
CG Sen Samaj Protest Vyapam: छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) द्वारा 20 सितंबर 2026 को आयोजित प्रतियोगी परीक्षा का प्रश्नपत्र विवादों में घिर गया है। परीक्षा में शामिल की गई एक हिंदी लोकोक्ति में इस्तेमाल हुए शब्द को लेकर सेन समाज ने कड़ा विरोध जताया है। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि प्रश्न में प्रयुक्त संदर्भ अमर्यादित है, जिससे उनके समुदाय की सामाजिक प्रतिष्ठा और भावनाओं को ठेस पहुंची है। इस मामले को लेकर प्रदेश भर में विरोध के स्वर मुखर होने लगे हैं।

लोकोक्ति में प्रयुक्त शब्द को लेकर शुरू हुआ विवाद
CG Vyapam Exam Question Controversy: पूरे विवाद की मुख्य वजह परीक्षा के प्रश्नपत्र में पूछी गई एक पारंपरिक लोकोक्ति है। इस लोकोक्ति में जातिगत और पारंपरिक पेशे से जुड़े एक विशेष शब्द का प्रयोग किया गया था। सेन समाज के लोगों का कहना है कि इस शब्द का संदर्भ आपत्तिजनक है और यह समाज की गरिमा के अनुकूल नहीं है। परीक्षा के तुरंत बाद अभ्यर्थियों और समाज के प्रबुद्ध लोगों ने इस पर आपत्ति दर्ज कराई, जिसके बाद यह मामला तूल पकड़ने लगा।

राज्य के कई जिलों में दर्ज कराया गया विरोध
CG Vyapam Question Paper News: मामला सामने आने के बाद सेन समाज की विभिन्न शाखाओं और संगठनों ने राज्य के अलग-अलग जिलों में प्रदर्शन किया। रायपुर में समाज के प्रतिनिधि मंडल ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से समाज के लोगों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञों की भूमिका तय की जाए। इसके साथ ही जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग भी उठाई गई है।

प्रतियोगी परीक्षाओं की भाषा पर उठे गंभीर सवाल
CG Vyapam Controversial Question: सेन समाज के प्रतिनिधियों ने राज्य सरकार और व्यापम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र तैयार करते समय भाषा और संदर्भ का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। किसी भी परीक्षा के माध्यम से किसी वर्ग, जाति या पारंपरिक व्यवसाय से जुड़े लोगों को नीचा दिखाने या उनका उपहास उड़ाने जैसा आभास नहीं होना चाहिए। इस तरह की गलतियों से सामाजिक समरसता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।
विवादित प्रश्न को परीक्षा से विलोपित करने की मांग
प्रदर्शन कर रहे प्रतिनिधियों ने व्यापम से मांग की है कि संबंधित विवादित प्रश्न को परीक्षा के मूल्यांकन से तुरंत विलोपित (हटाया) किया जाए। उनका कहना है कि इस प्रश्न के अंक सभी परीक्षार्थियों में समान रूप से बांटे जाएं या उसे पूरी तरह रद्द किया जाए। इसके साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में किसी भी शासकीय परीक्षा के प्रश्नपत्र में इस प्रकार के संवेदनशील या आपत्तिजनक शब्दों का समावेश न हो।

प्रशासनिक स्तर पर जांच और कार्रवाई की मांग
ज्ञापन सौंपने के बाद सेन समाज अब प्रशासनिक स्तर पर होने वाली कार्रवाई का इंतजार कर रहा है। समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि अगर व्यापम और शासन की ओर से इस विषय पर त्वरित और संतोषजनक कदम नहीं उठाए गए, तो वे आंदोलन को और व्यापक बनाने के लिए बाध्य होंगे। वे चाहते हैं कि यह स्पष्ट किया जाए कि प्रश्नपत्र चयन प्रक्रिया के दौरान इस प्रकार के शब्दों की समीक्षा क्यों नहीं की गई थी।
व्यापम प्रबंधन के रुख पर टिकी सबकी नजरें
अब देखना होगा कि इस पूरे घटनाक्रम पर छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल का क्या रुख रहता है। आमतौर पर किसी प्रश्न पर विवाद होने की स्थिति में व्यापम विषय विशेषज्ञों की समिति बनाकर आपत्तियों का परीक्षण कराता है। इस मामले में भी उम्मीद जताई जा रही है कि व्यापम जल्द ही इस प्रश्न की समीक्षा कर कोई आधिकारिक निर्णय ले सकता है, ताकि अभ्यर्थियों और समाज के बीच पनप रहा असंतोष शांत हो सके।



