महाकुंभ में छत्तीसगढ़ के संत अभिरामदास महाराज को जगदगुरु द्वाराचार्य का प्रतिष्ठान

रायपुर। प्रयागराज महाकुंभ में छत्तीसगढ़ के वेदांत ज्योतिषाचार्य संतश्री अभिरामदास जी महाराज को दिगंबर अखाड़े ने सम्मानित करते हुए उन्हें भावानंद पीठ गणमुक्तेश्वर के जगदगुरु द्वाराचार्य के पद पर प्रतिष्ठित किया है। इस महत्वपूर्ण सम्मान से छत्तीसगढ़ सहित अन्य प्रदेशों में उनके अनुयायी अभिभूत हैं।

अभिरामदास महाराज का योगदान

अभिरामदास महाराज छत्तीसगढ़ में ही नहीं, बल्कि बिहार समेत अन्य राज्यों में भी प्रसिद्ध कथा वाचक के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने न केवल शास्त्रों की गूढ़ बातों को लोगों तक पहुँचाया, बल्कि उनका जीवन बदलने के लिए व्यसनमुक्ति और सद्गति की दिशा में कार्य भी किया। महाराज के मार्गदर्शन में लाखों लोग अध्यात्म की ओर अग्रसर हो चुके हैं और उनकी शिक्षाओं का व्यापक प्रभाव राज्य और राज्य के बाहर भी महसूस किया जाता है।

संयम और अध्यात्म की ओर प्रेरणा

अभिरामदास महाराज अपने शिष्य परिवार को केवल धर्म की बातें नहीं सिखाते, बल्कि उन्हें नियम और संयम की ओर भी प्रेरित करते हैं। वे अपने जीवन में केवल गंगा जल का सेवन करते हैं, जिससे उनके शिष्य भी स्वच्छ और शुद्ध जीवन की ओर प्रेरित होते हैं। उनका शिष्य परिवार आज छत्तीसगढ़ के अलावा पूरे भारत में फैला हुआ है और लोग उनकी शिक्षाओं से प्रभावित होकर अध्यात्म की ओर बढ़ रहे हैं।

यह प्रतिष्ठान अभिरामदास महाराज के जीवन की कड़ी मेहनत और धर्म के प्रति समर्पण का प्रतीक है, और यह उनके अनुयायियों के लिए गर्व का क्षण है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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