
Kawasi Lakhma Phone Calls Jhiram Attack: छत्तीसगढ़ के चर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के करीब 13 साल बाद एनआईए (NIA) की विशेष अदालत का फैसला और उससे जुड़े दस्तावेज सामने आए हैं। अदालत के इन दस्तावेजों में दर्ज गवाहियों ने उस भयावह घटना से जुड़ी कई पुरानी परतों को एक बार फिर से उघाड़ दिया है। इसमें सबसे ज्यादा चर्चा तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल के वाहन चालक की गवाही को लेकर हो रही है। इस गवाही में पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता कवासी लखमा की मौजूदगी, उनके पास आए फोन कॉल और गोंडी भाषा में हुई बातचीत का विस्तृत विवरण दिया गया है।
काफिले में सफर के दौरान लखमा के फोन पर आए कॉल
Jhiram Ghati Case Court Decision: अदालती रिकॉर्ड के अनुसार 25 मई 2013 को कांग्रेस की ‘परिवर्तन यात्रा’ के दौरान कवासी लखमा तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल की गाड़ी में सवार थे। गवाही के मुताबिक यात्रा के दौरान कवासी लखमा के मोबाइल पर लगातार कई बार फोन आ रहे थे। नंदकुमार पटेल के ड्राइवर ने अदालत को बताया कि कवासी लखमा फोन पर लगातार गोंडी भाषा में बात कर रहे थे। इस पूरी बातचीत के दौरान एक ही तरह के शब्दों का बार-बार इस्तेमाल किया जा रहा था, जिसने गाड़ी में मौजूद लोगों का ध्यान खींचा।

नंदकुमार पटेल के पूछने पर लखमा ने दिया छोटा जवाब
Nand Kumar Patel Driver Statement NIA Court: ड्राइवर ने अपनी गवाही में आगे बताया कि जब कवासी लखमा बार-बार गोंडी में बात कर रहे थे, तब नंदकुमार पटेल ने उनसे हिंदी में बातचीत करने और कॉल का मतलब बताने को कहा था। इस पर लखमा की ओर से केवल ‘डीजल-डीजल’ कहकर बात को टाल दिया गया था। अभियोजन पक्ष के गवाह की इस बात को एनआईए कोर्ट के फैसले के ब्योरे में शामिल किया गया है। हालांकि अदालत ने इस गवाही को किसी आपराधिक साजिश का सीधा या निर्णायक सबूत स्वीकार नहीं किया है।

हमले के बाद जंगल की तरफ ले जाए गए थे नेता
Jhiram Ghati Naxal Attack NIA Verdict: झीरम घाटी में जब नक्सलियों ने बारूदी सुरंग में विस्फोट किया और अंधाधुंध गोलीबारी शुरू की, तो पूरे काफिले में भगदड़ मच गई। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार गोलीबारी के बाद माओवादी नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, ड्राइवर दशाराम सिदार और कवासी लखमा को पकड़कर घने जंगल के भीतर ले गए। जंगल में पहुंचकर नक्सलियों ने सभी की पहचान पूछी और पूछताछ शुरू की।
नंदकुमार पटेल और उनके बेटे को नक्सलियों ने बांधा
CG Politics Jhiram Attack Updates: पूछताछ के दौरान नंदकुमार पटेल ने अपनी पहचान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में दी। पहचान उजागर होने के बाद माओवादियों ने नंदकुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश पटेल के हाथ-पैर बांध दिए। अदालत के रिकॉर्ड में यह भी दर्ज है कि पहचान होने के बाद नक्सलियों ने कवासी लखमा और गाड़ी के ड्राइवर को वहां से जाने के लिए कह दिया था। इस दौरान जंगल में काफी देर तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।

नक्सली नेता विनोद और लखमा की बातचीत का जिक्र
गवाह ने अदालत में यह भी बयान दिया कि घटना स्थल के पास कवासी लखमा और माओवादी कमांडर बताए जा रहे विनोद के बीच गोंडी भाषा में कुछ बातचीत हुई थी। इस बातचीत के बाद वहां का माहौल और बदल गया। एनआईए कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक इस घटनाक्रम के करीब एक घंटे बाद माओवादियों ने नंदकुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश पटेल की गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद लखमा और ड्राइवर किसी तरह मोटरसाइकिल से दरभा थाने पहुंचे थे।
27 लोगों की हुई थी मौत और 38 हुए थे घायल
झीरम घाटी में हुए इस भीषण नक्सली हमले में कांग्रेस की शीर्ष पंक्ति की प्रादेशिक नेतृत्व क्षमता पूरी तरह खत्म हो गई थी। इस हमले में नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल और ‘बस्तर टाइगर’ के नाम से मशहूर महेंद्र कर्मा समेत कुल 27 लोगों की जान चली गई थी। इसके अलावा 38 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था।

एनआईए की विशेष अदालत ने परखे वैज्ञानिक साक्ष्य
करीब 185 पन्नों के अपने विस्तृत फैसले में विशेष एनआईए अदालत ने मामले से जुड़े हर पहलू की बारीकी से समीक्षा की। कोर्ट ने घटनास्थल से जुटाए गए फोरेंसिक साक्ष्य, बैलिस्टिक रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और दर्जनों गवाहों के बयानों का मिलान किया। फैसले में घटना स्थल से मिले कारतूसों और बारूद के अवशेषों का भी पूरा ब्योरा दिया गया है, जिससे हमले की भयावहता का पता चलता है।
गवाह के बयान और अदालत के निष्कर्ष में अंतर
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी गवाह द्वारा दिए गए बयान और अदालत द्वारा निकाले गए कानूनी निष्कर्ष में अंतर होता है। लखमा के फोन, गोंडी में बातचीत और ‘डीजल-डीजल’ वाले बयान को अदालत ने साक्ष्य के रूप में दर्ज तो किया, लेकिन बिना किसी ठोस तकनीकी और परिस्थितिजन्य सबूत के इसे किसी व्यक्ति के खिलाफ साजिश का सीधा प्रमाण नहीं माना जा सकता।

फैसले के बाद भी जारी रह सकती है कानूनी प्रक्रिया
विशेष एनआईए अदालत के इस फैसले और सार्वजनिक हुए अदालती रिकॉर्ड्स के बाद झीरम कांड को लेकर राजनीतिक और कानूनी गलियारों में एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जानकार बताते हैं कि इस फैसले के सामने आने के बाद भी पीड़ितों के परिवार और जांच एजेंसियां उच्च अदालत का दरवाजा खटखटा सकती हैं। इस वजह से झीरम घाटी हमले से जुड़ी न्यायिक प्रक्रिया आगे भी जारी रहने की पूरी संभावना है।



