
CG High Court Maternity Leave Order: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने संविदा पर कार्यरत महिला कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने संविदा डॉक्टर निकिता श्रीवास्तव की याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें 180 दिनों का सवेतन मातृत्व अवकाश देने का आदेश जारी किया है। इसके साथ ही अदालत ने अवकाश का आवेदन देने के बाद कॉलेज प्रशासन द्वारा जारी किए गए बर्खास्तगी आदेश को अवैध ठहराते हुए निरस्त कर दिया है और सभी बकाया वित्तीय लाभ प्रदान करने के निर्देश दिए हैं।
मातृत्व अवकाश का आवेदन देने पर कॉलेज प्रशासन ने समाप्त कर दी थी सेवा
Chhattisgarh Contract Staff High Court Verdict: मामले के विवरण के अनुसार डॉ. निकिता श्रीवास्तव एक मेडिकल कॉलेज में संविदा आधार पर अपनी सेवाएं दे रही थीं। गर्भावस्था के दौरान उन्होंने नियमानुसार मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था। इसी बीच नियमित डॉक्टर की पदस्थापना का हवाला देते हुए कॉलेज प्रशासन ने उनकी संविदा सेवा समाप्त कर दी। सेवा समाप्ति के इस निर्णय को डॉ. निकिता ने हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए मातृत्व लाभ दिलाने की गुहार लगाई थी।
चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने पलटा सिंगल बेंच का निर्णय
Chief Justice Krishna Ram Mahapatra Bench Order: इस संवेदनशील मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस कृष्णा राम महापात्र की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच में हुई। डिवीजन बेंच ने मामले के सभी कानूनी पहलुओं की समीक्षा करने के बाद सिंगल बेंच के पूर्व फैसले को निरस्त कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल संविदा कर्मचारी होने के आधार पर किसी महिला को उसके मातृत्व अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।
कॉलेज प्रशासन द्वारा जारी बर्खास्तगी नोटिस को अदालत ने ठहराया अवैध
Contractual Employee Maternity Benefits CG: हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मातृत्व अवकाश की मांग करने पर सेवा समाप्ति या बर्खास्तगी का नोटिस जारी करना पूरी तरह से अनुचित और अवैध है। अदालत ने कॉलेज प्रबंधन द्वारा जारी सेवा समाप्ति के आदेश को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया। इसके साथ ही याचिकाकर्ता को 180 दिन का पूरा सवेतन अवकाश देने और इस अवधि के दौरान के सभी वित्तीय देयकों का भुगतान करने का आदेश दिया।
संविदा अवधि समाप्त होने के बावजूद मिल सकेगा मातृत्व लाभ का अधिकार
इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यदि मातृत्व अवकाश के दौरान किसी संविदा कर्मचारी की अनुबंध अवधि समाप्त भी हो जाती है, तब भी वह मातृत्व लाभ की हकदार रहेगी। हाईकोर्ट के इस रुख से स्पष्ट हो गया है कि शासकीय या अर्द्ध-शासकीय संस्थानों में संविदा पर कार्यरत महिलाओं के कानूनी और मानवीय अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती।
संविदा पर कार्यरत राज्य की हजारों महिला कर्मचारियों के लिए नजीर बना फैसला
Dr Nikita Srivastava CG High Court Case: डिवीजन बेंच के इस आदेश से डॉ. निकिता श्रीवास्तव को बड़ी राहत मिली है। यह निर्णय प्रदेश के विभिन्न विभागों में संविदा पर काम कर रही हजारों महिला कर्मचारियों के लिए एक नजीर साबित होगा। विधिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले के बाद अब कोई भी विभाग मातृत्व अवकाश मांगने पर संविदा कर्मियों के खिलाफ दंडात्मक या सेवा समाप्ति की कार्रवाई नहीं कर सकेगा।



