
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के समोदा गांव में भाजपा नेता के खेत में पकड़ी गई अफीम की खेती का मामला अब एक बड़े प्रशासनिक विवाद में तब्दील हो गया है। इस मामले में लापरवाही के आरोप में निलंबित की गई ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी एकता साहू के समर्थन में पूरा विभाग खड़ा हो गया है। ‘छत्तीसगढ़ कृषि स्नातक शासकीय कृषि अधिकारी संघ’ ने इस निलंबन को पूरी तरह गलत और अन्यायपूर्ण बताया है। सोमवार से कृषि अधिकारियों ने मोर्चा खोलते हुए प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि निलंबन का आदेश वापस नहीं लिया गया, तो पूरे जिले में कृषि कार्य ठप कर अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी।
22 मार्च की डेडलाइन खत्म: अब मैदान और दफ्तर में काम बंद
संघ ने एकता साहू की बहाली के लिए प्रशासन को 22 मार्च तक का समय दिया था। डेडलाइन खत्म होने के बाद 23 मार्च से जिले के सभी मैदानी और कार्यालयीन कृषि अधिकारियों ने ‘काम बंद-कलम बंद’ हड़ताल का बिगुल फूंक दिया है। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि एक ईमानदार अधिकारी को बलि का बकरा बनाया जा रहा है। जब तक एकता साहू को ससम्मान बहाल नहीं किया जाता, तब तक विभाग का कोई भी कर्मचारी ड्यूटी पर नहीं लौटेगा। इससे आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों पर बुरा असर पड़ने की संभावना है।
बाउंसरों का पहरा और ऊंची फेंसिंग: निजी खेत में जाना मुमकिन नहीं
संघ के जिला अध्यक्ष अमित कुमार वर्मा ने निलंबन के आधारों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अफीम की खेती जिस प्लॉट के पास हो रही थी, वह पूरी तरह ऊंची फेंसिंग और सुरक्षा घेरे के अंदर थी। वहां गेट पर निजी बाउंसर तैनात थे, जिसके कारण बिना अनुमति अंदर जाना किसी भी कृषि विस्तार अधिकारी के लिए संभव नहीं था। संघ का तर्क है कि किसी भी निजी जमीन या सुरक्षित फार्म हाउस में बिना वारंट या अनुमति के प्रवेश करना किसी कृषि अधिकारी के आधिकारिक दायित्व या कार्यक्षेत्र का हिस्सा नहीं है।
प्रशिक्षण की कमी: अफीम की पहचान करना अधिकारी का काम नहीं
अधिकारियों का आरोप है कि विभाग ने उन्हें कभी भी मादक फसलों या अफीम की पहचान करने के संबंध में कोई विशेष प्रशिक्षण या जानकारी नहीं दी है। उनका काम केवल स्वीकृत फसलों और सरकारी योजनाओं की निगरानी करना है। ऐसे में यह उम्मीद करना कि एक कृषि विस्तार अधिकारी किसी रसूखदार के खेत में छिपी हुई अफीम की पहचान कर उसकी रिपोर्ट देगा, व्यवहारिक रूप से गलत है। संघ का कहना है कि यह जिम्मेदारी नारकोटिक्स और पुलिस विभाग की है, न कि कृषि विभाग के जमीनी कर्मचारियों की।
बीज की कमी और तकनीकी खामियां: विभाग पर भी उठे सवाल
हड़ताल पर बैठे अधिकारियों ने विभाग की आंतरिक व्यवस्था पर भी प्रहार किया है। उनका कहना है कि प्रदर्शन प्लॉट के लिए आवश्यक बीज विभाग के पास उपलब्ध ही नहीं थे। दिसंबर की बैठक में निर्देश दिए गए थे कि किसान खुद बीज खरीदकर बिल पेश करें। ऐसे में जब विभाग ने कोई सामग्री या स्पष्ट दिशा-निर्देश ही नहीं दिए, तो अधिकारी को लापरवाही का दोषी कैसे ठहराया जा सकता है? इसके अलावा, फसल प्रदर्शन के नियमों में बदलाव करने का अधिकार जिला स्तर के अधिकारियों के पास नहीं होता, फिर भी निचले स्तर के कर्मचारियों पर गाज गिराई गई।
क्या था 14 मार्च का निलंबन आदेश?
पूरा विवाद 7 मार्च को शुरू हुआ जब समोदा गांव में मक्का फसल प्रदर्शन प्लॉट का निरीक्षण किया गया। जांच में पाया गया कि जिस जमीन पर कागजों में मक्का लगा होना चाहिए था, वहां वास्तव में धान की फसल लहलहा रही थी। इसके अलावा, कृषि मैप पोर्टल पर असली किसान की जगह किसी अन्य की फोटो अपलोड मिली और मौके पर सूचना बोर्ड भी नदारद था। इन्हीं खामियों और बगल के खेत में अफीम की मौजूदगी की जानकारी न देने को ‘गंभीर लापरवाही’ मानते हुए प्रशासन ने 14 मार्च को एकता साहू को निलंबित कर दिया था।
पटवारी और सर्वेयर भी जांच के घेरे में
एकता साहू के निलंबन के साथ-साथ इस मामले में राजस्व विभाग के कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की आंच पहुंची है। प्रशासन ने हलका पटवारी अनिता साहू और फसल सर्वेयर शशिकांत साहू को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इन पर आरोप है कि इन्होंने भूमि रिकॉर्ड और फसल की स्थिति की सही जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। हालांकि, कर्मचारी संघों का मानना है कि असली दोषियों को बचाने के लिए निचले स्तर के इन कर्मचारियों पर दबाव बनाया जा रहा है और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है।
प्रशासन का रुख: जांच के बाद ही होगा कोई फैसला
दूसरी ओर, जिला प्रशासन और कृषि विभाग के आला अधिकारी अपनी कार्रवाई को सही ठहरा रहे हैं। उनका कहना है कि सरकारी रिकॉर्ड में गलत जानकारी दर्ज करना और पोर्टल पर गलत फोटो अपलोड करना एक गंभीर प्रशासनिक अपराध है। हालांकि, कर्मचारियों की हड़ताल को देखते हुए अब बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की जा रही है। अपर कलेक्टर स्तर के अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि मामले की दोबारा गहनता से जांच की जाएगी, लेकिन कर्मचारी संघ अब बिना बहाली के पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।



