
Fake Bank Loan Fraud: छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में महिलाओं के नाम पर फर्जी बैंक लोन निकालकर लाखों रुपये की धोखाधड़ी का गंभीर मामला सामने आया है। गुरुर ब्लॉक के ग्राम नारागांव की दर्जनों पीड़ित महिलाओं ने कलेक्टरेट पहुंचकर अपर कलेक्टर चंद्रकांत कौशिक को ज्ञापन सौंपा। महिलाओं ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और फर्जी तरीके से दर्ज कराए गए बैंक कर्ज से मुक्ति दिलाने की गुहार लगाई है।
मुनाफे का लालच देकर महिलाओं को जाल में फंसाया
पीड़ित महिलाओं का आरोप है कि गांव के ही कुछ प्रभावशील लोगों ने उन्हें कम ब्याज दरों पर सरकारी योजनाएं और व्यापार में मोटा मुनाफा कमाने का झांसा दिया। आरोपियों ने महिलाओं को विश्वास में लेते हुए कहा कि लोन की किस्तें वे खुद जमा करेंगे और महिलाओं को केवल दस्तावेज देने होंगे। इस भरोसे के बाद महिलाओं ने अपने बैंक पासबुक और पहचान संबंधी दस्तावेज आरोपियों के हवाले कर दिए।
17 बैंक और माइक्रो फाइनेंस कंपनियों से निकाला कर्ज
आरोपियों ने इन दस्तावेजों के आधार पर विभिन्न राष्ट्रीयकृत बैंकों और निजी माइक्रो फाइनेंस कंपनियों से महिलाओं के नाम पर लाखों रुपये का कर्ज स्वीकृत करा लिया। ऋण की पूरी रकम आरोपियों ने अपने पास रख ली और शुरुआती दो से तीन महीनों तक कुछ किस्तें खुद जमा कीं ताकि किसी को शक न हो। हालांकि, बाद में किस्तें जमा होना पूरी तरह बंद हो गईं। वर्तमान में एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक, जना स्मॉल फाइनेंस बैंक, स्पंदना स्फूर्ति, एलएंडटी फाइनेंस, अन्नपूर्णा फाइनेंस और सत्या माइक्रो कैपिटल सहित कुल 17 वित्तीय संस्थानों से यह पूरा मामला जुड़ा हुआ है।
रिकवरी एजेंटों के दबाव से परेशान हैं ग्रामीण परिवार
किस्तें जमा न होने के बाद अब बैंक और वित्तीय संस्थाओं ने महिलाओं को नोटिस भेजना शुरू कर दिया है। लगातार आ रहे फोन, एसएमएस और घर पहुंच रहे रिकवरी एजेंटों के दबाव के कारण गांव के परिवार बेहद परेशान हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने जिस रकम का उपयोग ही नहीं किया, उसकी वसूली के लिए उन पर मानसिक दबाव बनाया जा रहा है।
2024 में भी जेल जा चुके हैं मुख्य आरोपी
ग्रामीण महिलाओं ने ज्ञापन में गांव के ही सरिता करियाम, चंद्रहास करियाम और खोरबाहरा केवट पर धोखाधड़ी का सीधा आरोप लगाया है। वर्ष 2024 में भी नारागांव और किनारगोंदी की महिलाओं ने इसी तरह समूह के नाम पर फर्जी लोन निकालने की शिकायत दर्ज कराई थी। तब पुलिस ने जांच के बाद इन्हीं तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। ग्रामीणों का कहना है कि जेल से छूटने के बाद आरोपियों ने दोबारा वही तरीका अपनाकर महिलाओं को फिर से अपना शिकार बना लिया।
प्रशासन ने दिया निष्पक्ष जांच का आश्वासन
अपर कलेक्टर चंद्रकांत कौशिक ने पीड़ित महिलाओं की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पूरे मामले की विस्तृत जांच कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि जांच के आधार पर दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी और किसी भी निर्दोष महिला को अकारण परेशान नहीं होने दिया जाएगा।
व्यक्तिगत दस्तावेजों के दुरुपयोग को लेकर सतर्कता की अपील
इस घटनाक्रम के बाद जिला प्रशासन और वित्तीय विशेषज्ञों ने ग्रामीणों से अपने निजी पहचान पत्र, बैंक पासबुक और क्रेडेंशियल्स किसी भी अज्ञात या अनाधिकृत व्यक्ति को न सौंपने की अपील की है। वित्तीय साक्षरता की कमी का फायदा उठाकर इस तरह के गिरोह ग्रामीण इलाकों में आसानी से पैर पसार लेते हैं, इसलिए किसी भी वित्तीय योजना में शामिल होने से पहले अधिकृत बैंक अधिकारियों से सीधे संपर्क करना आवश्यक है।



