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Gopashtami 2024: पूजन विधि, शुभ मुहूर्त और पर्व का महत्व

गोपाष्टमी हिंदू धर्म में एक पावन पर्व है, जिसे कार्तिक शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और गौ माता की पूजा की जाती है, जो हमारे धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करती है। खासकर ब्रज क्षेत्र, मथुरा और वृंदावन में इसे बड़े उत्साह से मनाया जाता है।

पर्व का धार्मिक महत्व

गोपाष्टमी का महत्व पौराणिक कथाओं से जुड़ा है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के क्रोध से ब्रजवासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी अंगुली पर उठाया था। इंद्र द्वारा हार मानने के बाद, इस दिन को उनकी विजय के प्रतीक के रूप में मनाया गया। इस कारण गौ माता की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है, क्योंकि गौ माता को समस्त देवी-देवताओं का निवास स्थान माना गया है।

गोपाष्टमी पर शुभ मुहूर्त

इस वर्ष गोपाष्टमी का शुभ मुहूर्त 9 नवंबर को सुबह 11:43 से दोपहर 12:26 तक है। इसके अतिरिक्त, सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 6:39 से 11:47 तक रहेगा, जो पूजा के लिए विशेष रूप से लाभकारी है।

पूजन विधि

गोपाष्टमी के दिन घर पर गौ माता का चित्र या मूर्ति स्थापित कर पूजा की जा सकती है। सबसे पहले स्नान कर साफ-सफाई करें, फिर गौ माता को ताजे फूल, रोली, चंदन और हरा चारा अर्पित करें। गौशाला जाकर गायों को गुड़ और चारा खिलाना भी शुभ माना जाता है। गौ सेवा करने से धर्मिक लाभ के साथ सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो पारिवारिक सुख और समृद्धि को बढ़ाता है।

गोपाष्टमी न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह हमें गौ माता के प्रति श्रद्धा और संवेदनशीलता का संदेश भी देता है।

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