
UPI Transaction Charges Update: संसद में नया टैक्स संशोधन विधेयक 2026 पास होने के बाद सोशल मीडिया और आम लोगों के बीच यूपीआई ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगने को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हर छोटे-बडे भुगतान के लिए डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल करने वाले लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या अब ऑनलाइन पैसे भेजने पर अतिरिक्त शुल्क देना होगा। इस स्थिति को स्पष्ट करते हुए पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) ने साफ किया है कि आम ग्राहकों और छोटे दुकानदारों के लिए यूपीआई पेमेंट की सुविधा पहले की तरह मुफ्त बनी रहेगी।

संसद में टैक्स संशोधन विधेयक 2026 हुआ पास
लोकसभा में वित्त मंत्री द्वारा पेश किया गया Taxation and Other Laws Amendment Bill 2026 बिना किसी हंगामे के वॉइस वोट से पारित हो गया है। इस नए कानून के माध्यम से सरकार को डिजिटल भुगतान प्रणालियों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) तय करने का कानूनी अधिकार प्राप्त हो गया है। संशोधन के बाद केंद्र सरकार परिस्थितियों के अनुसार यह फैसला ले सकेगी कि किन डिजिटल पेमेंट माध्यमों पर शुल्क लगाना है और किन्हें इससे बाहर रखना है।

आम ग्राहकों के पर्सन-टू-पर्सन ट्रांजैक्शन रहेंगे पूरी तरह फ्री
संसद में कानून पास होने के बावजूद आम यूजर्स को घबराने की आवश्यकता नहीं है। पीसीआई के अनुसार, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति (पर्सन-टू-पर्सन) के बीच होने वाले यूपीआई लेन-देन पर कोई चार्ज लागू नहीं होगा। वर्ष 2016 में शुरुआत के समय से ही ग्राहकों के लिए यह सुविधा निशुल्क रही है। भविष्य में भी आम नागरिक बिना किसी अतिरिक्त ट्रांजैक्शन चार्ज के तुरंत डिजिटल भुगतान की सेवा का लाभ उठाते रहेंगे।
छोटे कारोबारियों और किराना स्टोर्स को भी मिली बड़ी राहत
नए नियमों के तहत छोटे व्यापारियों, स्थानीय दुकानदारों और किराना स्टोर्स को भी किसी अतिरिक्त वित्तीय बोझ से सुरक्षित रखा गया है। छोटे कारोबारियों से यूपीआई से भुगतान स्वीकार करने के बदले कोई मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर वसूल नहीं किया जाएगा। डिजिटल पेमेंट व्यवस्था को हर वर्ग तक सहज रूप से पहुंचाने के उद्देश्य से छोटे मर्चेंट्स को इस दायरे से बाहर रखा गया है।

2000 रुपये से बड़े ट्रांजैक्शन पर लग सकता है एमडीआर
नए विधेयक के प्रावधानों के अनुसार, सरकार के पास 2,000 रुपये से अधिक मूल्य के कमर्शियल या बिजनेस यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 0.25 प्रतिशत से लेकर 0.4 प्रतिशत तक एमडीआर लगाने का अधिकार रहेगा। हालांकि, यह व्यवस्था केवल व्यापारिक लेन-देन पर ही लागू हो सकती है। इसका सीधा संबंध आम ग्राहकों के सामान्य दैनिक भुगतान से नहीं होगा।
आखिर क्या होता है मर्चेंट डिस्काउंट रेट और इसे कौन देता है
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह सेवा शुल्क होता है जो कोई व्यापारी या सेवा प्रदाता बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के बदले में चुकाता है। वर्तमान में क्रेडिट और डेबिट कार्ड के ट्रांजैक्शन पर यह शुल्क लागू होता है। पीसीआई ने स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में बड़े कारोबारियों पर एमडीआर लागू भी होता है, तो वह मर्चेंट और पेमेंट कंपनियों के बीच का व्यावसायिक समझौता होगा। ग्राहकों से इसका कोई सीधा शुल्क नहीं वसूला जाएगा।
यूपीआई नेटवर्क को सुरक्षित रखने में लगता है बड़ा निवेश
डिजिटल भुगतान प्रणाली को चौबीसों घंटे बिना रुकावट और सुरक्षित चलाने के लिए लगातार बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता होती है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई), एनपीसीआई, बैंकों और फिनटेक कंपनियों ने पिछले एक दशक में साइबर सुरक्षा, डेटा सुरक्षा और फ्रॉड कंट्रोल तकनीकों में भारी पूंजी निवेश किया है। इस पूरे डिजिटल नेटवर्क को लंबे समय तक सुचारू रूप से बनाए रखने के लिए ही वित्तीय मॉडल पर विचार किया जा रहा है।

वर्तमान में इन खर्चों का वहन कौन कर रहा है
वर्तमान व्यवस्था में यूपीआई संचालन, तकनीकी रखरखाव, कस्टमर सपोर्ट और साइबर सुरक्षा का पूरा खर्च बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर कंपनियां खुद उठा रही हैं। इस निवेश का मुख्य उद्देश्य ग्राहकों को सुरक्षित और आसान पेमेंट अनुभव प्रदान करना है। इसी वजह से आम उपभोक्ताओं पर किसी भी प्रकार का सेवा शुल्क लागू नहीं किया गया है।
डेटा सेंटर और क्लाउड सेवाओं के नियमों में भी हुआ सुधार
संसद में पारित हुए इस नए संशोधन विधेयक में केवल भुगतान संबंधी नियम ही शामिल नहीं हैं, बल्कि देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए डेटा सेंटर और क्लाउड सेवाओं में निवेश से जुड़े प्रावधानों को भी सरल बनाया गया है। सरकार का मानना है कि इन बदलावों से डिजिटल इकोसिस्टम टिकाऊ बनेगा और तकनीक के क्षेत्र में नए निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा।



