Tamatar Ki Rajdhani: छत्तीसगढ़ की ‘टमाटर की राजधानी’: जहाँ ₹1 किलो भी बिकता है टमाटर!

रायपुर: CG Tomato Farming: हर राज्य या देश की एक राजधानी होती है, लेकिन छत्तीसगढ़ में एक ऐसा गाँव है जिसे अनौपचारिक रूप से “टमाटर की राजधानी” के रूप में जाना जाता है। यह गाँव है लुड़ेग, जो जशपुर जिले की पत्थलगांव तहसील में बसा है। यह गाँव राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है, क्योंकि यहाँ की टमाटर की उपज दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे बड़े महानगरों तक पहुँचती है।

टमाटर उत्पादन के लिए अनुकूल जलवायु और मिट्टी

Tomato Production: लुड़ेग गाँव समुद्र तल से करीब 550 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। सर्दियों में यहाँ का तापमान लगभग 15 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता है। यह ऊँचाई, क्षेत्र की जलवायु के साथ मिलकर टमाटर उत्पादन के लिए बेहद अनुकूल परिस्थितियाँ प्रदान करती है। इसके अलावा, यहाँ की लाल मिट्टी टमाटर उत्पादन और उसकी गुणवत्ता को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए उपयुक्त मानी जाती है। टमाटर की फसल के मौसम में यहाँ एक स्थानीय “टमाटर महोत्सव” का आयोजन भी होता है।

1980 के दशक में हुई खेती की शुरुआत

Tomato Cultivation: लुड़ेग गाँव में टमाटर की खेती की शुरुआत लगभग 1980 के दशक में हुई थी। शुरुआत में उन्नत तकनीक न होने के कारण यह एक जोखिम भरा कदम था। लेकिन हरित क्रांति के माध्यम से उन्नत बीज और प्रसंस्करण तकनीकों के आने के बाद, यह जोखिम एक फायदेमंद अवसर में बदल गया। किसानों ने जल्दी ही महसूस किया कि लुड़ेग की मिट्टी और जलवायु टमाटर के लिए वरदान है। आज, लुड़ेग और इसके आसपास के गाँव छत्तीसगढ़ के कुल टमाटर उत्पादन का 20-25% हिस्सा योगदान करते हैं।

लुड़ेग के टमाटर की किस्में और आर्थिक योगदान

टमाटर की खेती मुख्य रूप से अक्टूबर से मार्च के मौसम में होती है। इस दौरान, गाँव और आसपास के क्षेत्रों से हर साल 50 हज़ार से 1 लाख टन टमाटर का उत्पादन होता है। एक एकड़ खेत से औसतन 20-30 टन टमाटर प्राप्त होता है, जो किसानों के लिए अत्यधिक लाभकारी है।

यहाँ उगाई जाने वाली प्रमुख किस्मों में अर्का रक्षक, पुसा रूबी, चेरी टमाटर और कुछ स्थानीय हाइब्रिड किस्में शामिल हैं। ये टमाटर अपने बड़े आकार और लंबी शेल्फ लाइफ के लिए प्रसिद्ध हैं, और इन्हें बाज़ार में “लुड़ेग टमाटर” के नाम से एक अलग पहचान मिली हुई है। लुड़ेग के टमाटर की कीमत बाज़ार में आमतौर पर ₹20 से ₹50 प्रति किलो रहती है, हालाँकि मांग बढ़ने पर यह ₹100 प्रति किलो तक भी पहुँच जाती है। इस खेती ने न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है, बल्कि ट्रांसपोर्ट जैसे क्षेत्रों में भी रोजगार के अवसर पैदा किए हैं, जिससे छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था को विशेष योगदान मिला है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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