
CG Farmers Protest Raipur: छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से आए हजारों किसान अपनी लंबित मांगों को लेकर राजधानी रायपुर में लामबंद हो गए हैं। भारतीय किसान संघ के बैनर तले आयोजित इस ‘अन्नदाता गर्जना रैली’ के माध्यम से किसानों ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। धान खरीदी की दरों में बढ़ोतरी, बकाया बोनस का भुगतान और प्रशासनिक व्यवस्थाओं में सुधार सहित दस सूत्रीय मांगों को लेकर किसान नया रायपुर स्थित मंत्रालय महानदी भवन का घेराव करने के लिए कूच कर रहे हैं।

10 सूत्री मांगों के साथ प्रदर्शन
भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन में राज्य के बस्तर से लेकर सरगुजा तक के किसान शामिल हुए हैं। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य दिलाने और वर्षों से लंबित समस्याओं का स्थायी समाधान निकालने के लिए यह आंदोलन किया जा रहा है। प्रदर्शनकारी किसान अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए प्रशासनिक मुख्यालय की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे पूरे नया रायपुर इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

3358 रुपये प्रति क्विंटल धान दर की मांग
किसान संघ की प्रमुख मांगों में धान की खरीदी तीन हजार तीन सौ अट्ठावन रुपये प्रति क्विंटल की दर से करने की बात शामिल है। इसके अलावा वर्ष 2022-23 की धान खरीदी का बकाया सत्रह सौ करोड़ रुपये का बोनस तुरंत किसानों के खातों में जारी करने का आग्रह किया गया है। संघ ने मांग की है कि फल और सब्जी उत्पादक किसानों को भी राज्य की कृषक उन्नति योजना के दायरे में लाकर उन्हें वित्तीय सहायता प्रदान की जाए।
धान खरीदी की अवधि बढ़ाने की अपील
खरीदी प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए किसान संगठन ने धान खरीदी की समय-सीमा पंद्रह नवंबर से बढ़ाकर पंद्रह फरवरी तक निर्धारित करने की मांग रखी है। साथ ही कांटा तौल में पारदर्शिता लाते हुए प्रति बोरी अधिकतम चालिस किलो सात सौ ग्राम धान लेने का स्पष्ट शासकीय आदेश जारी करने को कहा गया है। किसानों का यह भी आरोप है कि टोकन व्यवस्था और बैंक खाते समर्पित कराने की प्रक्रिया से छोटे किसानों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

गौ संवर्धन और अधूरी सिंचाई परियोजनाएं
आंदोलन के दौरान गौ संरक्षण को लेकर भी अहम मांगें उठाई गई हैं। संघ ने राज्य में गौवंदन योजना लागू करने और जी-राम-जी योजना को गौ संवर्धन से जोड़ने का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही अरपा-भैंसाझार जैसी अधूरी पड़ी सिंचाई परियोजनाओं के निर्माण कार्य में तेजी लाने और पैरी हाईडैम जैसी नई सिंचाई योजनाओं को तुरंत प्रशासनिक स्वीकृति देने की मांग की गई है, ताकि किसानों को खेती के लिए पर्याप्त पानी मिल सके।
फसल मुआवजा और खाद की कालाबाजारी पर रोक
हाल ही में हुई भारी बारिश और बाढ़ से प्रभावित फसलों का तत्काल सर्वे कराकर पीड़ित किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की गई है। इसके अलावा रबी और खरीफ सीजन के दौरान निर्धारित दर से अधिक कीमत पर रासायनिक खाद बेचने वाले विक्रेताओं पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है। संघ का कहना है कि खाद की कालाबाजारी पर लगाम न लगने से सीमांत और लघु किसानों का कृषि बजट बिगड़ जाता है।
वैकल्पिक फसलों और भूमि अधिग्रहण पर जोर
जल संरक्षण को बढ़ावा देने और पारंपरिक धान की खेती पर निर्भरता कम करने के लिए भारतीय किसान संघ ने मक्का और गेहूं की उपज को भी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने की मांग रखी है। इसके साथ ही भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को भारतीय एग्रो इकोनॉमिक रिसर्च सेंटर के दिशा-निर्देशों के अनुरूप लागू करने की बात कही गई है, जिससे किसानों की उपजाऊ जमीनों का उचित मुआवजा और पुनर्वास सुनिश्चित हो सके।
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