CG Misa Bandi Pension: साय सरकार का बड़ा फैसला, मीसाबंदियों को अब हर महीने मिलेंगे 25 हजार रुपये तक; कानून में हुआ बदलाव

CG Misa Bandi Pension: छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार ने आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले मीसाबंदियों और लोकतंत्र सेनानियों के हित में एक बड़ा निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने लोकतंत्र सेनानी सम्मान अधिनियम में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए सम्मान राशि और सरकारी सुविधाओं का दायरा बढ़ा दिया है। नए नियमों के लागू होने के बाद अब पात्र लोकतंत्र सेनानियों को हर महीने अधिकतम 25 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके साथ ही सरकार ने उन्हें स्वतंत्रता सेनानियों के समकक्ष चिकित्सा सुविधाएं देने का भी प्रावधान किया है।

अब जेल के साथ थाने में बंद रहे लोग भी होंगे पात्र

सरकार की ओर से जारी नई अधिसूचना के बाद अब इस योजना का लाभ उठाने वाले लोगों का दायरा काफी बड़ा हो गया है। पहले के नियमों के तहत केवल जेल में बंद रहे लोगों को ही यह सम्मान राशि मिलती थी, लेकिन अब आपातकाल के दौरान थानों में रोककर रखे गए व्यक्तियों को भी इसका पात्र माना जाएगा। इस बदलाव के बाद राज्य के कई ऐसे बुजुर्गों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा मिल सकेगी, जो तकनीकी कारणों से अब तक इस सरकारी योजना के लाभ से पूरी तरह वंचित चल रहे थे।

तीन अलग-अलग श्रेणियों में तय हुई सम्मान राशि

संशोधित नियमों के अनुसार, आपातकाल के दौरान पुलिस या न्यायिक हिरासत में बिताए गए समय के आधार पर पेंशन की राशि को तीन अलग-अलग स्लैब में विभाजित किया गया है।

  • जो लोग एक महीने तक जेल या थाने में बंद रहे, उन्हें अब हर महीने 8 हजार रुपये दिए जाएंगे।
  • एक महीने से लेकर पांच महीने तक की अवधि हिरासत में बिताने वालों को 15 हजार रुपये मासिक मिलेंगे।
  • पांच महीने से अधिक यानी लंबी अवधि तक कारावास की यातना झेलने वाले लोकतंत्र सेनानियों को हर महीने 25 हजार रुपये की पूरी सम्मान राशि दी जाएगी।

स्वतंत्रता सेनानियों की तरह मुफ्त इलाज की सुविधा

राज्य सरकार ने इस योजना को केवल नकद आर्थिक मदद तक ही सीमित नहीं रखा है। बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को देखते हुए सरकार ने एक संवेदनशील कदम उठाया है। अब सभी पात्र लोकतंत्र सेनानियों को देश के स्वतंत्रता सेनानियों की तर्ज पर ही मुफ्त और बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इस फैसले से बुजुर्ग हो चुके लोकतंत्र सेनानियों को गंभीर बीमारियों के इलाज और महंगी स्वास्थ्य सेवाओं के खर्च से बहुत बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

आवेदन फॉर्म जमा करने के लिए मिलेंगे 90 दिन

प्रशासन ने इस योजना का लाभ उठाने की पूरी प्रक्रिया और समय-सीमा भी तय कर दी है। नई अधिसूचना जारी होने की तारीख से लेकर अगले 90 दिनों के भीतर सभी इच्छुक और पात्र व्यक्तियों को अपना आवेदन फॉर्म जमा करना होगा। आवेदकों को अपनी पूरी जानकारी के साथ आवेदन पत्र संबंधित जिला कलेक्टर या जिला मजिस्ट्रेट के कार्यालय में जाकर जमा करना होगा। तय समय के बाद मिलने वाले आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा।

पुलिस अधीक्षक का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा जरूरी

योजना में पारदर्शिता बनाए रखने और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए सरकार ने सत्यापन के कड़े नियम बनाए हैं। आवेदन पत्र के साथ संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) द्वारा जारी किया गया आधिकारिक प्रमाण पत्र संलग्न करना अनिवार्य होगा। इस प्रमाण पत्र से यह पूरी तरह प्रमाणित होना चाहिए कि संबंधित व्यक्ति आपातकाल के दौरान किस थाने या जेल में और कितने समय तक निरुद्ध रहा था। इसके बाद ही आगे की कागजी कार्रवाई पूरी की जाएगी।

प्रभारी मंत्रियों की अगुवाई में जिला स्तर पर बनेगी कमेटी

सभी प्राप्त आवेदनों की बारीकी से जांच करने और वास्तविक हकदारों की पहचान करने के लिए जिला स्तर पर एक उच्च स्तरीय विशेष समिति का गठन किया जाएगा। इस जांच समिति की कमान और अध्यक्षता उस जिले के प्रभारी मंत्री के हाथों में होगी। समिति पुलिस रिकॉर्ड और आवेदकों के दस्तावेजों का मिलान कर अंतिम पात्रता सूची तैयार करेगी। मंजूरी मिलने के बाद ही लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे सम्मान राशि भेजने की प्रक्रिया शुरू होगी।

लोकतंत्र सेनानी संगठनों की पुरानी मांग हुई पूरी

छत्तीसगढ़ के विभिन्न लोकतंत्र सेनानी और मीसाबंदी संगठन पिछले लंबे समय से सम्मान राशि में बढ़ोतरी करने और पेंशन के साथ-साथ स्वास्थ्य बीमा या चिकित्सा सुविधाएं जोड़ने की मांग उठा रहे थे। उनका तर्क था कि देश में लोकतंत्र को बहाल रखने के लिए जवानी के दिनों में लाठियां और जेल की सजा काटने वाले इन बुजुर्गों को जीवन के आखिरी पड़ाव में उचित सम्मान मिलना ही चाहिए। साय सरकार के इस कदम को संगठनों की पुरानी मांगों को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा फैसला माना जा रहा है।

जमीनी स्तर पर जल्द शुरू होगी कागजी प्रक्रिया

प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, राज्य शासन से हरी झंडी मिलने के बाद अब सभी जिलों में आवेदन प्राप्त करने और उनके वेरिफिकेशन की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। जिला स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त किए जा रहे हैं ताकि बुजुर्गों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। सरकार का मानना है कि इस योजना के सुचारू रूप से लागू होने के बाद राज्य के सैकड़ों परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा और उनके बुढ़ापे की लाठी मजबूत होगी।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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