CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की 10 बड़ी खबरें सांसद विजय बघेल की विशेषाधिकार शिकायत से मचा हड़कंप, भाजपा में इस्तीफों की बाढ़, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, खेल मंत्री का हॉकी लीग ऐलान, करोड़ों की ठगी का खुलासा, आई फ्लू का बढ़ता प्रकोप, UCC पर सुझाव शुरू, कर्मचारियों के तबादले का नया नियम और IIT भिलाई की बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि समेत पढ़ें छत्तीसगढ़ की बड़ी खबरें…

CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की सभी बड़ी और छोटी खबरें रोजाना हमारी नजर में रहती हैं। दक्षिण कोसल के विशेष सेगमेंट ‘CG की 10 बड़ी खबरें’ में हम आपको समाचार जगत की हर गतिविधि का अपडेट सरल और सहज भाषा में प्रदान करेंगे। तो आइए, पत्रकारिता की इस दुनिया में बने रहें और छत्तीसगढ़ की हर ताजातरीन खबर से अपनी जानकारी को और विस्तृत करे
सांसद विजय बघेल ने लोकसभा अध्यक्ष से की विशेषाधिकार हनन की शिकायत
Politics: छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर सांसद और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच टकराव का मामला गरमा गया है। दुर्ग लोकसभा क्षेत्र से सांसद विजय बघेल ने भिलाई नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त राजीव कुमार पांडेय और भिलाई-चरोदा नगर निगम के आयुक्त डीएस राजपूत के खिलाफ लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष विशेषाधिकार हनन की औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल और स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया के बीच विवाद का मामला भी तूल पकड़ चुका है। सांसद विजय बघेल का मुख्य आरोप है कि ये अधिकारी न केवल उनके फोन कॉल्स का जवाब देने से बचते हैं, बल्कि जनहित से जुड़े विकास कार्यों और प्रशासनिक मामलों में पूरी तरह असहयोग करते हैं। बिना टेंडर के नियम विरुद्ध विकास कार्य कराए जाने और उन पर भ्रष्टाचार की जांच न होने से स्थानीय जनप्रतिनिधियों में भारी असंतोष व्याप्त है। लोकसभा सचिवालय ने इस गंभीर शिकायत पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य शासन और संबंधित अधिकारियों से विस्तृत जवाब तलब किया है। इस मामले के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है और यह देखना दिलचस्प होगा कि शासन स्तर पर इन लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ क्या ठोस कार्रवाई की जाती है।
डोंगरगढ़ भाजपा में इस्तीफों का दौर जारी, पंकज अग्रवाल ने छोड़ी जिम्मेदारी
Politics: राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ भारतीय जनता पार्टी संगठन के भीतर जारी अंदरूनी कलह और असंतोष थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ की नई जिला कार्यकारिणी की घोषणा होने के तुरंत बाद, डोंगरगढ़ मंडल के सह संयोजक और आईटी सेल से जुड़े पंकज अग्रवाल ने अपनी सभी संगठनात्मक जिम्मेदारियों से इस्तीफा दे दिया है। यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब डोंगरगढ़ भाजपा पहले से ही 111 कार्यकर्ताओं के सामूहिक इस्तीफे और 26 अन्य नेताओं के पार्टी छोड़ने जैसी घटनाओं के कारण भारी संगठनात्मक संकट से जूझ रही है। पंकज अग्रवाल ने जिला अध्यक्ष को भेजे अपने त्यागपत्र में व्यक्तिगत और व्यावसायिक कारणों का हवाला देते हुए संगठन को पर्याप्त समय न दे पाने की बात कही है। हालांकि उन्होंने अपने पत्र में किसी भी पदाधिकारी पर सीधा आरोप लगाने से परहेज किया है और पार्टी नेतृत्व के प्रति पूरा सम्मान बनाए रखने की बात लिखी है, लेकिन लगातार सामने आ रहे इन इस्तीफों ने स्थानीय संगठन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि समय रहते प्रदेश नेतृत्व ने इस आंतरिक असंतोष को शांत नहीं किया, तो आगामी स्थानीय चुनावों में पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। फिलहाल, डोंगरगढ़ भाजपा के इस अंदरूनी संकट को सुलझाने के लिए वरिष्ठ नेताओं द्वारा डैमेज कंट्रोल की कोशिशें तेज कर दी गई हैं।
