
अहिवारा विधायक के निधन पर सादगी की मिसाल; स्वागत छोड़ मंच से नीचे बैठे पूर्व मंत्री, कांग्रेस के ‘अराजक रवैये’ पर जमकर बरसे
धमतरी 31/10/2026: भारतीय जनता पार्टी द्वारा धमतरी में आयोजित ‘लोकतंत्र बचाओ पदयात्रा’ और जनसभा के दौरान कुरूद विधायक व पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर का एक अलग और दिल जीतने वाला अंदाज देखने को मिला। जब मंच पर भव्य स्वागत की तैयारी थी, तब चंद्राकर प्रोटोकॉल को दरकिनार करते हुए मंच पर जाने के बजाय सीधे आम कार्यकर्ताओं के बीच मंच से नीचे जा बैठे। कैबिनेट मंत्री टंकराम वर्मा ने मंच से हाथ जोड़कर आदरपूर्वक उन्हें ऊपर आने का आग्रह किया, लेकिन चंद्राकर ने मंच से नीचे बैठकर ही कार्यक्रम में अपनी सहभागिता निभाना उचित समझा। उनका यह सादगी भरा अंदाज पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गया।

शोक की घड़ी में सादगी: स्वागत छोड़ मंच से नीचे बैठने का फैसला
दरअसल, अहिवारा विधायक राजमहंत डोमन लाल कोरसेवाड़ा के हालिया निधन के चलते चंद्राकर पूरी तरह संवेदनशील नजर आए। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि जब पार्टी का एक वरिष्ठ साथी हमें छोड़कर चला गया हो, तब माल्यार्पण और ढोल-धमाके की औपचारिकताएं शोभा नहीं देतीं। औपचारिकता और दिखावे से दूर रहते हुए वे मंच से नीचे कार्यकर्ताओं के बीच रहे और उनका उत्साह बढ़ाया। उनके इस सहज और भावनात्मक कदम ने न सिर्फ कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया, बल्कि जनता के बीच भी उनकी सादगी का संदेश गया।

बिलाईमाता मंदिर से शांति वाटिका तक कार्यकर्ताओं का रेला
इससे पहले मां विंध्यवासिनी (बिलाईमाता) के पावन दरबार में मत्था टेककर लोकतंत्र की रक्षा के लिए निकली पदयात्रा में भारी उत्साह नजर आया। हाथों में संविधान और तख्तियां थामे भाजपाइयों का हुजूम सदर बाजार, मठ मंदिर, घड़ी चौक होते हुए शांति वाटिका पहुंचा। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पांडेय, जिलाध्यक्ष प्रकाश बैस, पूर्व विधायक रंजना साहू, महापौर रामू रोहरा और जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण सार्वा सहित वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी ने पदयात्रा को जन-आंदोलन का रूप दे दिया।

‘जनता सब देख रही है’: कांग्रेस पर चंद्राकर के तीखे वार
जनसभा को मंच से संबोधित करते हुए चंद्राकर ने अपने चिरपरिचित अंदाज में विपक्षी खेमे पर सियासी वार भी किए। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं और सुप्रीम कोर्ट को घेरकर अराजकता फैलाना कांग्रेस की पुरानी आदत बन चुकी है। जनता जागरूक है और ऐसी राजनीति का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देना जानती है। धमतरी की इस रैली ने जहां एक तरफ विपक्ष को कड़ा राजनीतिक संदेश दिया, वहीं चंद्राकर के इस सहज मिजाज ने यह साबित कर दिया कि नेता की असली ताकत मंच पर नहीं, कार्यकर्ताओं के बीच होती है।




