धमतरी में कोटवारों का एक दिवसीय धरना, नियमितीकरण और 15 हजार रुपए मासिक मानदेय समेत उठाई 4 सूत्रीय मांगें

Dhamtari Kotwar Sangh Strike News: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में अपनी वर्षों से लंबित मांगों की उपेक्षा से असंतुष्ट कोटवारों ने एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अपनी चार सूत्रीय प्रमुख मांगों को लेकर छत्तीसगढ़ कोटवार संघ के बैनर तले जिलेभर के सैकड़ों कोटवारों ने गांधी मैदान में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। संघ के प्रतिनिधियों का कहना है कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी शासकीय और सामाजिक सेवा देने के बावजूद उन्हें मूलभूत सुविधाओं और सम्मानजनक वेतन से वंचित रखा गया है, जिसके कारण वे आंदोलन करने को विवश हुए हैं।

आजादी के पूर्व से सेवाएं देने के बाद भी शासकीय कर्मचारी के दर्जे से महरूम

Dhamtari News: धरना प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कोटवार संघ के जिलाध्यक्ष सुरेश दास मानिकपुरी और संरक्षक राजेंद्र देवदास ने कहा कि कोटवार का पद आजादी के पूर्व से ही ग्रामीण प्रशासनिक व्यवस्था का मुख्य आधार रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में सूचना देने से लेकर सरकारी योजनाओं को धरातल पर लागू कराने तक कोटवारों की अहम भूमिका रहती है। इसके बावजूद उन्हें आज तक शासकीय कर्मचारी का दर्जा नहीं मिल सका है, जिससे वे नाममात्र के पारिश्रमिक पर जीवन यापन करने को मजबूर हैं।

कोटवारों को नियमित कर राजस्व विभाग में संविलियन करने की मांग

CG Kotwar Recruitment Order Rules: कोटवारों की पहली और सबसे प्रमुख मांग शासकीय कर्मचारी के रूप में नियमितीकरण की है। संघ का कहना है कि जीवनभर निष्ठापूर्वक सेवा देने के बाद भी कोटवारों को बीमा, पेंशन या ग्रेच्युटी जैसी किसी सामाजिक सुरक्षा योजना का लाभ नहीं मिलता है। बढ़ती उम्र में कोटवारों को आर्थिक संकट से बचाने के लिए उन्हें नियमित कर्मचारी घोषित करते हुए राजस्व विभाग में सीधे संविलियन किया जाना चाहिए।

मानदेय की चार श्रेणियों को समाप्त कर 15 हजार रुपए मासिक वेतन तय करने की मांग

Urban Area Kotwar Post Exemption CG: संघ ने वर्तमान पारिश्रमिक व्यवस्था में मौजूद विसंगतियों पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है। वर्तमान में कोटवारों को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर मानदेय दिया जाता है, जिसे कोटवारों ने अव्यहारिक और असमान बताया है। उनकी मांग है कि सभी कोटवारों से एक समान कार्य लिया जाता है, इसलिए यह श्रेणी व्यवस्था समाप्त की जाए और सभी को कम से कम पंद्रह हजार रुपए प्रतिमाह का सम्मानजनक वेतन दिया जाए।

कोटवारों की नियुक्ति में वंशानुगत और पारंपरिक व्यवस्था बहाल करने का आग्रह

कोटवार संघ ने अनुकंपा और रिक्त पदों पर होने वाली नई नियुक्तियों में आ रही जटिलताओं पर भी चिंता जताई है। संघ के अनुसार, आजादी के समय से ही कोटवार के सेवानिवृत्त या दिवंगत होने पर उनके परिवार के योग्य सदस्य को ही प्राथमिकता दी जाती रही है। वर्तमान में इस प्रक्रिया को जटिल बना दिया गया है, जिससे मनमानी और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है। संघ ने स्पष्ट आदेश जारी कर पारंपरिक व्यवस्था को पुन: लागू करने की मांग की है।

नगरीय निकाय क्षेत्रों में नई कोटवार नियुक्तियों पर लगा प्रतिबंध हटाने की मांग

कोटवारों की चौथी प्रमुख मांग शहरी सीमा विस्तार से जुड़ी हुई है। जब किसी ग्रामीण पंचायत को नगर पंचायत, नगरपालिका या नगर निगम क्षेत्र में शामिल कर लिया जाता है, तो वहां कोटवार के निधन या सेवानिवृत्ति के बाद नए पदों की भर्ती पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है। इस नीति से प्रभावित कोटवार परिवारों के सामने जीवन-यापन का संकट खड़ा हो गया है। संघ ने इस प्रतिबंध को तुरंत हटाकर प्रभावित परिवारों को राहत देने की अपील की है।

धरने में जिलेभर से शामिल हुए सैकड़ों कोटवार, मांगें पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी

धमतरी के गांधी मैदान में आयोजित इस एक दिवसीय धरने में जिले के विभिन्न तहसीलों और गांवों से आए सैकड़ों कोटवारों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में एमनदास मानिकपुरी, मोहित अग्रवाल, घनश्याम रायपुरिया, तीरथ कुमार, राजेंद्र कुमार, सुभाष नागरची, श्यामलाल गंधर्व, कोमल सिंह, भगवान सिंह और जुगल किशोर सहित कई वरिष्ठ सदस्य मौजूद रहे। संघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो प्रदेश स्तर पर व्यापक आंदोलन किया जाएगा।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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