छत्तीसगढ़ी लोक कलाकारों के लिए बड़ी खुशखबरी, वाद्य यंत्रों की खरीदी पर मिलेगा सरकारी अनुदान, जानिए आवेदन करने की अंतिम तारीख

CG Folk Artists Grant Scheme 2026: छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक संगीत और पारंपरिक कलाओं को सहेजने के लिए राज्य सरकार ने एक नई पहल की है। संचालनालय संस्कृति एवं राजभाषा विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रदेश के कार्यशील लोक कला दलों को वाद्य यंत्र खरीदने के लिए वित्तीय सहायता अनुदान देने का निर्णय लिया गया है। इस योजना का सीधा उद्देश्य दूर-दराज के गांवों में सक्रिय लोक कलाकारों और पारंपरिक मंडलियों को संसाधन उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपनी प्रस्तुतियों को और अधिक प्रभावी बना सकें।

‘दुर्लभ संगीत शैलियों एवं वाद्य’ योजना के तहत मिलेगी मदद

Culture Department Chhattisgarh Grant Scheme: संस्कृति विभाग द्वारा ‘संगीत की दुर्लभ शैलियों व वाद्यों के लिए संचालित योजना’ के तहत यह आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। छत्तीसगढ़ में कई ऐसी लोक संगीत शैलियां और पारंपरिक वाद्य यंत्र हैं जो धीरे-धीरे विलुप्त होने की कगार पर हैं। इस योजना के माध्यम से सरकार उन दुर्लभ वाद्य यंत्रों के संरक्षण पर जोर दे रही है। इसके साथ ही नए कलाकारों को पारंपरिक धुनों से जोड़ने और लोक संस्कृति को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

28 सितंबर 2026 तक जमा कर सकते हैं आवेदन फॉर्म

CG Lok Kala Dal Musical Instruments Grant: प्रदेश के सभी पात्र और पंजीकृत लोक कला दल इस योजना के तहत आवेदन कर सकते हैं। इच्छुक टीमों को निर्धारित प्रारूप में अपने दल की पूरी जानकारी और आवश्यक दस्तावेजों को संलग्न करना होगा। भरे हुए आवेदन पत्रों को अपने नजदीकी जनपद पंचायत या नगरीय निकाय कार्यालय (नगर पालिका/नगर निगम) में जमा करना अनिवार्य है। आवेदन स्वीकार करने की अंतिम तिथि 28 सितंबर 2026 तय की गई है, इसलिए कलाकारों को समय रहते प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

जिला स्तर के प्रशासनिक अधिकारियों को दिए गए निर्देश

CG Culture Department Application September 28: योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए संचालनालय संस्कृति एवं राजभाषा ने सभी जिला कलेक्टरों को जरूरी दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके परिपालन में जिला स्तर पर सभी जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों (CEO) और नगरीय निकायों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों (CMO) को परिपत्र भेजा गया है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्र में काम कर रहे लोक कला दलों तक योजना की जानकारी पहुंचाएं और पारदर्शी तरीके से आवेदन प्राप्त करें।

लोक कलाकारों के लिए संसाधन जुटाना होगा आसान

CG Folk Art Preservation Scheme: किसी भी लोक कला दल के लिए ढोलक, मांदर, मोहरी, दफड़ा, तंबूरा और गुदुम जैसे वाद्य यंत्र केवल बजाने के सामान नहीं होते, बल्कि यह उनकी कलात्मक पहचान का अभिन्न हिस्सा हैं। लंबे समय से इस्तेमाल के कारण ये वाद्य खराब हो जाते हैं और नए वाद्य यंत्रों को खरीदना गरीब कलाकारों के लिए काफी कठिन होता है। सरकारी अनुदान मिलने से कला मंडलों को नए और गुणवत्तापूर्ण संसाधन जुटाने में सीधी मदद मिलेगी, जिससे उनकी मंचीय प्रस्तुति बेहतर होगी।

विलुप्त होती संगीत शैलियों को मिलेगा नया जीवन

छत्तीसगढ़ के लोकगीतों और नृत्यों में मांदर की थाप और मोहरी की गूंज का विशेष स्थान है। हालांकि आधुनिक वाद्य यंत्रों के बढ़ते चलन के कारण कई पारंपरिक वाद्य यंत्रों की उपलब्धता घट गई है। इस आर्थिक सहायता योजना से पुरानी और दुर्लभ धुनों को सहेजने वाले कलाकारों का उत्साह बढ़ेगा। अनुभवी गुरुओं और वरिष्ठ कलाकारों से युवा पीढ़ी तक इन वाद्यों को बजाने की कला पहुंचेगी, जिससे राज्य की सामाजिक और सांस्कृतिक जड़ें मजबूत बनी रहेंगी।

नई पीढ़ी को पारंपरिक कलाओं से जोड़ने की पहल

प्रदेश के गांवों और कस्बों में फैले लोक कलाकार आज भी हमारी प्राचीन संस्कृति के ध्वजवाहक हैं। वे विभिन्न पर्वों, उत्सवों और सांस्कृतिक आयोजनों में बिना किसी बड़े व्यावसायिक लाभ के अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। जब इन लोक कला समूहों को प्रशासनिक स्तर पर वाद्य यंत्र खरीदने की सुविधा मिलेगी, तो क्षेत्र के युवाओं में भी लोक कला के प्रति रुचि जागेगी। इससे स्थानीय स्तर पर सांस्कृतिक गतिविधियों का एक नया वातावरण तैयार होगा।

स्थानीय आयोजनों और उत्सवों को मिलेगी नई ऊर्जा

छत्तीसगढ़ी लोक कला दलों की सक्रियता से गांवों, मेलों और स्थानीय आयोजनों में अलग ही रौनक देखने को मिलती है। सुआ, कर्मा, राउत नाचा, पंथी और ददरिया जैसी लोक विधाएं केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि यह राज्य की जीवनशैली को दर्शाती हैं। वाद्य यंत्रों के लिए वित्तीय सहायता मिलने से स्थानीय दलों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और उन्हें बड़े मंचों पर अपनी प्रतिभा दिखाने का बेहतर मौका मिलेगा।

28 सितंबर के बाद प्राप्त आवेदनों पर नहीं होगा विचार

संस्कृति विभाग ने राज्य के सभी इच्छुक लोक कला दलों से अपील की है कि वे समय-सीमा का विशेष ध्यान रखें। निर्धारित 28 सितंबर 2026 की शाम तक सभी आवश्यक कागजातों के साथ अपने आवेदन संबंधित जनपद पंचायत या नगर पालिका कार्यालय में जमा करा दें। तय तारीख के बाद मिलने वाले आवेदनों को स्वीकार नहीं किया जाएगा। विभाग का मानना है कि इस योजना से प्रदेश भर के सैकड़ों लोक कलाकारों को सीधा लाभ पहुंचेगा और राज्य की सांस्कृतिक परंपराएं और जीवंत होंगी।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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