छत्तीसगढ़

वक़्फ़ बिल के खिलाफ छत्तीसगढ़ के मस्जिद से भड़काऊ बयान, इमाम को कारण बताओ नोटिस जारी

रायपुर। Bilaspur Imam Show Cause Notice by Waqf Board: बिलासपुर के तालापारा स्थित हुसैनी मस्जिद के इमाम सैय्यद जहीर साहब आगा को वक्फ बोर्ड ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह कदम इमाम द्वारा वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ मस्जिद में भड़काऊ बयान देने के बाद उठाया गया है। बोर्ड ने इमाम को नोटिस जारी करते हुए स्पष्ट किया कि अगर उनके द्वारा दिए गए बयान का जवाब संतोषजनक नहीं मिलता, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

वक्फ बोर्ड का आरोप: नियमों का उल्लंघन

वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने कहा कि इमाम ने शुक्रवार की नमाज के बाद मस्जिद में राजनीतिक और भड़काऊ तकरीर की थी, जो बोर्ड के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करती है। उनका यह बयान वक्फ बोर्ड की नीतियों के खिलाफ था, और इससे सामुदायिक माहौल में अशांति फैलने का खतरा उत्पन्न हो सकता है।

विधेयक के खिलाफ भड़काऊ बयान

वक्फ बोर्ड को शिकायत मिली थी कि इमाम ने केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए वक्फ (संशोधन) विधेयक के खिलाफ बयान दिया और मुस्लिम समुदाय के कुछ वर्गों द्वारा विधेयक का समर्थन करने वाले लोगों पर आपत्तिजनक टिप्पणी की। इस पर बोर्ड ने इसे गंभीर मामला मानते हुए जांच शुरू की और इमाम को नोटिस जारी किया।

वक्फ (संशोधन) विधेयक: विवादों में घिरा

हाल ही में संसद से पारित वक्फ संशोधन विधेयक में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और विवादों के समाधान के लिए सरकार को अधिक अधिकार देने का प्रावधान किया गया है। यह विधेयक अब राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून का रूप लेगा। विधेयक को लेकर राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। जहां एनडीए सरकार इसका समर्थन कर रही है, वहीं विपक्षी दल जैसे कांग्रेस, सपा, राजद और आम आदमी पार्टी इसका विरोध कर रहे हैं। उनका आरोप है कि सरकार वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश कर रही है।

विपक्ष ने किया विरोध

विपक्षी दलों का कहना है कि यह विधेयक मुस्लिम समुदाय की स्वतंत्रता और वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को प्रभावित कर सकता है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी समेत कई अन्य नेताओं ने इस विधेयक को अदालत में चुनौती देने का ऐलान किया है।

इस मामले में वक्फ बोर्ड की तरफ से जारी नोटिस ने राजनीतिक गलियारों में और मस्जिदों में धार्मिक वक्तव्यों को लेकर बहस को और तेज कर दिया है। अब देखना यह होगा कि इमाम का जवाब बोर्ड के सवालों का कितना संतोषजनक होता है और क्या इस मामले में कानूनी कार्रवाई होती है या नहीं।

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