
CG Coal Scam: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोयला घोटाले में जेल में बंद मुख्य आरोपियों के लिए राहत भरी खबर आई है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री की उप-सचिव सौम्या चौरसिया, निलंबित आईएएस अधिकारी रानू साहू और कारोबारी सूर्यकांत तिवारी को नियमित जमानत दे दी है। इससे पहले ये आरोपी अंतरिम जमानत पर बाहर थे, लेकिन अब उन्हें स्थायी तौर पर राहत मिल गई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जयमाला बागची की पीठ ने लंबी सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया।
जमानत के साथ जुड़ी कड़ी शर्तें
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते समय कुछ सख्त शर्तें भी लगाई हैं। अदालत ने आरोपियों को निर्देश दिया है कि वे फिलहाल छत्तीसगढ़ राज्य की सीमा से बाहर रहेंगे। इसका उद्देश्य जांच को प्रभावित होने से बचाना और गवाहों पर दबाव कम करना है। इन शर्तों के उल्लंघन पर जमानत रद्द भी की जा सकती है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि भले ही आरोपियों को बाहर रहने की अनुमति दी गई है, लेकिन उन्हें न्यायिक प्रक्रिया में पूरा सहयोग करना होगा।
अदालत में वकीलों के बीच हुई तीखी बहस
इस हाई प्रोफाइल मामले में दोनों पक्षों के नामचीन वकीलों ने अपनी दलीलें पेश कीं। अभियुक्तों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे और हर्षवर्धन परघनीया ने पक्ष रखते हुए जमानत की मांग की। दूसरी तरफ राज्य सरकार और जांच एजेंसियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी और अतिरिक्त महाधिवक्ता रवि शर्मा ने मोर्चा संभाला। शासन ने जमानत का विरोध करते हुए इसे गंभीर आर्थिक अपराध बताया, हालांकि अदालत ने सभी तथ्यों को देखने के बाद आरोपियों को राहत देना सही समझा।
क्या है करोड़ों का कोयला लेवी घोटाला?
प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मुताबिक यह घोटाला कोयले के परिवहन पर अवैध लेवी वसूली से जुड़ा है। जांच एजेंसी का आरोप है कि राज्य में कोयला ढुलाई के बदले प्रति टन के हिसाब से वसूली की जा रही थी। इस मामले में अब तक 11 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और करीब 35 लोगों को आरोपी बनाया गया है। ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग कानून (PMLA) के तहत कार्रवाई करते हुए अब तक 273 करोड़ रुपये से ज्यादा की चल-अचल संपत्तियां जब्त की हैं।
जारी रहेगी कानूनी और न्यायिक लड़ाई
भले ही आरोपियों को जमानत मिल गई हो, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मामला खत्म हो गया है। विशेष अदालत में अब भी इस घोटाले से जुड़ी पांच अभियोजन शिकायतें (चार्जशीट) लंबित हैं। जांच एजेंसियां अब भी मामले की तह तक जाने के लिए नए सुराग तलाश रही हैं। जमानत मिलने के बाद अब कानूनी लड़ाई का अगला दौर शुरू होगा, जहां आरोपियों को कोर्ट में खुद को निर्दोष साबित करना होगा।



