
Haridwar News: हरिद्वार में पुलिस ने एक ऐसी विदेशी महिला को गिरफ्तार किया है जो अपनी पहचान बदलकर अवैध रूप से भारत में रह रही थी। सलेहा बेगम नाम की यह महिला बांग्लादेश से महज 90 दिनों के वीजा पर आई थी, लेकिन समय सीमा बीत जाने के बाद भी वह वापस नहीं लौटी। उसने हरिद्वार में अपने छत्तीसगढ़िया पति के साथ मिलकर न केवल जाली दस्तावेज तैयार किए, बल्कि उन्हीं के दम पर एक लॉज का संचालन भी शुरू कर दिया था।
खुफिया सूचना पर पुलिस का बड़ा एक्शन
हरिद्वार पुलिस को स्थानीय खुफिया इकाई (LIU) से एक गुप्त सूचना मिली थी। इस जानकारी में बताया गया था कि ज्वालापुर क्षेत्र में एक संदिग्ध महिला अपनी पहचान छिपाकर रह रही है। पुलिस ने बिना देरी किए बताए गए स्थान पर छापेमारी की, जिसके बाद इस पूरे फर्जीवाड़े की परतें खुलती चली गईं। पुलिस ने मौके से सलेहा बेगम उर्फ स्वीटी और उसके पति श्यामदास को हिरासत में ले लिया।
छत्तीसगढ़ के श्यामदास और सलेहा बेगम की गिरफ्तारी
गिरफ्तार की गई महिला की उम्र 41 वर्ष है और वह मूल रूप से बांग्लादेश की रहने वाली है। उसके साथ पकड़े गए श्यामदास का संबंध छत्तीसगढ़ से है। यह जोड़ा पिछले करीब एक साल से हरिद्वार को अपना ठिकाना बनाए हुए था। पुलिस के मुताबिक, श्यामदास ने ही महिला को भारत में अवैध रूप से रुकने और जाली कागजात बनवाने में पूरी मदद की थी।
फेसबुक से शुरू हुआ था संपर्क
पुलिस की शुरुआती पूछताछ में सामने आया कि सलेहा बेगम ने बांग्लादेश में अपने पहले पति से तलाक लेने के बाद सोशल मीडिया का सहारा लिया था। फेसबुक के जरिए उसकी जान-पहचान छत्तीसगढ़ के रहने वाले श्यामदास से हुई। धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और दोस्ती गहरी हो गई। श्यामदास के कहने पर ही सलेहा ने भारत आने का मन बनाया और कानूनी तरीके से वीजा के लिए आवेदन किया।

90 दिन का वीजा और गैरकानूनी प्रवास
सलेहा बेगम साल 2023 में 90 दिनों के वैध वीजा पर भारत पहुंची थी। नियम के मुताबिक उसे तीन महीने के भीतर वापस अपने देश लौटना था, लेकिन उसने यहीं रुकने का फैसला किया। वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद उसका भारत में रहना पूरी तरह गैरकानूनी हो गया था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि महिला ने जानबूझकर नियमों का उल्लंघन किया और अपनी असलियत छिपाकर देश के भीतर प्रवास किया।
सलेहा बेगम से स्वीटी बनने की कहानी
हरिद्वार पहुंचने के बाद सलेहा बेगम ने खुद को नया नाम दिया। उसने अपनी पुरानी पहचान पूरी तरह त्याग दी और ‘स्वीटी’ के रूप में नई पहचान अपना ली। उसने आसपास के लोगों को कभी यह अहसास नहीं होने दिया कि वह पड़ोसी देश की नागरिक है। श्यामदास ने भी उसे अपनी पत्नी के रूप में समाज के सामने पेश किया ताकि किसी को भी उन पर रत्ती भर भी संदेह न हो।
फर्जी दस्तावेजों के दम पर लॉज का धंधा
यह जोड़ा केवल हरिद्वार में छिपकर नहीं रह रहा था, बल्कि उन्होंने अपना खुद का कारोबार भी शुरू कर दिया था। जाली पहचान पत्रों और फर्जी कागजातों की मदद से उन्होंने ज्वालापुर इलाके में एक लॉज ली और उसका संचालन करने लगे। पुलिस जांच में यह भी पता चला कि हरिद्वार आने से पहले यह दंपती कुछ समय तक दिल्ली में भी रुका था। करीब एक साल पहले ही उन्होंने हरिद्वार को अपने धंधे का केंद्र बनाया।
जाली आईडी और मैरिज सर्टिफिकेट बरामद
ज्वालापुर थाना पुलिस ने जब सलेहा और श्यामदास के ठिकानों की तलाशी ली, तो वहां से कई आपत्तिजनक दस्तावेज मिले। पुलिस ने उनके पास से फर्जी भारतीय पहचान पत्र और जाली विवाह प्रमाण पत्र बरामद किए हैं। इसके साथ ही सलेहा बेगम के मूल बांग्लादेशी दस्तावेज भी पुलिस के हाथ लगे हैं, जिससे उसकी असली नागरिकता और असली नाम की पुष्टि हो गई।
स्थानीय पुलिस की छापेमारी में हुआ खुलासा
पुलिस की इस छापेमारी ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। ज्वालापुर पुलिस ने बताया कि आरोपी महिला के पास से मिले कागजात देखने में बिल्कुल असली लगते थे, जिन्हें बड़ी सफाई से तैयार किया गया था। पूछताछ के दौरान श्यामदास ने स्वीकार किया कि उसने सलेहा को भारतीय नागरिक साबित करने के लिए स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों की मदद से ये जाली सर्टिफिकेट बनवाए थे।
पुलिस नेटवर्क और सहयोगियों की कर रही है जांच
फिलहाल पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ संबंधित कानूनी धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अब उस पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है जिसने इन दोनों को फर्जी दस्तावेज तैयार करने में सहयोग दिया था। पुलिस का मानना है कि इस खेल में कुछ और स्थानीय लोग भी शामिल हो सकते हैं। यह मामला सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी गंभीर माना जा रहा है और खुफिया एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं।



