Census Employee Leave Restriction: सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियों पर 10 जून तक लगी रोक, कलेक्टर ने जारी किया आदेश

Census Employee Leave Restriction: देश में होने वाली आगामी जनगणना 2027 की तैयारियां अब तेज हो गई हैं। इस राष्ट्रीय कार्य को बिना किसी बाधा के और तय समय के भीतर पूरा करने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। बिलासपुर कलेक्टर एवं प्रमुख जिला जनगणना अधिकारी निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर ने जनगणना कार्य से जुड़े सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के अवकाश पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। यह आदेश प्रशासनिक सुव्यवस्था बनाए रखने और डेटा संकलन की प्रक्रिया को गति देने के लिए जारी किया गया है।

राष्ट्रीय कार्य को समय पर पूरा करने की कवायद

प्रशासन का मुख्य उद्देश्य जनगणना जैसे महत्वपूर्ण काम को पूरी सटीकता के साथ समय पर संपन्न करना है। चूंकि जनगणना के आंकड़े देश की भविष्य की योजनाओं का आधार होते हैं, इसलिए इसमें किसी भी तरह की देरी या कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कलेक्टर ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि 15 अप्रैल से 10 जून 2026 तक की अवधि इस कार्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसी कारण कर्मचारियों की उपस्थिति अनिवार्य की गई है ताकि प्रशिक्षण और डेटा एंट्री का काम सुचारू रूप से चलता रहे।

प्रगणकों और मास्टर ट्रेनर्स के अवकाश पर पाबंदी

जारी किए गए आदेश की जद में जनगणना कार्य से सीधे तौर पर जुड़े सभी छोटे-बड़े कर्मचारी आएंगे। इसमें जिले के सभी मास्टर ट्रेनर्स, फील्ड ट्रेनर्स, प्रगणक और पर्यवेक्षक शामिल हैं। इन सभी की छुट्टियों पर 10 जून तक रोक लगा दी गई है। हालांकि विशेष परिस्थितियों में राहत देने का प्रावधान रखा गया है, लेकिन इसके लिए ठोस कारण का होना जरूरी है। सामान्य तौर पर किसी भी कर्मचारी को इस दौरान छुट्टी नहीं मिलेगी ताकि फील्ड वर्क प्रभावित न हो।

बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने की मनाही

छुट्टियों पर रोक के साथ ही कर्मचारियों के लिए एक और कड़ा निर्देश जारी हुआ है। अब कोई भी कर्मचारी या अधिकारी बिना पूर्व अनुमति के अपना मुख्यालय नहीं छोड़ सकेगा। विशेष स्थिति में अवकाश की जरूरत होने पर जिला स्तर के अधिकारियों को कलेक्टर से अनुमति लेनी होगी। वहीं तहसील या ब्लॉक स्तर के कर्मचारियों को संबंधित अनुविभागीय जनगणना अधिकारी से मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। बिना सूचना के कार्यक्षेत्र से गायब रहने वालों पर दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।

आरटीआई और कोर्ट के दायरे से बाहर रहेंगे आंकड़े

जनगणना के दौरान आम जनता से जो भी जानकारी जुटाई जाएगी, उसे लेकर प्रशासन ने गोपनीयता का पूरा भरोसा दिया है। अधिकारियों ने साफ किया है कि नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रहेगी। यह डेटा सूचना के अधिकार (आरटीआई) के दायरे में नहीं आएगा, जिसका मतलब है कि कोई भी तीसरा व्यक्ति किसी की निजी जानकारी नहीं निकाल पाएगा। इसके अलावा इन आंकड़ों को किसी भी अदालत में साक्ष्य के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।

मोबाइल और कंप्यूटर से खुद दर्ज करें जानकारी

आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए इस बार प्रशासन ने नागरिकों को एक विशेष सुविधा दी है। जो लोग प्रगणकों का इंतजार नहीं करना चाहते, वे ‘सेल्फ एन्यूमरेशन’ के जरिए खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज कर सकते हैं। इसके लिए मोबाइल ऐप या कंप्यूटर का सहारा लिया जा सकता है। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि आंकड़ों की प्रविष्टि में त्रुटि होने की संभावना भी कम हो जाएगी। यह विकल्प उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो तकनीकी रूप से सक्षम हैं।

33 बिंदुओं पर आधारित होगी पहले चरण की पूछताछ

जनगणना के पहले चरण में प्रगणक घर-घर जाकर कुल 33 मुख्य बिंदुओं पर जानकारी इकट्ठा करेंगे। इसमें मकान की स्थिति, परिवार को मिलने वाली बुनियादी सुविधाएं, उपलब्ध संसाधन और परिवार के सदस्यों की संख्या जैसे सवाल शामिल होंगे। इन 33 पैमानों के जरिए सरकार यह समझने की कोशिश करेगी कि समाज के किस तबके को किन संसाधनों की तत्काल आवश्यकता है। इस डेटा का उपयोग जनगणना के अगले चरणों की रूपरेखा तैयार करने में भी किया जाएगा।

विकास योजनाओं का आधार बनेगी यह रिपोर्ट

सरकार का कहना है कि जनगणना से प्राप्त जानकारी केवल संख्या मात्र नहीं है, बल्कि यह भविष्य के भारत की तस्वीर है। इसी डेटा के आधार पर नई सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों और बिजली-पानी जैसी योजनाओं का खाका खींचा जाता है। संसाधनों का सही वितरण तभी संभव है जब प्रशासन के पास सटीक आंकड़े हों। इसलिए जनगणना के इस काम को राष्ट्रीय हित में सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है ताकि विकास की मुख्यधारा से हर नागरिक को जोड़ा जा सके।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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