Heatstroke Compensation Scam: छत्तीसगढ़ में लू मुआवजा घोटाले की आशंका, प्राकृतिक आपदा के तहत मिलता है 4 लाख का मुआवजा

Heatstroke Compensation Scam: छत्तीसगढ़ में सर्पदंश मुआवजा घोटाले के बाद अब लू से हुई मौतों के मुआवजा वितरण में भी बड़े फर्जीवाड़े की आशंका जताई जा रही है। विधानसभा के मानसून सत्र में राजस्व विभाग द्वारा प्रस्तुत किए गए आंकड़ों से प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार बीते पांच वर्षों में पूरे प्रदेश में लू से 93 मौतें दर्ज की गई हैं, जिनमें से अकेले बिलासपुर संभाग में 85 मामले सामने आए हैं।

अकेले बिलासपुर जिले में दर्ज हुईं सबसे ज्यादा 45 मौतें

बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने बताया कि वर्ष 2021 से 20 जून 2025 तक अकेले बिलासपुर जिले में 45 लोगों की लू से मौत दिखाकर मुआवजा राशि का वितरण किया गया। संभाग के अन्य जिलों की बात करें तो जांजगीर-चांपा में 14, कोरबा में 9, मुंगेली, सक्ती और सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 6-6 तथा रायगढ़ में 2 मौतें दर्ज की गईं। इसके विपरीत राज्य के बाकी सभी जिलों को मिलाकर केवल 5 मौतें ही दर्ज हुई हैं।

साल दर साल तेजी से बढ़ा लू से मौतों का आंकड़ा

विधानसभा में पेश आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2021 में लू से 4 मौतें दर्ज हुई थीं। इसके बाद 2022 में 13, 2023 में 29 और वर्ष 2024 में सबसे ज्यादा 45 मौतें दर्ज की गईं। वहीं वर्ष 2025 में 20 जून तक 2 मामले सामने आए। प्रदेश के अन्य संभागों की तुलना में बिलासपुर में मौतों का यह एकतरफा आंकड़ा सामने आने के बाद अब कागजी हेरफेर और घोटाले का संदेह गहरा गया है।

प्राकृतिक आपदा के तहत मिलता है 4 लाख का मुआवजा

प्राकृतिक आपदा नियमावली के तहत लू लगने से होने वाली मृत्यु को भी दैवीय आपदा की श्रेणी में रखा गया है। इसके तहत मृतक के निकटतम आश्रितों को शासन की ओर से 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि दी जाती है। कुल दर्ज 93 मामलों में से 90 परिवारों को राहत राशि बांटी जा चुकी है, जबकि 3 मामले वर्तमान में लंबित हैं। इतनी बड़ी राशि के आवंटन में फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल की बात कही जा रही है।

राजनीतिक बयानबाजी तेज, पक्ष और विपक्ष आए आमने-सामने

मुआवजा आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए भाजपा विधायक सुशांत शुक्ला ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के कार्यकाल में अधिकारियों और कर्मचारियों की साठगांठ से एक संगठित गिरोह काम कर रहा था। उन्होंने सभी स्वीकृत प्रकरणों की विस्तृत जांच की मांग की है। दूसरी ओर कांग्रेस विधायक अटल श्रीवास्तव ने पलटवार करते हुए कहा कि सबसे ज्यादा 45 मौतें वर्ष 2024 में दर्ज हुई हैं, जब राज्य में भाजपा की सरकार है। इसलिए वर्तमान सत्तापक्ष को इसकी सीधी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।

बिलासपुर में पहले भी उजागर हो चुका है सर्पदंश मुआवजा घोटाला

बिलासपुर जिले में इससे पहले सर्पदंश से हुई मौतों के नाम पर फर्जी दावे तैयार कर लाखों रुपये ऐंठने का बड़ा मामला सामने आया था। उस दौरान पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए लगभग डेढ़ दर्जन प्राथमिकी दर्ज की थीं। उस मामले में फर्जी दस्तावेज बनाने वाले डॉक्टरों, वकीलों, पुलिसकर्मियों और लिपिकों सहित दो दर्जन से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।

कड़े प्रशासनिक कदम उठाने के निर्देश, कलेक्टर ने दिए निष्पक्ष जांच के आदेश

मामला उजागर होने के बाद बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि लू मुआवजा प्रकरणों की फाइल खंगाली जाएगी। यदि किसी भी स्तर पर दस्तावेजों में हेरफेर, अनियमितता या फर्जीवाड़ा पाया जाता है, तो प्रशासन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएगा। जांच में दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों और बिचौलियों पर सख्त कानूनी और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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