
CG Patwari Strike: छत्तीसगढ़ में दो सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदेशभर के पटवारी एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल पर चले गए हैं। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों में पटवारियों ने काम बंद कर विरोध प्रदर्शन किया। जिला मुख्यालयों के मैदानों में एकजुट होकर पटवारियों ने शासन से राजस्व निरीक्षक और नायब तहसीलदार के पदों पर पदोन्नति देने तथा वेतन विसंगति को दूर करने की मांग की है।
2013 से अटका है पदोन्नति का मामला
पटवारी संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रदेश भर में राजस्व निरीक्षकों के कई पद खाली पड़े हैं। इसके बावजूद साल 2013 के बाद से पटवारियों को प्रमोशन नहीं दिया गया है। संघ की मांग है कि वरिष्ठता और विभागीय परीक्षा के आधार पर 50-50 प्रतिशत के अनुपात में पदोन्नति दी जाए। इसके अलावा लंबे समय से चली आ रही वेतन विसंगति को दूर कर न्यायसंगत वेतनमान लागू किया जाए।
मांग पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी
हड़ताल पर बैठे संघ के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक दिवसीय सांकेतिक प्रदर्शन है, जिसका मुख्य उद्देश्य शासन का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर खींचना है। यदि सरकार ने समय रहते उनकी मांगों पर सकारात्मक रुख नहीं अपनाया, तो प्रांतीय निकाय के साथ बैठक कर भविष्य में अनिश्चितकालीन आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी।

आय, जाति और निवास प्रमाण पत्रों का काम अटका
पटवारियों के हड़ताल पर रहने से तहसील और राजस्व कार्यालयों में दूर-दराज़ से आए आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। जमीन के नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन के साथ-साथ छात्रों और युवाओं के आय, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र से जुड़े राजस्व कार्य पूरी तरह प्रभावित रहे। आवश्यक दस्तावेज न बनने के कारण लोगों को बिना काम कराए वापस लौटना पड़ा।
राजस्व प्रशासन की व्यवस्था पर असर
पटवारी ग्रामीण और शहरी स्तर पर राजस्व प्रशासन की प्राथमिक कड़ी होते हैं। ऐसे में उनके काम बंद करने से सरकारी योजनाओं के सत्यापन और भूमि संबंधी दैनिक प्रक्रियाओं पर सीधा असर पड़ा है। स्थानीय प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है, हालांकि हड़ताल समाप्त न होने पर आने वाले दिनों में आम जनता की समस्याएं और बढ़ सकती हैं।
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