
CG Labour Migration Data: छत्तीसगढ़ की नई उद्योग नीति में स्थानीय अकुशल श्रमिकों को 100 प्रतिशत प्राथमिकता देने का नियम बनाया गया है, लेकिन धरातल पर स्थितियां इसके उलट नजर आ रही हैं। हाल ही में जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में हुए आतंकी हमले में राज्य के दो मजदूरों की जान जाने के बाद पलायन का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। सरकारी आंकड़ों की पड़ताल से पता चलता है कि प्रदेश के हजारों ग्रामीण हर साल बेहतर मजदूरी और रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर रुख कर रहे हैं।
सात महीने में 58 हजार से अधिक श्रमिकों का पंजीयन
श्रम विभाग की प्रवासी श्रमिक पंजीयन रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 में जनवरी से जुलाई के बीच केवल सात महीनों में 58 हजार से अधिक श्रमिकों ने प्रवासी श्रेणी में अपना पंजीकरण कराया है। ये मजदूर मुख्य रूप से महाराष्ट्र, तेलंगाना, गुजरात, असम, पश्चिम बंगाल और जम्मू-कश्मीर समेत नौ राज्यों में ईंट-भट्ठों, निर्माण कार्यों, फैक्ट्रियों और कृषि क्षेत्रों में मजदूरी करने जा रहे हैं।
कुलगाम आतंकी हमले के बाद सामने आई पलायन की मजबूरी
जम्मू-कश्मीर के कुलगाम इलाके में आतंकियों ने छत्तीसगढ़ के दो मजदूरों की पहचान पूछने के बाद गोली मारकर हत्या कर दी। मृतकों में सक्ती जिले के बुंदेली निवासी 24 वर्षीय दीपक रात्रे और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के छुईहा गांव निवासी 28 वर्षीय भूपेंद्र भैना शामिल थे। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा जोखिमों के बावजूद ग्रामीण इलाकों के युवा रोजगार के लिए दूर-दराज के राज्यों में जाने को मजबूर हैं।
इन राज्यों में सबसे ज्यादा जा रहे हैं छत्तीसगढ़ के मजदूर
छत्तीसगढ़ से पलायन करने वाले श्रमिकों की पहली पसंद पड़ोसी और औद्योगिक राज्य हैं।
- महाराष्ट्र
- तेलंगाना
- गुजरात
- असम
- पश्चिम बंगाल
- झारखंड
- जम्मू-कश्मीर
- आंध्र प्रदेश
- कर्नाटक
बिहार की तुलना में छत्तीसगढ़ से अधिक पलायन के आंकड़े
संसद में पेश आंकड़ों के अनुसार, राज्य गठन के बाद से छत्तीसगढ़ से देश के अलग-अलग हिस्सों में 10 लाख 21 हजार से अधिक लोगों का पलायन दर्ज किया गया है। वहीं इसी अवधि में बिहार से लगभग 7 लाख 6 हजार श्रमिकों ने पलायन किया। हालांकि, इस मामले में सबसे ऊपर आंध्र प्रदेश है, जहां से 37.37 लाख से अधिक श्रमिकों का माइग्रेशन हुआ था।
स्थानीय स्तर पर काम की कमी और अधिक मजदूरी मुख्य कारण
ग्रामीण क्षेत्रों से श्रमिकों के लगातार बाहर जाने के पीछे कई प्रमुख कारण काम कर रहे हैं:
- गैर-कृषि कार्य की कमी: गांवों में खेती के सीजन के बाद मजदूरी के अन्य विकल्प उपलब्ध नहीं हो पाते हैं।
- मौसम पर निर्भरता: खरीफ फसल की कटाई खत्म होते ही ग्रामीणों के पास स्थानीय स्तर पर आय का कोई जरिया नहीं बचता।
- मजदूरी दरों में अंतर: महाराष्ट्र, गुजरात और तेलंगाना जैसे राज्यों में स्थानीय मजदूरी की दरें छत्तीसगढ़ की तुलना में अधिक हैं।
- ठेकेदारों का नेटवर्क: गांवों में सक्रिय ठेकेदार और रिश्तेदार हर साल नए श्रमिकों को बाहर ले जाने में मदद करते हैं।
जिलों के अनुसार प्रवासी श्रमिकों के आंकड़े
श्रम विभाग द्वारा जनवरी से अगस्त 2026 के दौरान जुटाए गए आंकड़े बताते हैं कि बिलासपुर, मुंगेली और बलौदाबाजार जैसे जिलों से सबसे ज्यादा आवेदन प्राप्त हुए हैं। दस्तावेजों की कमी के कारण कई आवेदनों को निरस्त भी करना पड़ा है।
| क्रं. | जिला | प्राप्त आवेदन | स्वीकृत पंजीयन | दस्तावेजों के अभाव में निरस्त |
| 1 | रायपुर | 1,067 | 695 | 372 |
| 2 | बलौदाबाजार | 6,858 | 5,904 | 954 |
| 3 | महासमुंद | 5,583 | 4,531 | 1,052 |
| 4 | बिलासपुर | 11,682 | 10,099 | 1,583 |
| 5 | मुंगेली | 11,638 | 7,029 | 4,609 |
| 6 | सारंगढ़-बिलाईगढ़ | 6,060 | 6,058 | 02 |
| 7 | जांजगीर-चांपा | 5,746 | 2,910 | 2,836 |
| 8 | बेमेतरा | 4,172 | 1,389 | 2,783 |
| 9 | कवर्धा | 7,831 | 4,537 | 3,294 |
| 10 | खैरागढ़-छुईखदान | 3,683 | 1,381 | 2,302 |
| कुल | 33 जिले मिलाकर | 82,867 | 58,601 | 24,266 |
उद्योग मंत्री का दावा – नए उद्योगों से मिला रोजगार
पलायन के आंकड़ों पर उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने बताया कि बीते ढाई वर्षों में राज्य में 3009 छोटे और बड़े उद्योग स्थापित किए गए हैं। इन औद्योगिक इकाइयों के माध्यम से 50 हजार से अधिक स्थानीय निवासियों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। सरकार का तर्क है कि नई उद्योग नीति के कड़े नियमों के कारण अब अन्य राज्यों में जाने वाले श्रमिकों की संख्या में कमी आ रही है और स्थानीय स्तर पर ही रोजगार के अवसर बढ़ाए जा रहे हैं।



