
CG Assistant Professor Bharti New Rule: छत्तीसगढ़ के सरकारी कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने का सपना देख रहे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। उच्च शिक्षा विभाग प्रदेश में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के नियमों में 11 साल बाद एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव करने जा रहा है। अब तक चली आ रही ग्रेजुएशन में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंकों की अनिवार्यता को विभाग खत्म करने की तैयारी में है। इस बदलाव से उन हजारों योग्य अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिलेगी जिन्होंने नेट या पीएचडी तो कर ली है, लेकिन स्नातक में कम अंकों के कारण वे पिछली भर्तियों में आवेदन करने से वंचित रह गए थे।
ग्रेजुएशन में 50% अंकों की अनिवार्यता से क्यों थे अभ्यर्थी परेशान?
वर्ष 2014 और 2019 में हुई असिस्टेंट प्रोफेसर भर्तियों के दौरान स्नातक में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक होने की शर्त अनिवार्य थी। इस नियम के कारण नेट (NET) और पीएचडी (PhD) जैसी उच्च शैक्षिक योग्यता रखने वाले कई मेधावी उम्मीदवार भी भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो जाते थे। जानकारों का तर्क है कि जब यूजीसी (UGC) की पात्रता परीक्षाओं यानी नेट और सेट (SET) के लिए स्नातक में अंकों की ऐसी कोई सीमा तय नहीं है, तो भर्ती परीक्षा में इसे लागू रखना तार्किक नहीं था। इसी विसंगति को दूर करने के लिए विभाग अब पुराने नियमों को संशोधित कर रहा है।
CGPSC की आपत्ति के बाद जागा उच्च शिक्षा विभाग
इस बदलाव की मुख्य वजह छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) द्वारा जताई गई कड़ी आपत्ति है। आयोग ने स्पष्ट किया था कि वर्तमान में जो शर्त लागू है, वह यूजीसी रेगुलेशन-2018 के नियमों के अनुरूप नहीं है। सीजीपीएससी ने केवल अंकों की बाध्यता ही नहीं, बल्कि आरक्षण रोस्टर, दिव्यांगता प्रमाण-पत्र और सह-विषयों की स्पष्टता सहित नौ प्रमुख बिंदुओं पर उच्च शिक्षा विभाग को फाइल वापस भेज दी थी। आयोग की इन आपत्तियों को गंभीरता से लेते हुए विभाग अब भर्ती नियमों को यूजीसी के नए मानकों के अनुसार बदलने की प्रक्रिया में है।
उच्च शिक्षा विभाग ने गठित की विशेष समिति
सीजीपीएससी द्वारा वापस भेजे गए भर्ती प्रस्ताव में सुधार के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने एक विशेष समिति का गठन किया है। यह समिति उन तमाम नौ बिंदुओं पर काम कर रही है जिन पर आयोग ने आपत्तियां उठाई थीं। समिति बहुत जल्द इन खामियों को दुरुस्त कर संशोधित प्रस्ताव फिर से सीजीपीएससी को भेजेगी। जैसे ही आयोग से हरी झंडी मिलेगी, विभाग असिस्टेंट प्रोफेसरों के पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक विज्ञापन जारी कर देगा।
करीब 700 पदों पर होगी भर्ती, लाइब्रेरियन और क्रीड़ाधिकारी के पद भी शामिल
प्रदेश के शासकीय कॉलेजों के लिए असिस्टेंट प्रोफेसर के 625 पदों के साथ ही लाइब्रेरियन के 75 और क्रीड़ाधिकारी के पदों पर भर्ती की योजना है। इस तरह कुल 700 पदों पर यह भर्ती प्रक्रिया आयोजित की जाएगी। लंबे समय से नई भर्ती का इंतजार कर रहे युवाओं के लिए यह एक बड़ा अवसर है। विभाग का प्रयास है कि तकनीकी बाधाओं को जल्दी दूर किया जाए ताकि प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में शिक्षकों के खाली पदों को समय रहते भरा जा सके।
प्रस्तावित विषयों और पदों का विवरण
इस बार की भर्ती प्रक्रिया में केवल 15 विषयों को शामिल किया गया है। पिछले वर्षों की तुलना में विषयों की संख्या में कमी आई है। वर्ष 2009 में 32 विषय थे, जो 2014 और 2019 में घटकर 27 रह गए थे, और अब केवल 15 विषयों पर ही भर्ती की जानी है। प्रस्तावित विषयों का विवरण नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| विषय | प्रस्तावित पदों की संख्या |
| वाणिज्य | 75 |
| समाजशास्त्र | 50 |
| भौतिकी | 50 |
| गणित | 50 |
| रसायन | 50 |
| वनस्पति शास्त्र | 50 |
| प्राणी शास्त्र | 50 |
| हिंदी | 50 |
| अंग्रेजी | 50 |
| राजनीति शास्त्र | 50 |
| इतिहास | 25 |
| भूगोल | 25 |
| अर्थशास्त्र | 25 |
| कंप्यूटर एप्लीकेशन | 15 |
| विधि (Law) | 10 |
हजारों योग्य उम्मीदवारों को मिलेगा सीधा फायदा
नियमों में यह संशोधन प्रदेश के सैकड़ों उन कैंडिडेट्स के लिए किसी सौगात से कम नहीं है जो उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी केवल ग्रेजुएशन में कम अंकों के कारण असिस्टेंट प्रोफेसर बनने से चूके गए थे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद यदि कोई अभ्यर्थी स्नातक में कम अंक होने के बावजूद नेट या पीएचडी डिग्री हासिल करता है, तो वह पूरे आत्मविश्वास के साथ भर्ती परीक्षा में शामिल हो सकेगा।
जल्द जारी होगा भर्ती का विज्ञापन
आयोग और विभाग के बीच चल रहे इस पत्राचार और संशोधनों के दौर के बाद अब भर्ती का रास्ता साफ होता दिख रहा है। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर नजर बनाए रखें। समिति द्वारा संशोधित फाइल सीजीपीएससी को सौंपने के बाद विज्ञापन की प्रक्रिया में अब ज्यादा देरी की संभावना नहीं है। सरकार का लक्ष्य है कि इस वर्ष के अंत तक भर्ती प्रक्रिया को गति दी जाए ताकि कॉलेजों में शैक्षणिक व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा सके।



