CG Medicinal Farming Scheme: फ्री पौधे, मुफ्त ट्रेनिंग और पक्की खरीदी, जड़ी-बूटी और औषधीय पौधों की खेती पर सरकार दे रही एडवांस में लाखों रुपए, जानिए इस खास योजना की पूरी जानकारी

CG Medicinal Farming Scheme: छत्तीसगढ़ सरकार राज्य में पारंपरिक खेती के साथ-साथ औषधीय पौधों की पैदावार को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में नारायणपुर और धमतरी जिलों के किसानों के लिए 54.36 लाख रुपये की अग्रिम प्रोत्साहन राशि जारी की गई है। इस आर्थिक मदद का मुख्य उद्देश्य किसानों को फसल की शुरुआती तैयारी के दौरान होने वाले खर्चों में राहत पहुंचाना है, जिससे उन्हें बैंकों या स्थानीय साहूकारों से कर्ज न लेना पड़े।

तीन अलग-अलग मॉडल के जरिए हो रही है योजना की शुरुआत

CG Medicinal Plant Board: राज्य औषधीय पादप बोर्ड द्वारा यह योजना तीन प्रमुख स्वरूपों में चलाई जा रही है। इसमें क्लस्टर मॉडल, व्यक्तिगत किसान मॉडल और महिला स्व-सहायता समूह मॉडल शामिल हैं। क्लस्टर मॉडल के तहत गांव के कई किसान एक साथ मिलकर बड़े पैमाने पर औषधीय फसलें उगाते हैं। इससे फसलों की देखभाल के साथ-साथ उनकी कटाई, परिवहन और बिक्री की प्रक्रिया काफी आसान और कम खर्चीली हो जाती है।

धमतरी में महिला स्व-सहायता समूह संभाल रहे हैं 115 एकड़ की कमान

Dhamtari & Narayanpur Farming Update: धमतरी जिले के 25 गांवों में गठित लगभग 45 स्व-सहायता समूह इस पहल में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। ये समूह कुल 115 एकड़ कृषि भूमि पर ब्राह्मी, वच, खस, लेमनग्रास और शतावर जैसी व्यावसायिक रूप से कीमती जड़ी-बूटियों की खेती कर रहे हैं। महिला समूहों की इस सक्रियता से ग्रामीण इलाकों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर बन रहे हैं और उनकी आय में बढ़ोतरी हो रही है।

मुफ्त पौधे, तकनीकी ट्रेनिंग और बाजार की पक्की व्यवस्था

Chhattisgarh Herb Farming: औषधीय खेती अपनाने वाले किसानों की सहूलियत के लिए राज्य औषधीय पादप बोर्ड कई स्तरों पर सहायता दे रहा है। योजना से जुड़ने वाले किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौधे निःशुल्क दिए जा रहे हैं। इसके साथ ही कृषि विशेषज्ञों द्वारा उन्हें आधुनिक खेती की बारीकियां सिखाई जा रही हैं और अध्ययन भ्रमण कराया जा रहा है। फसल तैयार होने पर किसानों को बिक्री के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए बोर्ड ने विभिन्न आयुर्वेदिक दवा निर्माता कंपनियों के साथ पहले से अनुबंध किया हुआ है।

योजना का लाभ लेने के लिए किसान ऐसे कर सकते हैं आवेदन

इस योजना से जुड़ने के इच्छुक किसान व्यक्तिगत रूप से, समूह बनाकर या अपनी स्थानीय समिति के माध्यम से राज्य औषधीय पादप बोर्ड के दफ्तर में संपर्क कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद बोर्ड द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन के साथ अग्रिम राशि और पौधे उपलब्ध कराए जाते हैं। इससे किसान बिना किसी वित्तीय जोखिम के सुरक्षित तरीके से अपनी जमीन पर औषधीय फसलों का रोपण शुरू कर सकते हैं।

प्रमुख औषधीय पौधे

पौधामुख्य उपयोग / लाभ
ब्राह्मीस्मरण शक्ति बढ़ाने, मानसिक तनाव कम करने एवं मस्तिष्क विकारों में उपयोगी
वचवात-कफ रोगों के निवारण तथा वाणी संबंधी समस्याओं के उपचार में उपयोगी।
खसइत्र, कूलिंग पैड्स और कॉस्मेटिक उत्पादों में उपयोग।
लेमनग्राससुगंधित तेल का उपयोग साबुन, सौंदर्य प्रसाधन और एंटी-सेप्टिक दवाओं में।
शतावररोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, टॉनिक एवं स्वास्थ्य वर्धक औषधियों में प्रयुक्त।

स्मरण शक्ति बढ़ाने वाली ब्राह्मी और कफ नाशक वच की भारी मांग

योजना के तहत उगाई जाने वाली फसलों में ब्राह्मी और वच बेहद महत्वपूर्ण हैं। ब्राह्मी का उपयोग मुख्य रूप से मस्तिष्क की कार्यक्षमता बढ़ाने, मानसिक तनाव दूर करने और याददाश्त दुरुस्त करने वाली आयुर्वेदिक दवाओं में होता है। वहीं वच की जड़ों का इस्तेमाल वात और कफ रोगों के इलाज के साथ-साथ वाणी से संबंधित समस्याओं के निवारण के लिए पारंपरिक औषधियों में व्यापक रूप से किया जाता है।

इत्र निर्माण में खस और कॉस्मेटिक में लेमनग्रास का बड़ा बाजार

खस अपनी प्राकृतिक ठंडी तासीर और सुगंधित जड़ों के लिए जाना जाता है। इसकी जड़ों से निकलने वाले तेल का उपयोग महंगे इत्र, कूलिंग पैड्स और कॉस्मेटिक उत्पाद बनाने में किया जाता है, जिससे बाजार में इसकी अच्छी कीमत मिलती है। इसी तरह लेमनग्रास के सुगंधित तेल की मांग साबुन, सौंदर्य प्रसाधन और एंटी-सेप्टिक दवाइयां बनाने वाली कंपनियों में लगातार बनी रहती है, जिससे इसकी खेती कम लागत में बेहतर मुनाफा देती है।

इम्यूनिटी बढ़ाने में काम आने वाली शतावर की खेती से मिलेगा बड़ा लाभ

शतावर एक बेहद उपयोगी जड़ी-बूटी है, जिसकी जड़ों का उपयोग शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले सिरप, टॉनिक और स्वास्थ्यवर्धक आयुर्वेदिक औषधियों के निर्माण में बहुतायत से होता है। बाजार में इसकी लगातार बनी रहने वाली मांग को देखते हुए सरकार किसानों को इसकी पैदावार बढ़ाने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रही है, ताकि पारंपरिक धान की खेती के विकल्प के रूप में किसानों को एक स्थायी आय स्रोत मिल सके।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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