
CG Flood Disaster Compensation Rules: छत्तीसगढ़ में मूसलाधार बारिश और बाढ़ के कारण होने वाले जान-माल के नुकसान पर राज्य सरकार द्वारा प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता दी जाती है। प्राकृतिक आपदा के दौरान किसी व्यक्ति की पानी में बहने या डूबने से मृत्यु होने पर सरकार पीड़ित परिवार को 4 लाख रुपये तक की राहत राशि प्रदान करती है। इसके अलावा बाढ़ से मकान पूरी तरह या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त होने पर भी मुआवजा देने का प्रावधान है। आपदा के समय मिलने वाली इस वित्तीय मदद का मुख्य उद्देश्य पीड़ित परिवारों को तात्कालिक सहारा देना है।
4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और पात्रता के नियम
राज्य सरकार के नियमों के अनुसार प्राकृतिक आपदा से होने वाली जनहानि के मामलों में मृतक के परिजनों को 4 लाख रुपये की सहायता दी जाती है। इस राशि पर पहला हक मृतक के पति या पत्नी, बच्चों और माता-पिता का होता है। वहीं अगर बाढ़ या बारिश के कारण मकान गिर जाता है या अन्य संपत्ति को गंभीर नुकसान पहुंचता है, तो मूल्यांकन के आधार पर 2 लाख रुपये तक का मुआवजा देने की व्यवस्था है। मकान की आंशिक क्षति पर पटवारी के सर्वे के अनुसार राहत राशि तय की जाती है।
मुआवजा का दावा करने के लिए जरूरी दस्तावेज
आपदा राहत राशि का दावा करने के लिए पीड़ित परिवार को कुछ अनिवार्य दस्तावेज तैयार कर तहसील कार्यालय में जमा करने होते हैं। इन दस्तावेजों के बिना प्रकरण की स्वीकृति संभव नहीं होती:
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट: पानी में डूबने या बहने से मौत की चिकित्सकीय पुष्टि के लिए।
- मर्ग पंचनामा और एफआईआर: पुलिस द्वारा दर्ज घटना की आधिकारिक रिपोर्ट।
- मृत्यु प्रमाण पत्र: नगर निगम या संबंधित ग्राम पंचायत से जारी डेथ सर्टिफिकेट।
- वारिसान प्रमाण पत्र: पटवारी या राजस्व विभाग द्वारा जारी वंशावली या आश्रित होने का दस्तावेज।
- बैंक खाता विवरण: पीड़ित के आश्रित के बैंक पासबुक की छायाप्रति, जिससे राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर की जा सके।
किस प्रकार की घटनाएं शामिल हैं:
- सर्पदंश या बिच्छू का काटना
- पानी में डूबना
- आकाशीय बिजली (गाज) गिरना
- आग से जलना या बाढ़
- अन्य अधिसूचित प्राकृतिक और आकस्मिक आपदाएं
आवेदन की प्रक्रिया और 15 दिनों की समयसीमा
Flood House Damage Compensation CG Gov: घटना के तुरंत बाद पीड़ित परिवार या ग्रामीणों को इसकी सूचना स्थानीय पटवारी, तहसीलदार या जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को देनी होती है। आमतौर पर आपदा के 15 दिनों के भीतर आवेदन प्रक्रिया शुरू कर देनी चाहिए। सूचना मिलने पर राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर स्थिति का मुआयना करती है और पंचनामा तैयार करती है। पटवारी और तहसीलदार द्वारा केस फाइल तैयार कर जिला कलेक्टर को भेजी जाती है, जहां से प्रशासकीय स्वीकृति के बाद सहायता राशि सीधे आवेदक के खाते में भेज दी जाती है।
छत्तीसगढ़ प्राकृतिक आपदा सहायता
| सहायता का प्रकार | अधिकतम स्वीकृत राशि | आवश्यक मुख्य दस्तावेज | आवेदन का स्थान |
| जनहानि (डूबने या बहने से मौत) | 4,00,000 रुपये | पीएम रिपोर्ट, मर्ग पंचनामा, मृत्यु प्रमाण पत्र | तहसील कार्यालय / कलेक्टर शाखा |
| मकान की पूर्ण या आंशिक क्षति | 2,00,000 रुपये तक (मूल्यांकन अनुसार) | पटवारी सर्वे रिपोर्ट, मकान के नुकसान की फोटो | स्थानीय पटवारी / तहसील |
| भुगतान का माध्यम | सीधे बैंक खाते में (DBT) | पासबुक कॉपी, आधार कार्ड | बैंक खाते से लिंक |
महत्वपूर्ण लिंक Natural Calamity Relief Important Links
छत्तीसगढ़ सरकार की आपदा राहत योजनाओं और आरबीसी 6-4 के नियमों से जुड़ी अधिकृत जानकारी या ऑनलाइन आवेदन की स्थिति देखने के लिए आप राज्य शासन की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं:
| लिंक | जानकारी |
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| आधिकारिक विभागीय वेबसाइट | यहाँ क्लिक करें |
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