
छत्तीसगढ़ IndianEconomy: त्योहारी सीजन में कपड़ा व्यापारियों और ग्राहकों को सरकार से राहत की जो उम्मीद थी, वह अब टूटती नजर आ रही है। जीएसटी परिषद की ओर से कपड़ा कारोबार के टैक्स ढांचे में किए गए बदलावों ने न व्यापारियों को राहत दी है, न ही ग्राहकों को। अब ₹2500 से अधिक की कपड़ा खरीद पर 12% नहीं, बल्कि 18% जीएसटी देना होगा, जिससे बाजार पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।
बाजार पर पड़ेगा सीधा असर
FestiveSeasonSales: जगदलपुर समेत पूरे छत्तीसगढ़ में कपड़ा बाजार इस समय त्योहारों की तैयारियों में जुटा हुआ है। व्यापारियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के कारण पहले ही ग्राहक सोच-समझकर खर्च कर रहे थे, अब टैक्स बढ़ने से बिक्री पर और असर पड़ेगा।
कपड़ा व्यापार संघ से जुड़े व्यवसायियों का कहना है कि खासकर मिडल क्लास और उच्च वर्गीय ग्राहक अब त्योहारों पर बड़े पैमाने पर खरीदारी करने से हिचकिचाएंगे।
उपभोक्ताओं की भी नाराज़गी
TextileIndustry: त्योहारों पर नए कपड़े खरीदना भारतीय परंपरा का अहम हिस्सा माना जाता है। लेकिन अब ग्राहक भी इस बढ़े हुए टैक्स से नाराज़ हैं। उनका कहना है कि हर त्योहार पर परिवार के लिए कपड़े खरीदना एक परंपरा रही है, लेकिन 18% जीएसटी ने उस उत्सव की खुशी को कम कर दिया है।
कारोबारियों की मांग: सभी कपड़ों पर केवल 5% जीएसटी
GSTUpdate: छोटे और मध्यम वर्गीय दुकानदारों ने सरकार से अपील की है कि सभी प्रकार के कपड़ों पर केवल 5% जीएसटी लगाया जाए। उनका कहना है कि इससे न केवल आम लोगों को राहत मिलेगी, बल्कि बाजार में भी रौनक लौटेगी। कपड़ा व्यवसायी कमल चांडक का कहना है, “सरकार ने मध्यमवर्ग को कुछ हद तक राहत देने की कोशिश की है, जो स्वागत योग्य है। लेकिन उच्च मूल्य के वस्त्रों पर टैक्स बढ़ने से व्यापार पर असर पड़ेगा। त्योहारों का समय बिक्री का सबसे अहम सीजन होता है, और ऐसे में टैक्स बढ़ोतरी से नुकसान उठाना पड़ सकता है।” इस बार त्योहारों के मौसम में जहां बाजारों में रौनक लौटने की उम्मीद थी, वहीं बढ़ा हुआ जीएसटी कपड़ा व्यापारियों के लिए चिंता का विषय बन गया है। अब देखना होगा कि सरकार व्यापारियों की मांगों पर ध्यान देती है या नही
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