
छत्तीसगढ़ कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान अब दिल्ली के गलियारों तक पहुंच गई है। पार्टी आलाकमान ने प्रदेश के पांच दिग्गज नेताओं को अचानक दिल्ली तलब किया है। इनमें प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, चरणदास महंत, टीएस सिंहदेव और ताम्रध्वज साहू शामिल हैं। माना जा रहा है कि सोनिया और राहुल गांधी इन नेताओं के साथ बैठकर राज्य में संगठन की स्थिति और आपसी कलह पर सीधी चर्चा करेंगे। विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद से ही नेताओं के बीच गुटबाजी की खबरें लगातार आ रही हैं।
बागियों और दागी चेहरों को लेकर कड़ा रुख
दिल्ली से इस बुलावा के पीछे एक बड़ी वजह संगठन की नियुक्तियों में हुई गड़बड़ी बताई जा रही है। हाईकमान को शिकायत मिली है कि मंडल और ब्लॉक स्तर पर पैसा लेकर बागियों और दागी चेहरों को पदाधिकारी बनाया गया है। इन आरोपों ने पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाया है और आलाकमान इसे लेकर बेहद सख्त है। सरगुजा से लेकर रायपुर तक के स्थानीय नेताओं ने दिल्ली तक अपनी शिकायतें पहुंचाई हैं, जिसके बाद अब बड़े नेताओं की जवाबदेही तय होने वाली है।
टीएस सिंहदेव के खिलाफ भी पहुंची शिकायत
दिल्ली में होने वाली इस बैठक में केवल संगठन विस्तार ही नहीं बल्कि व्यक्तिगत शिकायतों पर भी चर्चा होगी। खबर है कि सरगुजा के जिला अध्यक्ष ने पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनकी कार्यप्रणाली और तालमेल की कमी को लेकर सीधे हाईकमान से लिखित शिकायत की गई है। नेताओं के बीच को-ऑर्डिनेशन की भारी कमी के कारण पार्टी के आगामी कार्यक्रमों और आंदोलनों पर असर पड़ रहा है, जिसे सुलझाना आलाकमान की प्राथमिकता है।
दीपक बैज ने बैठक को बताया रूटीन प्रक्रिया
इस पूरे मामले पर पीसीसी चीफ दीपक बैज का रुख संतुलित नजर आया। दिल्ली रवाना होने से पहले उन्होंने मीडिया से कहा कि यह बैठक संगठन के आगामी कामों और रणनीतियों को लेकर है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में सरकार के खिलाफ होने वाले आंदोलनों, मनरेगा और जनहित के मुद्दों पर सोनिया और राहुल गांधी से मार्गदर्शन लिया जाएगा। हालांकि, जब उनसे प्रदेश अध्यक्ष बदलने के कयासों पर सवाल किया गया, तो उन्होंने गोलमोल जवाब देते हुए भाजपा पर तंज कसा कि उनके पद पर न रहने से सबसे ज्यादा खुशी भाजपा को होगी।
उमेश पटेल का नाम रेस में सबसे आगे
छत्तीसगढ़ कांग्रेस में नए प्रदेश अध्यक्ष की सुगबुगाहट के बीच पूर्व मंत्री और युवा नेता उमेश पटेल का नाम तेजी से उभर रहा है। उमेश पटेल ओबीसी वर्ग के एक सशक्त चेहरे माने जाते हैं। वे झीरम हमले में शहीद हुए पूर्व पीसीसी चीफ नंदकुमार पटेल के बेटे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भूपेश बघेल गुट की ओर से उमेश पटेल का नाम आगे बढ़ाया जा रहा है ताकि संगठन पर पकड़ बनी रहे। उमेश पूर्व में युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं और युवाओं में उनकी अच्छी पैठ है।
उमेश पटेल का राजनीतिक सफर और ताकत
उमेश पटेल को अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चाओं के पीछे उनकी मजबूत पृष्ठभूमि है:
- राजनीतिक विरासत: शहीद नंदकुमार पटेल के बेटे होने के नाते उन्हें सहानुभूति और सम्मान मिलता है।
- अनुभव: वे पूर्व कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं और संगठन चलाने का उनके पास अनुभव है।
- ओबीसी कार्ड: राज्य की राजनीति में ओबीसी वर्ग की अहमियत को देखते हुए उनकी दावेदारी मजबूत है।
- युवा नेतृत्व: पार्टी के युवा कार्यकर्ताओं के बीच वे काफी लोकप्रिय हैं।
गुटबाजी और भविष्य की रणनीति पर मंथन
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य 2028 के विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी को एक नई ऊर्जा देना है। आलाकमान यह स्पष्ट करना चाहता है कि आपसी मतभेद पार्टी की मजबूती में आड़े नहीं आने चाहिए। दिल्ली की इस बैठक के बाद राज्य में संगठन के स्तर पर बड़े फेरबदल की संभावना है। यदि दीपक बैज की विदाई होती है, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि नए अध्यक्ष के रूप में उमेश पटेल या किसी अन्य चेहरे को जिम्मेदारी देकर पार्टी कैसे गुटबाजी को शांत करती है।



