
बिलासपुर के अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय (ABVV) में आर्थिक गड़बड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है। शासन के उच्च शिक्षा विभाग ने अनुशासनहीनता और वित्तीय अनियमितता के गंभीर आरोपों में विश्वविद्यालय के उप कुलसचिव (डिप्टी रजिस्ट्रार) शैलेंद्र दुबे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। मंत्रालय से जारी इस आदेश के बाद विश्वविद्यालय कैंपस में हड़कंप मच गया है। शैलेंद्र दुबे इससे पहले कुलसचिव की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं और उन पर पद का दुरुपयोग कर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगा है।
GeM पोर्टल के नियमों को दरकिनार कर की गई खरीदी
विश्वविद्यालय में सामानों की खरीदी को लेकर पिछले काफी समय से सवाल उठ रहे थे। जांच में यह बात सामने आई है कि सरकारी सामानों की खरीदी के लिए बने ‘जैम’ (GeM) पोर्टल के नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया गया। नियमों के मुताबिक पारदर्शी तरीके से सामान खरीदने के बजाय पसंदीदा फर्मों को फायदा पहुंचाने के लिए प्रक्रिया में बदलाव किए गए। जांच कमेटी की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि पूरी खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी थी और वित्तीय नियमों को ताक पर रखकर सौदे किए गए।
जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद गिरी गाज
इस पूरे प्रकरण की शिकायतों के बाद विभाग ने एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की थी। समिति ने विश्वविद्यालय के दस्तावेजों और खरीदी की फाइलों का बारीकी से मिलान किया, जिसमें गंभीर गड़बड़ियां पाई गईं। रिपोर्ट में शैलेंद्र दुबे की भूमिका को संदिग्ध पाया गया और उन्हें वित्तीय अनुशासन का पालन न करने का मुख्य रूप से जिम्मेदार माना गया। इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर उच्च शिक्षा विभाग ने निलंबन की फाइल आगे बढ़ाई और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
निलंबन के दौरान मुख्यालय हुआ तय, मिलेगी विभागीय जांच की आंच
जारी आदेश के अनुसार, निलंबन की अवधि में शैलेंद्र दुबे का मुख्यालय निर्धारित कर दिया गया है। इस दौरान वे बिना अनुमति मुख्यालय नहीं छोड़ पाएंगे और उन्हें केवल जीवन निर्वाह भत्ता ही देय होगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह केवल शुरुआती कार्रवाई है और आने वाले दिनों में उनके खिलाफ विस्तृत विभागीय जांच (Departmental Enquiry) शुरू की जाएगी। यदि जांच में आरोप पूरी तरह साबित हो जाते हैं, तो उन्हें सेवा से बर्खास्त भी किया जा सकता है।
विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारियों में बढ़ी बेचैनी
इस बड़ी कार्रवाई के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन के अन्य विभागों में भी तनाव का माहौल है। चर्चा है कि जांच का दायरा बढ़ सकता है और इस गड़बड़ी में शामिल कुछ अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी रडार पर आ सकते हैं। उच्च शिक्षा विभाग ने अपने संदेश में साफ कर दिया है कि शिक्षण संस्थानों में भ्रष्टाचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभाग का मुख्य उद्देश्य सरकारी राशि का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर लगाम लगाना है।