फेसबुक पर सेना के खिलाफ पोस्ट मामले में सीआईएसएफ कांस्टेबल की याचिका खारिज
Crime Update: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भारतीय सेना और पैरामिलिट्री फोर्स के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट करने वाले एक सीआईएसएफ कांस्टेबल की विभागीय सजा को पूरी तरह उचित ठहराया है। अदालत ने कांस्टेबल की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उसने एक साल के लिए वेतन वृद्धि (स्टेज) रोके जाने के अनुशासनात्मक आदेश को चुनौती दी थी। मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता कांस्टेबल ने 23 और 24 जून 2020 को अपने व्यक्तिगत फेसबुक अकाउंट से पांच ऐसे पोस्ट अपलोड किए थे जो देश के सुरक्षा बलों की गरिमा के खिलाफ थे। विभाग द्वारा तय प्रक्रिया का पालन करते हुए गहन विभागीय जांच की गई, जिसमें उसे दोषी पाया गया और अनुशासनात्मक तथा अपीलीय अधिकारियों ने वेतन कटौती की सजा सुनाई। कांस्टेबल ने हाईकोर्ट में तर्क दिया था कि उसका ऐसा कोई इरादा नहीं था और विभाग उसके खिलाफ ठोस सबूत पेश करने में नाकाम रहा है, साथ ही उसे अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं मिला। हालांकि, संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता किसी भी प्रक्रियात्मक अनियमितता या प्राकृतिक न्याय के उल्लंघन को साबित करने में पूरी तरह असफल रहा है। अदालत ने कड़े शब्दों में टिप्पणी की कि देश की रक्षा करने वाले सुरक्षा बलों के खिलाफ इस तरह का कदाचार किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है, और निचली अदालत तथा विभागीय आदेश को सही मानते हुए याचिका को खारिज कर दिया।
खेल मंत्री अरुण साव ने की नई हॉकी लीग और खेल अकादमियों की घोषणा
Sports: छत्तीसगढ़ में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने और स्थानीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर पर तराशने के लिए राज्य सरकार लगातार बड़े कदम उठा रही है। हाल ही में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान खेल मंत्री अरुण साव ने प्रदेश में खेल बुनियादी ढांचे के विकास का एक व्यापक खाका पेश किया, जिसमें जल्द ही एक भव्य हॉकी लीग के आयोजन की बड़ी घोषणा भी शामिल है। मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार का मुख्य लक्ष्य छत्तीसगढ़ को तीरंदाजी के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाना है, जिसके तहत नवा रायपुर अटल नगर के सेक्टर-3 में 67 करोड़ रुपए की लागत से एक अत्याधुनिक नेशनल आर्चरी एकेडमी की स्थापना की जा रही है। इसके साथ ही जशपुर जिले में भी 18 करोड़ रुपए की लागत से आर्चरी अकादमी का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। खेल मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि नवा रायपुर के सेक्टर-28 में मल्टी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के निर्माण के लिए पहले चरण में 114.05 करोड़ और दूसरे चरण में 94.69 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है। बस्तर और सरगुजा ओलंपिक के सफल आयोजन का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि इन प्रतियोगिताओं से लाखों युवाओं ने पंजीकरण कराया है और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को यूथ आइकन के रूप में चुना गया है। इसके अलावा, छत्तीसगढ़ को इस वर्ष ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026’ के पहले संस्करण की मेजबानी का गौरव प्राप्त हुआ है, जिसमें राज्य के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 19 पदक अपने नाम किए। खेलों को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में 100 करोड़ रुपए के प्रावधान के साथ ‘मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन’ की शुरुआत की गई है, जिससे राज्य के युवाओं का भविष्य और अधिक उज्जवल होगा।
