VIDEO: मेरे नाम पर एक भी जमीन नहीं… कहने वाले बसंत अग्रवाल फंसे सरकारी जमीन कब्जा मामले में जमीन कारोबारी बसंत अग्रवाल के दावों की खुली पोल

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला नाम जमीन कारोबारी बसंत अग्रवाल का है। कुछ समय पहले तक बसंत अग्रवाल यह दावा कर रहे थे कि उनके नाम पर एक इंच भी जमीन नहीं है और न ही वे किसी भी तरह के कब्जे में शामिल हैं। हालांकि तहसीलदार की आधिकारिक रिपोर्ट ने इन दावों को गलत साबित कर दिया है। सरकारी दस्तावेजों में अवैध कब्जेदारों की सूची में बसंत अग्रवाल का नाम प्रमुखता से दर्ज किया गया है जिससे उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

चारागाह की जमीन पर बिछाई गई मुरूम की परत

जांच में पाया गया कि खसरा नंबर 511/5 जो कि करीब 6.390 हेक्टेयर की चारागाह भूमि है उस पर कब्जा कर लिया गया है। बसंत अग्रवाल ने इस सरकारी जमीन पर मुरूम डालकर रास्ता बना दिया जबकि पूनम चौधरी ने बाउंड्रीवाल खड़ी कर दी। मवेशियों के चरने के लिए सुरक्षित इस जमीन का उपयोग अब निजी मुनाफे और प्लाटिंग के लिए किया जा रहा है जो नियमों का सीधा उल्लंघन है।

तालाब और जल निकायों को पाटकर बनाई सड़कें

भू-माफियाओं ने राजस्व रिकॉर्ड में ‘पानी के नीचे’ दर्ज जमीनों को भी निशाना बनाया है। खसरा नंबर 630, 634, 636 और 644 जैसी जमीनों पर ओमप्रकाश सरवैया और बसंत अग्रवाल ने मिलकर मुरूम के रास्ते तैयार कर लिए हैं। जल निकायों को समतल कर वहां अवैध प्लाटिंग का ढांचा खड़ा कर दिया गया है। वर्तमान में खसरा नंबर 647/1 और 647/2 पर 60 फीट चौड़ा रास्ता बनाकर बड़े पैमाने पर जमीन बेचने का काम जारी है।

स्थानीय निवासी की शिकायत पर जागा प्रशासन

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब गिरौद के निवासी परमानंद साहू ने कलेक्टर से इसकी लिखित शिकायत की। शिकायत में बताया गया था कि राजनीतिक पहुंच रखने वाले लोग सरकारी जमीनों को खुर्द-बुर्द कर रहे हैं। कलेक्टर के निर्देश पर जब तहसीलदार और हल्का पटवारी ने ग्रामीणों के साथ मिलकर मौके का निरीक्षण किया तो शिकायत के सभी आरोप सही पाए गए। इसके बाद ही विस्तृत जांच प्रतिवेदन तैयार किया गया।

जांच रिपोर्ट में दर्ज हुए कब्जाधारियों के नाम

तहसीलदार द्वारा पेश किए गए प्रतिवेदन में तीन मुख्य नाम सामने आए हैं जिन्होंने सरकारी निस्तारी जमीन पर कब्जा किया है। इनमें जमीन कारोबारी बसंत अग्रवाल के साथ ओमप्रकाश सरवैया और पूनम चौधरी के नाम शामिल हैं। इन लोगों ने मिलकर गांव के सामूहिक उपयोग वाली भूमि का स्वरूप पूरी तरह बदल दिया है। जांच रिपोर्ट में पक्के सबूतों के साथ इन कब्जों का ब्यौरा उच्च अधिकारियों को भेज दिया गया है।

बुलडोजर कार्रवाई या केवल कागजी खानापूर्ति

अब पूरा मामला वरिष्ठ अधिकारियों के पाले में है। तहसीलदार ने अपना पंचनामा और नजरी नक्शा सौंपते हुए सख्त कार्रवाई की सिफारिश की है। इलाके के लोग अब इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि क्या प्रशासन इन अवैध बाउंड्रीवाल और सड़कों पर बुलडोजर चलाएगा। सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या रसूखदार कब्जाधारियों के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाया जाता है या मामला फाइलों में ही दबा रह जाएगा।

Also Read: Basant Ageawal Expose: धर्म की आड़ में अवैध प्लाटिंग का साम्राज्य! भू-माफिया बसंत अग्रवाल का खुला राज़, शासन-प्रशासन तक को साधने की कोशिश

दक्षिण कोसल का Whatsapp Group ज्वाइन करे

Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

Related Articles

Back to top button