
Gangrel Dam Water Level: छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण गंगरेल यानी पंडित रविशंकर शुक्ल बांध का जलस्तर इन दिनों लगातार नीचे गिर रहा है। कुछ समय पहले तक लबालब भरे रहने वाले इस विशाल जलाशय में अब पानी की मात्रा घटकर केवल इक्कीस टीएमसी के आसपास ही रह गई है। लगातार हो रही भारी निकासी और कैचमेंट क्षेत्र से कम पानी आने के कारण रबी सीजन में सिंचाई को लेकर अन्नदाताओं की चिंताएं बढ़ने लगी हैं।
जलस्तर में तेजी से आ रही गिरावट
Dhamtari News: महानदी पर बने गंगरेल बांध के जलस्तर में पिछले कुछ हफ्तों से लगातार कमी दर्ज की जा रही है। जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस विशाल जलाशय में अब केवल 21.957 टीएमसी जल शेष बचा है, जिसमें से वास्तविक उपयोग योग्य पानी केवल 16.886 टीएमसी ही है। यदि पानी निकासी की मौजूदा रफ्तार यूं ही बनी रही, तो आगामी दिनों में पेयजल और निस्तारी के साथ सिंचाई के लिए गंभीर संकट पैदा हो सकता है।
पानी की निकासी और आवक में भारी अंतर
ताजा आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक गंगरेल बांध से वर्तमान में प्रति सेकंड 7,044 क्यूसेक पानी बाहर छोड़ा जा रहा है, जबकि इसके मुकाबले ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से बांध में पानी की आवक मात्र 459 क्यूसेक ही हो रही है। कुछ समय पहले भादो महीने में हुई भारी बारिश के दौरान इस बांध के सभी गेट खोलने पड़े थे, लेकिन बारिश का मौसम बीतने और सिंचाई की जरूरतें बढ़ने के कारण अब बांध का भंडार तेजी से खाली हो रहा है।
अन्य तीन प्रमुख बांध बने संबल
गंगरेल में घटते जलस्तर के बीच जिले के अन्य तीन बड़े जलाशयों की स्थिति फिलहाल संतोषजनक बनी हुई है। आंकड़ों के अनुसार मुरूमसिल्ली बांध में 5.69 टीएमसी, दुधावा बांध में 9.226 टीएमसी और सोंढूर बांध में 5.923 टीएमसी पानी मौजूद है। जल प्रबंधन के पारंपरिक नियमों के तहत जरूरत पड़ने पर दुधावा और मुरूमसिल्ली से पानी निकालकर गंगरेल बांध के स्तर को नियंत्रित किया जाता है।
रबी सीजन की फसलों पर मंडराया संकट
इस वर्ष अच्छी बारिश के चलते किसानों को उम्मीद थी कि रबी सीजन में धान और अन्य फसलों के लिए पर्याप्त पानी मिल सकेगा। लेकिन गंगरेल बांध में तेजी से गिरते जलस्तर को देखकर किसान अब असमंजस में हैं। जल संसाधन विभाग भी स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए है ताकि जरूरत के समय पानी के आवंटन में किसी प्रकार की प्रशासनिक दिक्कत न आए।
विभाग के सामने जल प्रबंधन की चुनौती
गर्मी के दिनों की आवश्यकताओं और पेयजल आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को बेहद सावधानी से पानी छोड़ना पड़ रहा है। बांध से होने वाली निकासी और आवक के बीच संतुलन बनाना विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। यदि आने वाले दिनों में ऊपरी इलाकों से पानी की आवक नहीं बढ़ी, तो जल वितरण प्रणाली में और अधिक सख्ती करनी पड़ सकती है।
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