छत्तीसगढ़ में बच्चों के धर्मांतरण का खेल, विदेशी फंडिंग और संगठित नेटवर्क के मिले सुराग

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में धर्मांतरण का एक संवेदनशील मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक और खुफिया तंत्र सक्रिय हो गया है। धर्मापुर इलाके में स्थित एक चर्च और आश्रम पर बच्चों को सुनियोजित तरीके से प्रभावित कर उनका धर्म बदलने का प्रयास करने के गंभीर आरोप लगे हैं। शुरुआती जांच में विदेशी फंडिंग और एक संगठित नेटवर्क के शामिल होने के संकेत मिले हैं, जिसके बाद जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है।

राजनांदगांव में बच्चों को निशाना बनाने का आरोप, डेविड चाको पर केस दर्ज

राजनांदगांव के धर्मापुर में पुलिस और खुफिया एजेंसियां एक विशेष मामले की तह तक जाने में जुटी हैं। यहां आरोप है कि स्थानीय बच्चों को धीरे-धीरे उनके मूल धर्म से विमुख करने की कोशिश की जा रही थी, जिसमें एक चर्च और आश्रम की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। प्रारंभिक पड़ताल में डेविड चाको नामक व्यक्ति का नाम मुख्य आरोपी के तौर पर सामने आया है, जो कथित रूप से बच्चों को एक खास तरह का प्रशिक्षण दे रहा था। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी के खिलाफ छत्तीसगढ़ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत अपराध पंजीबद्ध कर लिया है।

खास ट्रेनिंग मॉड्यूल और रहस्यमयी भाषा वाली किताबों का इस्तेमाल

जांच एजेंसियों को मौके से कई ऐसे दस्तावेज और किताबें मिली हैं जो संदेह पैदा करती हैं। आरोप है कि बच्चों को प्रभावित करने के लिए एक विशेष ट्रेनिंग मॉड्यूल का इस्तेमाल किया जा रहा था। इन बरामद किताबों और दस्तावेजों की भाषा सामान्य नहीं है और इनके अर्थ सीधे तौर पर समझ पाना मुश्किल है। जांचकर्ताओं को शक है कि इस क्लिष्ट भाषा का प्रयोग किसी छिपा हुए एजेंडे के तहत किया गया हो सकता है। शुरुआती जांच से ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि यह मामला केवल स्थानीय स्तर का नहीं है, बल्कि इसके तार पूरे छत्तीसगढ़ और संभवतः राज्य के बाहर भी जुड़े हो सकते हैं।

विदेशी फंडिंग का शक गहराया, ‘पॉल’ नाम से ट्रांजेक्शन के सबूत

इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू विदेशी फंडिंग की आशंका है। जांच के दौरान पुलिस को ट्रेवल वाउचर, आवास योजना से जुड़े कागज और ऑनलाइन व नकद भुगतान के कई अहम दस्तावेज हाथ लगे हैं। जांच में यह बात सामने आई है कि स्थानीय स्तर पर नेटवर्क से जुड़े कुछ लोगों को ‘पॉल’ जैसे कोड नामों का इस्तेमाल करके पैसे दिए गए थे। अब पुलिस की प्राथमिकता यह जानना है कि यह विदेशी फंडिंग कहां से आ रही थी, पैसा भारत तक किस रास्ते से पहुंचा और किन बैंक खातों के जरिए इसे खपाया गया। अमेरिका से डॉलर को नकदी में बदलने की प्रक्रिया की भी जांच की जा रही है।

चार दिवसीय राज्यस्तरीय ट्रेनिंग कैंप और पुराना पैटर्न जांच के घेरे में

जांच एजेंसियां बीते दिसंबर महीने में आयोजित एक चार दिवसीय राज्यव्यापी प्रशिक्षण कार्यक्रम की भी गहराई से पड़ताल कर रही हैं। इस कैंप में छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों से लोगों को चुनकर बुलाया गया था। जांच का विषय यह है कि प्रतिभागियों का चयन किस आधार पर हुआ और कैंप के दौरान उन्हें क्या सिखाया गया। गौरतलब है कि इससे पहले भी जशपुर, नारायणपुर, बस्तर और दुर्ग जैसे जिलों में धर्मांतरण के मामले सामने आ चुके हैं। जांच में यह पुराना पैटर्न देखा गया है कि अक्सर समाज सेवा, शिक्षा या चिकित्सा सहायता की आड़ में संपर्क बनाकर धीरे-धीरे लोगों की धार्मिक पहचान बदलने की कोशिश की जाती है।

चर्च के बड़े पदाधिकारियों तक पहुंची जांच की आंच, प्रशासन की परीक्षा

पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच अब सिर्फ मुख्य आरोपी डेविड चाको तक सीमित नहीं रहेगी। चर्च के संचालन से जुड़े ऊंचे पदों पर बैठे लोगों की भूमिका की भी बारीकी से जांच की जा रही है। एजेंसियां पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में लगी हैं। बच्चों को लक्ष्य बनाने और विदेशी धन के इस्तेमाल के संकेत मिलने के बाद यह मामला छत्तीसगढ़ धर्मांतरण कानून और प्रशासन के लिए एक बड़ी परीक्षा बन गया है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार ऐसे संगठित नेटवर्क पर समय रहते कितनी प्रभावी कार्रवाई कर पाती है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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