
President Murmu Chhattisgarh Visit: देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 22 अक्टूबर 2026 को छत्तीसगढ़ के एक दिवसीय दौरे पर जगदलपुर पहुंचेंगी। वे विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा के ऐतिहासिक कार्यक्रम ‘मुरिया दरबार’ में शिरकत करेंगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्वयं नई दिल्ली में राष्ट्रपति से मुलाकात कर उन्हें इस पारंपरिक आयोजन में शामिल होने के लिए निमंत्रण पत्र सौंपा था। राष्ट्रपति के आगमन को लेकर बस्तर संभाग और स्थानीय प्रशासन की ओर से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
मां दंतेश्वरी को समर्पित बस्तर दशहरा की अनूठी पहचान
Bastariya Dussehra Special: मां दंतेश्वरी को समर्पित बस्तर दशहरा अपनी अनूठी जनजातीय परंपराओं, जन आस्था और सामुदायिक सहभागिता के लिए दुनिया भर में पहचाना जाता है। यह पर्व 75 दिनों तक चलने वाला सबसे लंबा लोक उत्सव माना जाता है। इस आयोजन में किसी राजा की पूजा के बजाय लोक शक्तियों और ग्राम देवी-देवताओं का सम्मान किया जाता है। ऐसे में मुरिया दरबार में देश की प्रथम नागरिक की मौजूदगी बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए एक ऐतिहासिक क्षण साबित होगी।
राष्ट्रपति मुर्मु पहले भी कर चुकी हैं बस्तर की तारीफ
Droupadi Murmu Jagdalpur Tour: इससे पहले फरवरी 2026 में जगदलपुर में आयोजित बस्तर पंडुम कार्यक्रम के दौरान भी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु बस्तर आ चुकी हैं। उस दौरान उन्होंने बस्तर दशहरा की प्राचीन परंपराओं की सराहना करते हुए इसे जनजातीय समाज के आपसी भाईचारे और लोक आस्था की अद्भुत मिसाल बताया था। अपने संबोधन में उन्होंने बस्तर की कला और संस्कृति को सहेजते हुए आधुनिक विकास की ओर आगे बढ़ने की बात कही थी।
सामाजिक संवाद और न्याय प्रणाली का प्रतीक है मुरिया दरबार
Muriya Darbar Bastar: बस्तर दशहरा के अंतिम पड़ाव में आयोजित होने वाला मुरिया दरबार क्षेत्र की पारंपरिक लोकतांत्रिक और सामाजिक व्यवस्था का जीवंत उदाहरण है। ऐतिहासिक रूप से इस दरबार में बस्तर के राजा, प्रशासनिक अधिकारी और स्थानीय ग्रामीण आमने-सामने बैठकर क्षेत्र की समस्याओं, विकास कार्यों और प्रशासनिक मामलों पर सीधा संवाद करते थे। आज भी यह परंपरा कायम है, जहां जनप्रतिनिधि और सामाजिक प्रमुख एक साथ बैठकर क्षेत्र के विकास पर चर्चा करते हैं।
मांझी-चालकी परंपरा को मिलेगी देश भर में नई पहचान
Chhattisgarh Tribal Heritage: बस्तर के सामाजिक और सांस्कृतिक ताने-बाने को बनाए रखने में मांझी और चालकी जैसे पारंपरिक पदों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ये प्रतिनिधि ग्रामीण इलाकों में सामाजिक समन्वय और व्यवस्था बनाए रखने का काम करते हैं। मुरिया दरबार के मंच से इन पारंपरिक प्रमुखों की बात सुनी जाती है। राष्ट्रपति की इस आयोजन में संभावित मौजूदगी से बस्तर की मांझी-चालकी व्यवस्था को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान और सम्मान मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू, सुरक्षा के कड़े इंतजाम
राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए जगदलपुर में सुरक्षा और व्यवस्थागत तैयारियां तेज कर दी गई हैं। जिला प्रशासन और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी लगातार कार्यक्रम स्थल और रूट का निरीक्षण कर रहे हैं। बस्तर के स्थानीय समुदायों और जनप्रतिनिधियों में भी राष्ट्रपति के आगमन को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है।



