
कुरुद विधायक और पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर के प्रयासों से ग्राम पंचायत मेघा को एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। जल संसाधन विभाग ने महानदी के तट पर शेष बचे तटबंध निर्माण के लिए 87.97 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति दे दी है। इस निर्माण से उन सभी किसानों को बड़ी राहत मिलेगी जिनकी फसलें हर साल बाढ़ या एनीकट के पानी के फैलाव के कारण बर्बाद हो जाती थीं। अब पक्का तटबंध बनने से नदी का बहाव खेतों की उपजाऊ मिट्टी को नहीं काट पाएगा, जिससे किसानों की मेहनत और उनकी बेशकीमती जमीन दोनों सुरक्षित रहेंगे।
बाढ़ रोकने वाली दीवार ही नहीं, बनेगा मल्टी-पर्पस कॉरिडोर
महानदी का जो पानी अब तक किनारों को निगल रहा था, वह अब इस क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक तरक्की का जरिया बनेगा। स्वीकृत परियोजना के तहत मेघा से गिरौद के बीच बनने वाला यह तटबंध केवल बाढ़ रोकने की दीवार मात्र नहीं होगा, बल्कि इसे भविष्य में एक ‘मल्टी-पर्पस कॉरिडोर’ की तरह भी विकसित किया जा सकता है। इसके निर्माण से मिट्टी का कटाव पूरी तरह थम जाएगा। यह प्रोजेक्ट “खेत की सुरक्षा और किसान की समृद्धि” के विजन को धरातल पर उतारने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
पर्यटन और स्थानीय व्यापार को मिलेगा नया विस्तार
तटबंध के निर्माण के साथ ही इसके ऊपरी हिस्से का सौंदर्यीकरण भी किया जा सकता है, जिससे यह पूरा क्षेत्र एक शानदार पिकनिक स्पॉट में तब्दील हो जाएगा। शाम के वक्त महानदी का मनोरम किनारा और पक्का रास्ता पर्यटकों को अपनी ओर खींचेगा। जब यहां पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी, तो इसका सीधा लाभ स्थानीय फुटकर व्यवसायियों और छोटे दुकानदारों को मिलेगा। इस पहल से गांव के स्तर पर ही रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
विजनरी लीडरशिप से धरातल पर उतरा विकास
87.97 लाख रुपये की यह स्वीकृति अजय चंद्राकर की जनहित के प्रति उनकी सजगता को दर्शाती है। उन्होंने न केवल महानदी में जलभराव से बाढ़ और किसानों की समस्या को समझा, बल्कि एक निर्माण कार्य को महानदी पर पर्यटन से जोड़कर समग्र विकास का योजना तैयार की। क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि महानदी में इस तटबंध निर्माण से खेतों में पानी भरने से होने वाली फसल क्षति पर प्रभावी नियंत्रण होगा, जिससे किसानों की मेहनत सुरक्षित रहेगी। विधायक ने ग्रामीणों और किसानों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए शासन से मंजूरी दिलाई है। आने वाले समय में यह तटबंध मेघा और आसपास के क्षेत्रों के लिए एक जीवन रेखा साबित होगा।