एक करोड़ का लोन दिलाने का झांसा देकर ठगी करने वाला आरोपी इंदौर से गिरफ्तार
Crime Update: जांजगीर-चांपा जिले के चांपा थाना क्षेत्र में यूको बैंक से एक करोड़ रुपए का आसान लोन दिलाने का झांसा देकर बेरोजगारों और कारोबारियों से लाखों रुपए की ठगी करने वाले एक शातिर आरोपी को पुलिस ने मध्य प्रदेश के इंदौर से धर दबोचा है। आरोपी लंबे समय से फर्जी दस्तावेजों, बैंक के नकली मोनोग्राम और फर्जी हस्ताक्षरों का उपयोग कर भोले-بالे लोगों को अपने जाल में फंसा रहा था। पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय के मार्गदर्शन और एसडीओपी लौकेश बंसल के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने साइबर तकनीकी की मदद से इस सनसनीखेज मामले का खुलासा किया है। पीड़ित आशुतोष अग्रवाल ने 16 जून 2025 को थाना चांपा में शिकायत दर्ज कराई थी कि वर्ष 2022 में अखबार में छपे एक विज्ञापन के जरिए उसकी मुलाकात कुलदीप वशिष्ठ से हुई थी, जिसने खुद को बैंकिंग सेक्टर से जुड़ा बताकर एक करोड़ का लोन पास कराने का भरोसा दिया था। आरोपी ने फिक्स डिपॉजिट और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर पीड़ित से नकद, फोन-पे, आरटीजीएस और विभिन्न किश्तों के माध्यम से कुल 10,87,285 रुपए ऐंठ लिए और बाद में गायब हो गया। पुलिस ने अपराध क्रमांक 259/25 दर्ज कर तकनीकी छानबीन की और आरोपी कुलदीप वशिष्ठ (41 वर्ष) को इंदौर के लसूड़िया थाना क्षेत्र के महालक्ष्मी नगर से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में जुर्म कबूल करने के बाद आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर चांपा लाकर माननीय न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
रायपुर में 45 करोड़ के जाली नोटों की डील में कारोबारी से 1.13 करोड़ की ठगी
Crime Update: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के तेलीबांधा थाना क्षेत्र में नकली नोटों का लालच देकर एक स्थानीय कारोबारी के साथ एक करोड़ तेरह लाख रुपए की भारी-भरकम ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है। शातिर बदमाशों ने कारोबारी को महज 1.13 करोड़ रुपए के बदले 45 करोड़ रुपए के जाली नोट बाजार में खपाने का लालच दिया था, जिसके झांसे में आकर कारोबारी ने अपनी गाढ़ी कमाई गंवा दी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पीड़ित उमेश गुप्ता सोशल मीडिया पर एक वीडियो देखने के बाद इन आरोपियों के संपर्क में आया था, जिन्होंने खुद को एक बड़े अंतरराष्ट्रीय जाली नोट नेटवर्क से जुड़ा हुआ बताया था। सौदा पक्का करने के लिए रायपुर और महाराष्ट्र के विभिन्न आलीशान होटलों में कई दौर की गुप्त बैठकें आयोजित की गईं, जहां आरोपियों ने पीड़ित का भरोसा जीतने के लिए हर संभव नाटक किया। आरोपियों ने किश्तों में रायपुर और महाराष्ट्र के अलग-अलग ठिकानों पर कुल 1.13 करोड़ रुपए नकद और ऑनलाइन माध्यम से अपने कब्जे में ले लिए। इसके बाद वे नकली नोटों की खेप डिलीवरी करने के बहाने लगातार टालमटोल करते रहे और अंत में संपर्क तोड़ लिया। जब पीड़ित को अपने साथ हुई बड़ी धोखाधड़ी का अहसास हुआ, तब उसने तेलीबांधा थाने पहुंचकर मामले की औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। रायपुर पुलिस अब इस दोतरफा मामले की गंभीरता से जांच कर रही है, जिसमें एक तरफ 1.13 करोड़ की ठगी की पड़ताल की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ जाली नोटों के इस बड़े नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्ध चेहरों की तलाश के लिए होटलों के सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल खंगाले जा रहे हैं।
