
CG Mantralaya Outsourcing Bharti: छत्तीसगढ़ मंत्रालय में कनिष्ठ सचिवालय सहायकों के नियमित पदों को संविदा और आउटसोर्सिंग के जरिए भरने के सरकारी फैसले पर विवाद गहरा गया है. शासन के इस कदम से नाराज कर्मचारी खुलकर विरोध में उतर आए हैं. छत्तीसगढ़ मंत्रालय कर्मचारी संघ ने इस नीति को शिक्षित युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया है. संघ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य सचिव को एक आधिकारिक पत्र भेजा है, जिसमें इस पूरी आउटसोर्सिंग भर्ती प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाने की मांग की गई है.
सबसे बड़े प्रशासनिक दफ्तर की गोपनीयता भंग होने की आशंका
कर्मचारी संघ का कहना है कि छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद से लेकर आज तक मंत्रालय के कामकाज की संवेदनशीलता को देखते हुए कभी भी यहां बाहरी एजेंसियों के माध्यम से भर्ती नहीं की गई. संघ ने चेतावनी दी है कि इस फैसले से राज्य के सर्वोच्च कार्यालय की प्रशासनिक गोपनीयता पूरी तरह दांव पर लग जाएगी. इसके साथ ही निजी कंपनियों को ठेका देने से सरकारी धन का भी भारी अपव्यय होगा और पूरी चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता खत्म होने से भाई-भतीजावाद को बढ़ावा मिलेगा.

रिटायर्ड कर्मचारियों को संविदा पर रखने के फैसले का कड़ा विरोध
छत्तीसगढ़ मंत्रालयीन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष चंद्रकांत पांडेय ने बताया कि सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा हाल ही में सेवानिवृत्त कर्मचारियों को दोबारा संविदा पर रखने का निर्णय भी लिया गया है. उन्होंने इसे प्लेसमेंट एजेंसियों को फायदा पहुंचाने की एक सोची-समझी रणनीति करार दिया. उन्होंने अफसरों के उस तर्क को भी खारिज किया जिसमें मौजूदा पुराने कर्मचारियों को ई-ऑफिस प्रणाली की जानकारी न होने की बात कही गई थी. संघ ने सवाल उठाया कि अगर पुराने लोगों को कंप्यूटर का काम नहीं आता, तो फिर सेवानिवृत्त कर्मचारियों से ई-ऑफिस का काम कैसे कराया जा सकता है.

आरक्षित वर्ग के बेरोजगारों के अधिकार छिनने की चिंता
कर्मचारियों का आरोप है कि इस नई नीति से प्रदेश के दूरदराज इलाकों में रहने वाले अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के शिक्षित युवाओं का हक छिन जाएगा क्योंकि आउटसोर्सिंग में आरक्षण के नियमों का पालन नहीं होता. संघ ने उन 150 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का पक्ष भी लिया जिन्हें हाल ही में पदोन्नत किया गया है. संघ का कहना है कि ई-ऑफिस का काम न जानने का बहाना बनाकर उन्हें बाहर करने के बजाय सरकार को उन्हें कंप्यूटर और प्रशासनिक कामकाज का उचित प्रशिक्षण देना चाहिए.

चयन मंडल की परीक्षा तय होने के बावजूद निजी हाथों में काम सौंपने की मंशा पर खड़े किए सवाल
संघ ने सामान्य प्रशासन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि जब छत्तीसगढ़ राज्य कर्मचारी मंडल द्वारा आगामी 20 दिसंबर को संयुक्त भर्ती परीक्षा का आयोजन पहले से तय किया जा चुका है, तो फिर इन खाली पदों के लिए समय पर मांग पत्र क्यों नहीं भेजा गया. संघ के मुताबिक यह पूरा मामला जांच का विषय है. कर्मचारियों ने मुख्य सचिव से मांग की है कि संविदा और आउटसोर्सिंग के इस प्रस्ताव को तुरंत निरस्त कर भर्ती बोर्ड के माध्यम से नियमित सरकारी पदों पर पारदर्शी तरीके से भर्ती शुरू की जाए.



