
रायपुर: छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में चल रही छमाही परीक्षाओं के दौरान एक प्रश्न पत्र ने बड़ी कानूनी और सामाजिक बहस छेड़ दी है। महासमुंद जिले के प्राथमिक स्कूलों में कक्षा चौथी के अंग्रेजी विषय के पेपर में एक सवाल पूछा गया था कि “मोना के कुत्ते का क्या नाम है?” इस प्रश्न के बहुविकल्पीय उत्तरों में एक विकल्प ‘राम’ (RAM) दिया गया था। जैसे ही यह बात अभिभावकों और हिंदू संगठनों तक पहुंची, विरोध के स्वर तेज हो गए। संगठनों ने इसे करोड़ों लोगों की आस्था का अपमान बताते हुए पटेवा में जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) का घेराव किया और दोषियों पर सख्त कार्रवाई के लिए कलेक्टर-एसपी को ज्ञापन सौंपा। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने आनन-फानन में कड़े फैसले लिए हैं।
जिम्मेदार अधिकारियों पर गिरी गाज: प्रश्न पत्र बनाने वाली शिक्षिका सस्पेंड, संविदा शिक्षक की सेवा हुई समाप्त
इस विवादित प्रश्न को लेकर शिक्षा विभाग ने प्राथमिक जांच के बाद सख्त कदम उठाए हैं। प्रश्न पत्र तैयार करने वाली शिक्षिका शिखा सोनी, जो प्राथमिक शाला खपरी की प्रधान पाठक (हेड मास्टर) हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही पेपर की जांच करने वाली यानी पेपर मॉडरेटर नम्रता वर्मा को विभाग ने सेवा से बर्खास्त कर दिया है। नम्रता वर्मा संविदा शिक्षक के पद पर कार्यरत थीं, इसलिए उनकी सेवाएं तुरंत समाप्त कर दी गईं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
हेडमास्टर की सफाई और माफी: ‘रामू’ की जगह ‘राम’ टाइप होने का दावा, भावनाओं को ठेस पहुंचाने का नहीं था इरादा
निलंबन की कार्रवाई के बीच हेडमास्टर शिखा सोनी ने अपना पक्ष रखा है। उन्होंने विभाग को दिए स्पष्टीकरण में कहा कि यह एक मानवीय भूल थी। उनके मुताबिक, वे विकल्प में ‘रामू’ (RAMU) लिखना चाहती थीं, लेकिन टाइपिंग की गलती के कारण वहां ‘राम’ (RAM) अंकित हो गया। शिखा सोनी ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी भी धर्म या व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं को आहत करना कतई नहीं था। उन्होंने इस चूक के लिए गहरा खेद प्रकट करते हुए लिखित में क्षमा याचना की है। हालांकि, विभाग ने इस दलील को पर्याप्त नहीं माना और प्रक्रियागत चूक के लिए दंड जारी रखा।
बीईओ को थमाया कारण बताओ नोटिस: तिल्दा के ब्लॉक शिक्षा अधिकारी से मांगा गया जवाब, लापरवाही पर विभाग सख्त
जवाबदेही तय। कार्रवाई का दायरा केवल शिक्षकों तक सीमित नहीं रहा है। जिला शिक्षा अधिकारी ने तिल्दा के ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) को भी इस मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किया है। विभाग यह जानना चाहता है कि जब प्रश्न पत्र तैयार होकर छपने गया और स्कूलों में वितरित हुआ, तब उच्च स्तर पर इसकी जांच क्यों नहीं की गई। अधिकारियों का मानना है कि यदि मॉनिटरिंग के स्तर पर सतर्कता बरती जाती, तो इस तरह की विवादित सामग्री बच्चों तक नहीं पहुंचती। बीईओ को एक निश्चित समय के भीतर अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
धार्मिक आस्था और पाठ्यक्रम की मर्यादा: सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस, शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
यह मामला अब केवल प्रशासनिक गलियारों तक सीमित नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी लोग इसे लेकर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि प्रश्न पत्रों के निर्माण में संवेदनशीलता का होना अनिवार्य है, खासकर जब मामला छोटे बच्चों और उनकी शिक्षा से जुड़ा हो। इस घटना ने एक बार फिर शिक्षा विभाग की प्रिंटिंग और वेरिफिकेशन प्रक्रिया की खामियों को उजागर किया है। फिलहाल, संबंधित केंद्रों पर नए निर्देश जारी किए गए हैं ताकि भविष्य में किसी भी परीक्षा में ऐसे विवादित या त्रुटिपूर्ण प्रश्नों की पुनरावृत्ति न हो सके।



