
छत्तीसगढ़ में युवा कांग्रेस के आंतरिक चुनावों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर द्वारा दिए गए एक बयान पर नया विवाद खड़ा हो गया। कांग्रेस के अंदर जारी गुटबाजी और खींचतान पर हमला बोलते हुए उन्होंने महाभारत के प्रसंग ‘यादवी संघर्ष’ का जिक्र किया था। जिसके बाद विधायक चंद्राकर ने अपने इस बयान पर देख जताया खेद।
महाभारत का प्रसंग सुनाकर कांग्रेस पर साधा था निशाना
पत्रकार वार्ता के दौरान विधायक अजय चंद्राकर ने युवा कांग्रेस चुनाव का हवाला देते हुए कहा था कि यह चुनाव नहीं बल्कि आपसी ‘यादवी संघर्ष’ चल रहा है। उन्होंने कहा कि जिस तरह महाभारत में आपस में लड़कर अंत हुआ था, ठीक उसी तरह इस आंतरिक गुटबाजी के बाद प्रदेश में कांग्रेस भी पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। उनके इस महाभारतकालीन संदर्भ को सीधे तौर पर यादव समाज से जोड़कर देखा जाने लगा।
समाज को आहत करने का नहीं था उद्देश्य
पूर्व मंत्री चंद्राकर ने सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उनका मकसद किसी भी समाज या वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुंचाना बिल्कुल नहीं था। उन्होंने विपक्षी नेताओं और राजनीतिक विरोधियों पर आरोप लगाया कि उनके दिए गए वक्तव्य के एक छोटे से हिस्से को काट-छांटकर और गलत संदर्भ में पेश कर प्रसारित किया जा रहा है।
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यादव समाज से विनम्रतापूर्वक किया खेद व्यक्त
पूर्व मंत्री एवं विधायक चंद्राकर ने पूरे मामले पर बेहद शांत और संयम भरा रुख अपनाते हुए खेद प्रकट किया। उन्होंने कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने केवल कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान को दर्शाने के लिए एक पौराणिक उदाहरण दिया था। इसके बावजूद यदि उनके शब्दों से यादव समाज के किसी भी व्यक्ति की भावनाएं आहत हुई हैं, तो वे इसके लिए बेहद विनम्रतापूर्वक खेद व्यक्त करते हैं।
क्या है ‘यादवी संघर्ष’?
‘यादवी संघर्ष’ का अर्थ- अपने ही लोगों के बीच होने वाली लड़ाई या आपसी झगड़ा। यानी, जब एक ही परिवार, समूह या संगठन के लोग आपस में भिड़ जाएं, तो उसे ‘यादवी संघर्ष’ कहा जा सकता है। यह मुहावरा या प्रसंग महाभारत की उस पौराणिक घटना से लिया गया है, जिसमें महाभारत युद्ध के कई वर्षों बाद श्री कृष्ण के यादव कुल (द्वारका) के लोग आपस में ही लड़-झगड़कर और गृहयुद्ध के कारण समाप्त हो गए थे।
पौराणिक संदर्भ में ‘यादवी संघर्ष’ से आशय महाभारत के बाद द्वारका में यादव वंश के भीतर हुए भीषण आपसी संघर्ष से है। महाभारत के मौसल पर्व में वर्णित इस घटना में यादवों के विभिन्न समूह आपसी विवाद और कलह के बाद एक-दूसरे के विरुद्ध खड़े हो गए और भारी विनाश हुआ। यह संघर्ष प्रभास क्षेत्र में हुआ माना जाता है, जिसके बाद यादव वंश की शक्ति कमजोर हुई और द्वारका के विनाश की घटनाएं सामने आईं। आज के राजनीतिक या सामाजिक संदर्भ में ‘यादवी संघर्ष’ शब्द का इस्तेमाल अक्सर किसी संगठन, दल या समूह के भीतर आपसी लड़ाई और अंतर्कलह के रूपक के तौर पर किया जाता है। हालिया छत्तीसगढ़ राजनीतिक विवाद में भी इस शब्द का इस्तेमाल इसी अर्थ में किया गया है।
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