बस्तर की जंगलों में बंदूक लेकर चलती थीं, खौफ खाता था इलाका, रायपुर में रैंप वॉक पर उतरीं सरेंडर महिला नक्सलियों ने जमकर बटोरी तालियां, देखें वीडियो

Former Women Naxals Ramp Walk VIDEO: छत्तीसगढ़ के बस्तर के घने जंगलों में कभी बंदूक लेकर चलने वाली पूर्व महिला नक्सलियों ने रायपुर में अपनी नई जीवन यात्रा की शुरुआत की है। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय बुनकर सम्मेलन में 9 आत्मसमर्पित महिला नक्सलियों ने स्वदेशी परिधानों में रैंप वॉक किया। हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटीं इन महिलाओं की इस प्रस्तुति ने दर्शकों का दिल जीत लिया।

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर स्वदेशी कोसा सिल्क परिधानों में सजीं महिलाएं

रायपुर में 7 अगस्त को आयोजित इस विशेष फैशन शो में सुकमा जिले की 8 और बीजापुर की 1 आत्मसमर्पित महिला नक्सली ने भाग लिया। उन्होंने स्थानीय बुनकरों द्वारा तैयार किए गए हथकरघा और कोसा सिल्क के पारंपरिक कपड़े पहनकर मंच पर कदम रखा। फेमिना मिस इंडिया छत्तीसगढ़ अनुष्का सोन के साथ जब ये महिलाएं कदम से कदम मिलाकर चलीं, तो पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा।

सुकमा की पुनेम ज्योति ने साझा किया अपना अनूठा अनुभव

सुकमा के चिंतागुफा क्षेत्र के एल्मागुंडा गांव की 22 वर्षीय पुनेम ज्योति ने अपने इस नए अनुभव के बारे में खुलकर बात की। पिछले वर्ष दिसंबर में हैदराबाद में आत्मसमर्पण करने वाली ज्योति ने हिंदी और गोंडी भाषा में बताया कि उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था कि वे कभी इतने बड़े मंच पर रैंप वॉक करेंगी। माओवादी संगठन छोड़ने के बाद उनकी जिंदगी में बहुत सकारात्मक बदलाव आए हैं।

माओवादी सांस्कृतिक विंग के पुराने अनुभव ने रैंप पर दी मदद

कार्यक्रम में शामिल 28 वर्षीय एक अन्य पूर्व महिला नक्सली ने बताया कि जंगल में रहने के दौरान उन्होंने कभी फैशन शो जैसी चीजें नहीं देखी थीं। हालांकि, संगठन के सांस्कृतिक प्रभाग (चेतना नाट्य मंडली) में रहने के कारण उन्हें दर्शकों के सामने प्रस्तुति देने का थोड़ा बहुत अनुभव था। इस पुराने अभ्यास ने उन्हें मंच पर बिना किसी झिझक के आत्मविश्वास से चलने में मदद की।

देखें वीडियो-

हिंसा छोड़ समाज की मुख्यधारा में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम

बस्तर के जंगलों में खौफ का पर्याय बनीं ये महिलाएं अब समाज में सम्मान और शांति की जिंदगी जी रही हैं। सरकार और विभिन्न सामाजिक संस्थाएं इन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न प्रकार का तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण दे रही हैं। हथकरघा उद्योग और हस्तशिल्प से जुड़े कार्यक्रमों में इनकी भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि सही दिशा मिलने पर बदलाव संभव है।

पुनर्वास और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार का प्रयास

आत्मसमर्पण करने वाली इन महिलाओं के लिए स्थायी आजीविका और स्वरोजगार की व्यवस्था करना प्रशासन के लिए एक बड़ी प्राथमिकता है। ऐसे सांस्कृतिक और व्यावसायिक आयोजनों के माध्यम से उन्हें न केवल अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है, बल्कि समाज में सामान्य नागरिक के रूप में घुलने-मिलने में भी मदद मिलती है।

हिंसा के अंत और बदलते बस्तर की नई तस्वीर पेश करता यह आयोजन

रायपुर का यह फैशन शो केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह बस्तर में आ रहे सामाजिक बदलाव का प्रतीक था। जिन हाथों में कभी घातक हथियार हुआ करते थे, उन्हीं हाथों में आज स्वदेशी बुनकरी की कला और चेहरे पर नया भविष्य बनाने की उम्मीद दिखाई दे रही है। यह पहल उन अन्य युवाओं के लिए भी एक संदेश है जो अब भी भटककर हिंसा के रास्ते पर हैं।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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