभिषेक बंटी को उतारने की तैयारी की और बाद में नीरज कुमार सिन्हा को मैदान में उतारा, जिन्हें स्थानीय स्तर पर कमजोर प्रत्याशी माना गया। यहां तक कि भाजपा प्रत्याशी कई बूथों पर भी पिछड़ गए।

नीट छात्र आंदोलन और राज्य के ज्वलंत मुद्दों का असर

चुनाव प्रचार के दौरान नीट पेपर लीक और उसके बाद हुए छात्र आंदोलनों को लेकर युवाओं और परीक्षार्थियों में भारी गुस्सा देखने को मिला। इसके साथ ही यूजीसी नियमों और अगड़ी जातियों के छात्रों के बीच पनपे असंतोष का सीधा नुकसान भाजपा को उठाना पड़ा। राज्य में कानून व्यवस्था के गिरते स्तर और चर्चित मामलों को लेकर भी जनता के बीच सत्तारूढ़ गठबंधन के प्रति नाराजगी बनी हुई थी।

विपक्ष का वोट बैंक सीधे प्रशांत किशोर के खाते में गया

इस उपचुनाव में मुख्य विपक्षी दल राजद की मौजूदगी बेहद कमजोर साबित हुई। राजद उम्मीदवार रेखा कुमारी मात्र 14,273 वोटों पर सिमट कर तीसरे स्थान पर चली गईं। कांग्रेस की अनुपस्थिति और तेजस्वी यादव की सक्रियता की कमी के कारण भाजपा विरोधी मतों का बिखराव नहीं हुआ। मुस्लिम और यादव मतदाताओं के साथ-साथ पारंपरिक तटस्थ वोट भी सीधे प्रशांत किशोर की झोली में चले गए।

जाति-पाति से ऊपर उठकर शिक्षा और रोजगार के मुद्दे पर वोट

बिहार की पारंपारिक जातीय राजनीति के विपरीत इस चुनाव में स्थानीय लोगों ने जातिगत दीवारों को तोड़कर वोट दिया। प्रशांत किशोर पिछले लंबे समय से अपनी पदयात्रा और अभियानों के जरिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और पलायन जैसे मुद्दों पर बात कर रहे हैं। उनके इस विजन को बांकीपुर के शहरी और शिक्षित मतदाताओं ने हाथों-हाथ लिया और जन सुराज को पहली चुनावी सफलता दिलाई।

राष्ट्रीय अध्यक्ष के गृह क्षेत्र में हार से दिल्ली तक हलचल

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के अपने ही संसदीय और विधानसभा प्रभाव वाले क्षेत्र में हार का सामना करना पार्टी के लिए बड़ा झटका है। पूरी राज्य कैबिनेट और केंद्रीय मंत्रियों के कैंप करने के बावजूद पार्टी अपनी सीट नहीं बचा सकी। इस हार की गूंज पटना से लेकर दिल्ली के सियासी गलियारों तक सुनाई दे रही है और इसने आगामी विधानसभा चुनावों के लिए बीजेपी की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बिहार की सियासत में ‘तीसरे विकल्प’ का उदय

बांकीपुर उपचुनाव के इस नतीजे ने यह साबित कर दिया है कि बिहार की जनता एनडीए और महागठबंधन के पारंपरिक गठबंधनों से हटकर एक नए विकल्प की तलाश में है। प्रशांत किशोर की इस ऐतिहासिक जीत ने जन सुराज को राज्य में एक मजबूत और विश्वसनीय राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित कर दिया है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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