बस्तर में आई फ्लू का प्रकोप तेज, एक महीने में 600 से अधिक मरीज संक्रमित
Weather Alert: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में मानसून की दस्तक के साथ ही आंखों के वायरल संक्रमण यानी आई फ्लू (कंजंक्टिवाइटिस) के मामलों में बेतहाशा बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले महज एक महीने के भीतर जिले में 600 से अधिक लोग इस संक्रामक बीमारी की चपेट में आ चुके हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है। महारानी जिला अस्पताल और स्थानीय मेडिकल कॉलेज में रोजाना आंखों में जलन, सूजन और पानी आने की शिकायत लेकर बड़ी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं। मौसम में लगातार बनी नमी, उमस और धूल के कारण यह वायरल इन्फेक्शन तेजी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल रहा है। जिला स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, हालांकि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है, लेकिन यदि आम जनता ने थोड़ी भी सावधानी नहीं बरती तो यह संक्रमण और विकराल रूप ले सकता है। विभाग ने सभी ब्लॉक मेडिकल अधिकारियों (बीएमओ) और नेत्र विशेषज्ञों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे मरीजों की उचित काउंसलिंग करें और समय पर सही उपचार उपलब्ध कराएं। स्वास्थ्य विभाग ने एक आधिकारिक एडवाइजरी जारी कर आम नागरिकों से अपील की है कि आंखें लाल होने या खुजली होने पर किसी भी प्रकार के घरेलू नुस्खों का उपयोग करने से बचें और तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। डॉक्टरों का कहना है कि कंजंक्टिवाइटिस आमतौर पर 7 से 15 दिनों में ठीक हो जाता है, बशर्ते मरीज साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखे और समय पर चिकित्सकीय परामर्श ले।
छत्तीसगढ़ में यूसीसी लागू करने की सुगबुगाहट तेज, समिति ने मांगे सुझाव
Government: छत्तीसगढ़ सरकार राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है, और इसी क्रम में गठित उच्च स्तरीय विशेष समिति ने आम नागरिकों तथा विभिन्न संगठनों से आधिकारिक तौर पर सुझाव और अभिमत आमंत्रित किए हैं। धर्म आधारित व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी दायरा स्थापित करने के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक 5-सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। यह समिति प्रदेश में यूसीसी की आवश्यकता, उसकी रूपरेखा और मौजूदा पारिवारिक कानूनों की व्यापक समीक्षा करने में जुटी हुई है। राज्य सरकार ने शासकीय, गैर-शासकीय संगठनों, सामाजिक समूहों, धार्मिक संस्थाओं, विभिन्न समुदायों और राजनीतिक दलों से आग्रह किया है कि वे अपने महत्वपूर्ण विचार और लिखित अभ्यावेदन आगामी 15 अक्टूबर 2026 तक अनिवार्य रूप से जमा कराएं। नागरिकों की सुविधा के लिए सरकार ने आधिकारिक ई-मेल आईडी (ucc-chhattisgarh@cg.gov.in), समर्पित वेब पोर्टल (https://ucc.cgstate.gov.in/) और रायपुर स्थित न्यू सर्किट हाउस स्थित समिति के कार्यालय का डाक पता जारी किया है। उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड के बाद देश के चुनिंदा राज्यों में शामिल होने की इस प्रक्रिया के तहत छत्तीसगढ़ में भी जल्द ही समान नागरिक संहिता के क्रियान्वयन को लेकर कानूनी ढांचा तैयार किया जा रहा है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
सामान्य प्रशासन विभाग का कड़ा आदेश, हर तीन साल में अनिवार्य रूप से बदलेगी कुर्सी
