छत्तीसगढ़ में RTE पर घमासान: 53 हजार से घटकर 19 हजार हुईं सीटें, पैरेंट्स एसोसिएशन ने कहा- गरीबों का हक छीन रही सरकार

छत्तीसगढ़ में शिक्षा का अधिकार कानून (RTE) के तहत निजी स्कूलों में पढ़ने का सपना देख रहे गरीब बच्चों के भविष्य पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसिएशन ने राज्य सरकार के नए नियमों को आड़े हाथों लेते हुए इसे ‘असंवैधानिक’ करार दिया है। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल का आरोप है कि सरकार जानबूझकर ऐसे बदलाव कर रही है जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों से मुफ्त शिक्षा का अधिकार छिन जाए। इस मुद्दे को लेकर रायपुर से लेकर पूरे प्रदेश में अभिभावकों के बीच नाराजगी देखी जा रही है।

सीटों में ऐतिहासिक कटौती का खुलासा

एसोसिएशन के मुताबिक, 16 दिसंबर 2025 को नियमों में जो संशोधन किए गए हैं, उनका सबसे बुरा असर सीटों की संख्या पर पड़ा है। पिछले शैक्षणिक सत्र (2025-26) में जहां प्रदेश के निजी स्कूलों में 53 हजार से अधिक बच्चों को दाखिला मिला था, वहीं नए सत्र (2026-27) के लिए यह आंकड़ा सिमटकर मात्र 19,495 रह गया है। सीटों में आई यह भारी गिरावट पिछले 13 वर्षों के इतिहास में सबसे बड़ी कमी मानी जा रही है।

प्रवेश आंकड़ों का ग्राफ: 13 साल के निचले स्तर पर

क्रिष्टोफर पॉल ने पिछले सालों के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि साल 2012 से अब तक औसतन 40 से 50 हजार बच्चों को हर साल आरटीई के तहत प्रवेश मिलता रहा है। साल 2022-23 में तो यह आंकड़ा 56 हजार के पार पहुंच गया था। लेकिन प्रस्तावित नए सत्र में सीटों की संख्या में आधे से भी ज्यादा की कटौती कर दी गई है, जिससे हजारों जरूरतमंद परिवार इस योजना के लाभ से वंचित हो जाएंगे।

RTE प्रवेश आंकड़ों की तुलनात्मक स्थिति

शैक्षणिक सत्रप्रवेशित बच्चों की संख्यास्थिति
2022-2356,679रिकॉर्ड प्रवेश
2025-2653,023सामान्य प्रवेश
2026-27 (प्रस्तावित)19,495सबसे कम (विवादित)

सरकार की मंशा पर उठाए तीखे सवाल

पैरेंट्स एसोसिएशन का कहना है कि सरकार अब निजी स्कूलों में गरीब बच्चों की फीस का बोझ उठाने से बचना चाहती है। पॉल ने आरोप लगाया कि जनवरी माह में दो बार पत्र लिखकर शासन को आगाह किया गया था, लेकिन उनकी बातों को अनसुना कर दिया गया। सरकार ने आरटीई पोर्टल पर कम सीटों के साथ ही आवेदन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। एसोसिएशन के अनुसार, यह मूल कानून की आत्मा के खिलाफ है जो निजी स्कूलों की 25 प्रतिशत सीटों को आरक्षित रखने का प्रावधान करता है।

शिक्षा सचिव को पत्र लिखकर की गई मांग

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एसोसिएशन ने स्कूल शिक्षा सचिव को एक औपचारिक मांग पत्र सौंपा है। इसमें साफ तौर पर कहा गया है कि 16 दिसंबर को किए गए सभी बदलावों को तुरंत निरस्त किया जाए। अभिभावकों की मांग है कि पुराने प्रावधानों को बहाल किया जाए ताकि अधिक से अधिक गरीब बच्चों को बेहतर स्कूलों में पढ़ने का मौका मिल सके। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने स्थायी आदेश जारी कर सीटें नहीं बढ़ाईं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

हजारों परिवारों के भविष्य पर अनिश्चितता

आरटीई पोर्टल पर सीटों की कमी दिखने के बाद से ही उन पालकों की चिंता बढ़ गई है जो अपने बच्चों के दाखिले की उम्मीद लगाए बैठे थे। जानकारों का कहना है कि इस फैसले से न केवल बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा प्रभावित होगी, बल्कि सामाजिक समानता के उस उद्देश्य को भी चोट पहुंचेगी जिसे आरटीई कानून के जरिए हासिल करने की कोशिश की गई थी। अब सबकी नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या वह इन बदलावों को वापस लेती है या नहीं।

Also Read: बड़ी खबर: अब घर बैठे मोबाइल से बनेगा आयुष्मान कार्ड, सरकार ने लॉन्च किया नया ऐप; जानिए पूरी प्रक्रिया

दक्षिण कोसल का Whatsapp Group ज्वाइन करे

Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

Related Articles

Back to top button