CG PDS Ration Scheme: राशन कार्डधारियों की बल्ले-बल्ले, अब राशन दुकान में मिलेगा ‘इंप्रूव्ड राइस’, जानें क्या करने जा रही है सरकार

Chhattisgarh Ration News: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में राशन दुकानों से मिलने वाले चावल की गुणवत्ता में जल्द ही बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। राज्य सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के माध्यम से गरीब और जरूरतमंद परिवारों को अब ‘इंप्रूव्ड राइस’ यानी उन्नत श्रेणी का चावल उपलब्ध कराने जा रही है। इस नई पहल का मुख्य उद्देश्य राशन कार्डधारियों तक बेहतर खाद्यान्न पहुंचाना है। आने वाले दो महीनों के भीतर इस नई व्यवस्था को धरातल पर उतारने की तैयारी की जा रही है।

टूटे दानों की मात्रा 25 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी करने की तैयारी

Bilaspur PDS Update: मौजूदा व्यवस्था में पीडीएस के तहत बांटे जाने वाले चावल में कनी या टूटे दानों (ब्रोकन राइस) की मात्रा लगभग 25 प्रतिशत तक होती है। सरकार के नए मानकों के अनुसार अब इस मात्रा को घटाकर अधिकतम 10 प्रतिशत तक सीमित कर दिया जाएगा। टूटे दानों का दायरा 15 प्रतिशत तक कम होने से चावल की गुणवत्ता में सुधार होगा और लोगों को बोरी में अधिकांश साबुत दाने ही मिलेंगे। इससे पकाने के बाद चावल का स्वाद और गुणवत्ता पहले से काफी बेहतर हो जाएगी।

जिले के 6 लाख राशन कार्डधारियों के 17 लाख सदस्यों को मिलेगा फायदा

CG PDS Ration Scheme: बिलासपुर जिले में पीडीएस प्रणाली के तहत 6 लाख से अधिक राशन कार्ड पंजीकृत हैं, जिनके जरिए लगभग 17 लाख सदस्य हर महीने सरकारी राशन प्राप्त करते हैं। इस नई योजना का सीधा फायदा इन सभी 17 लाख लोगों की थाली तक पहुंचेगा। गुणवत्ता में सुधार होने से गरीब परिवारों को बाजार से महंगा चावल खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि राशन दुकानों तक तय मानकों के मुताबिक ही चावल पहुंचे, इसके लिए मिलिंग और वितरण पर कड़ी निगरानी रखनी होगी।

सरकारी खजाने पर बढ़ेगा हर महीने करोड़ों रुपये का अतिरिक्त बोझ

गरीब परिवारों को बेहतर चावल देने की इस योजना से राज्य सरकार के बजट पर असर पड़ेगा। बिलासपुर जिले के 17 लाख लाभार्थियों के लिए शासन हर महीने लगभग 18 हजार टन चावल आवंटित करता है। वर्तमान में धान की मिलिंग, प्रोसेसिंग और परिवहन को मिलाकर लगभग 3,500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से सरकार बिलासपुर जिले में ही करीब 63 करोड़ रुपये का मुफ्त राशन बांटती है। ब्रोकन राइस को 10 फीसदी तक सीमित करने के लिए राइस मिलों को आधुनिक प्रोसेसिंग तकनीक का सहारा लेना पड़ेगा, जिससे प्रति किलो लागत बढ़ेगी और हर महीने 63 करोड़ रुपये से भी अधिक का खर्च आएगा।

दो महीनों के भीतर राशन दुकानों तक चावल पहुंचाने का लक्ष्य

खाद्य विभाग और प्रशासन ने इस योजना को समय पर लागू करने के लिए आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी हैं। राइस मिलरों को नए मापदंडों के अनुसार ही चावल तैयार करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। लक्ष्य रखा गया है कि आगामी दो महीनों के भीतर बिलासपुर की सभी उचित मूल्य दुकानों में ‘इंप्रूव्ड राइस’ का स्टॉक पहुंचा दिया जाए, ताकि कार्डधारियों को नए सत्र से ही बेहतर और साबुत चावल मिलना शुरू हो सके।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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