Government: छत्तीसगढ़ सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए एक बेहद कड़ा और प्रभावी आदेश जारी किया है। नए परिपत्र के अनुसार, अब राज्य के सभी विभागों, विभागाध्यक्ष कार्यालयों, संभाग आयुक्त कार्यालयों, कलेक्ट्रेट और अधीनस्थ कार्यालयों में कार्यरत सभी अधिकारियों और कर्मचारियों का कार्य-पटल (डेस्क) हर तीन साल में बदलना पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है। लंबे समय से एक ही कुर्सी या संवेदनशील शाखा पर जमे रहने वाले कर्मचारियों की कार्यसंस्कृति को तोड़ने के लिए यह निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। प्रशासनिक गलियारों में अक्सर यह शिकायतें मिलती थीं कि वर्षों तक एक ही स्थान पर टिके रहने वाले कर्मचारी प्रभावशाली नेटवर्क बना लेते हैं जिससे शासकीय कार्यों में पारदर्शिता प्रभावित होती है। सरकार के इस नए कदम से न केवल जवाबदेही तय होगी बल्कि नए अधिकारियों को भी विभिन्न शाखाओं में काम करने का बहुमूल्य अनुभव प्राप्त होगा। हालांकि, परिपत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी विशेष प्रशासनिक अनिवार्यता के कारण किसी कर्मचारी को उसी पद पर रखना बेहद जरूरी हो, तो इसके लिए केवल मौखिक आदेश नहीं बल्कि सक्षम प्राधिकारी का लिखित और कारणयुक्त अनुमोदन लेना अनिवार्य होगा। सभी कार्यालय प्रमुखों को इस आदेश का समयबद्ध पालन सुनिश्चित करने और इससे जुड़े सभी दस्तावेजों का सुरक्षित संधारण करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि प्रशासनिक व्यवस्था को पूरी तरह जवाबदेह बनाया जा सके।
आईआईटी भिलाई के वैज्ञानिकों ने नीलगिरी की पत्तियों से प्लास्टिक कचरे को उपयोगी बनाने की तकनीक खोजी
Education News: छत्तीसगढ़ स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT भिलाई) के वैज्ञानिकों ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी उपलब्धि हासिल करते हुए प्लास्टिक कचरे से निपटने का नायाब तरीका ढूंढ निकाला है। संस्थान के रसायन विज्ञान विभाग के शोधकर्ताओं ने नीलगिरी की पत्तियों का उपयोग करके एक विशेष ‘ग्रीन कैटेलिस्ट’ (हरित उत्प्रेरक) तैयार किया है, जिसकी मदद से बेकार और पर्यावरण के लिए नासूर बन चुकी PET प्लास्टिक की बोतलों को उपयोगी इंजीनियरिंग सामग्री में बदला जा सकता है। इस महत्वपूर्ण शोध का नेतृत्व डॉ. संजीब बनर्जी ने किया, जिसमें शोधार्थी प्रियंक सिन्हा, भरतभूषण मेश्राम और ओंकारनाथ वर्मा ने भी अपनी अहम भूमिका निभाई है। इस अनूठी खोज से जुड़े शोध निष्कर्ष प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल ‘Materials Today Catalysis’ में भी प्रकाशित हो चुके हैं, और संस्थान ने इसके लिए भारतीय पेटेंट हेतु आवेदन भी कर दिया है। वैज्ञानिकों द्वारा विकसित इस ग्रीन कैटेलिस्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे चुंबक की सहायता से आसानी से अलग किया जा सकता है और बार-बार पुनः उपयोग में लाया जा सकता है, जिससे पूरी प्रक्रिया की लागत काफी कम हो जाती है। इस तकनीक से तैयार की जाने वाली नई इंजीनियरिंग सामग्री को गर्म करके आसानी से किसी भी आकार में ढाला जा सकता है और ठंडा होने के बाद यह बेहद मजबूत बनी रहती है। इसका उपयोग भविष्य में 3D प्रिंटिंग, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग प्रोटोटाइप और विभिन्न औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में बड़े पैमाने पर किया जा सकेगा। पर्यावरणविदों का मानना है कि यदि इस तकनीक का व्यावसायिक और बड़े स्तर पर उपयोग शुरू होता है, तो यह छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे देश में प्लास्टिक प्रदूषण की विकराल समस्या से निपटने में एक मील का पत्थर साबित होगी।



