CG School Education Department Reform: छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग में डिजिटल क्रांति: अब ईमेल पर मिलेंगे विभागीय नोटिस और आदेश, DPI ने सभी DEO को जारी किया फरमान

CG School Education Department Reform: छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग में कागजी कामकाज को समेटकर एक बड़ा डिजिटल सुधार करने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य के लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने प्रदेशभर के जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) को एक महत्वपूर्ण पत्र जारी किया है। इस नए आदेश के बाद अब विभाग के भीतर होने वाले पत्राचार के तरीकों में बड़ा बदलाव आएगा। आने वाले समय में स्कूल शिक्षा विभाग अपने अफसरों, शिक्षकों और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों को सीधे उनके पर्सनल शासकीय ईमेल आईडी पर जरूरी जानकारियां और नोटिस भेजेगा।

सभी शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक स्टाफ का बनेगा शासकीय ईमेल, डीपीआई ने तय की समय सीमा

डीपीआई द्वारा जारी निर्देश के मुताबिक, प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों और विकासखंड से लेकर जिला स्तर के विभागीय कार्यालयों में पदस्थ अमले का नया शासकीय ईमेल एड्रेस तैयार किया जाना अनिवार्य कर दिया गया है। इस प्रक्रिया में केवल नियमित शिक्षक ही शामिल नहीं हैं, बल्कि दफ्तरों में काम करने वाले क्लर्क और अन्य गैर-शैक्षणिक कर्मचारी भी इसके दायरे में आएंगे। इस पूरे डेटा को जुटाने और आईडी तैयार करने के लिए संचालनालय ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए समय सीमा भी तय कर दी है।

आहरण संवितरण अधिकारियों से मांगा गया ब्योरा, तीन दिनों के भीतर एक्सेल शीट में भेजनी होगी हार्ड और सॉफ्ट कॉपी

डीपीआई ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे अपने-अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों के आहरण एवं संवितरण अधिकारियों (डीडीओ) से तत्काल संपर्क साधें। सभी कर्मचारियों की प्रामाणिक जानकारी जुटाकर उसे कंप्यूटर की एक्सेल शीट में निर्धारित प्रारूप के तहत दर्ज करना होगा। पत्र में विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि पूरी जानकारी अंग्रेजी के ‘टाइम्स न्यू रोमन’ फॉन्ट में ही टाइप होनी चाहिए। इस पूरे रिकॉर्ड को तीन दिनों के भीतर संचालनालय मुख्यालय में हार्ड और सॉफ्ट कॉपी के रूप में जमा करना होगा।

डीईओ को देना होगा खास प्रमाण पत्र, एक भी कर्मचारी का नाम छूटने पर तय होगी जिम्मेदारी

इस काम को कितनी गंभीरता से लिया जा रहा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि संचालनालय ने जिला स्तर के बड़े अधिकारियों से एक घोषणा पत्र भी मांगा है। डीईओ को डेटा जमा करते समय यह लिखित प्रमाण पत्र देना होगा कि उनके जिले के अंतर्गत आने वाले किसी भी छोटे या बड़े अधिकारी और कर्मचारी का नाम इस सूची में शामिल होने से नहीं छूटा है। विभाग ने इस पूरे मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता की सूची में रखा है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त न करने की चेतावनी दी है।

नाम से लेकर जॉइनिंग डेट तक, ईमेल आईडी के साथ जमा करनी होंगी ये महत्वपूर्ण जानकारियां

शासकीय ईमेल एड्रेस बनाने के साथ-साथ विभाग प्रत्येक कर्मचारी की सेवा से जुड़ी एक विस्तृत प्रोफाइल भी तैयार कर रहा है। एक्सेल शीट में अधिकारियों और शिक्षकों का पूरा नाम, उनका वर्तमान पदनाम, विभाग का स्पष्ट उल्लेख, राज्य का नाम और कंट्री कोड दर्ज करना होगा। इसके अलावा संबंधित कर्मचारी का चालू मोबाइल नंबर, सरकारी सेवा में प्रथम नियुक्ति यानी नौकरी जॉइन करने की तारीख, उनकी विशिष्ट कर्मचारी आईडी (एम्पलाई आईडी), लॉगिन यूआईडी और वास्तविक जन्मतिथि की सटीक जानकारी भी मुख्यालय को भेजी जाएगी।

कागजी लेटलतीफी और डाक के खर्च से मिलेगी मुक्ति, सीधे पहुंचेगी जरूरी सूचना

अब तक शिक्षा विभाग में किसी भी प्रकार का आदेश, कारण बताओ नोटिस या विभागीय ट्रांसफर की जानकारी डाक के माध्यम से या संकुल स्तर से होते हुए शिक्षकों तक पहुंचती थी। इस पुरानी व्यवस्था के कारण कई बार जरूरी आदेश मिलने में हफ्तों की देरी हो जाती थी और फाइलों के रखरखाव में भी दिक्कत आती थी। अब सीधे शासकीय ईमेल पर सूचनाएं मिलने से न केवल कागजी लेटलतीफी खत्म होगी, बल्कि विभाग का डाक और स्टेशनरी पर होने वाला बड़ा प्रशासनिक खर्च भी बचेगा।

जवाबदेही तय करने में मिलेगी मदद, नोटिस मिलते ही तुरंत शुरू हो सकेगी आगे की कार्रवाई

इस नई व्यवस्था के लागू होने से प्रशासनिक कसावट लाने में काफी मदद मिलेगी। अक्सर देखा जाता है कि विभागीय कार्रवाई या नोटिस मिलने के बाद कई कर्मचारी समय पर जानकारी न मिलने का बहाना बना देते थे। ईमेल सेवा शुरू होने के बाद जैसे ही मुख्यालय से कोई नोटिस जारी होगा, वह पल भर में संबंधित शिक्षक या अधिकारी के इनबॉक्स में पहुंच जाएगा। इससे पारदर्शी कार्यप्रणाली विकसित होगी और किसी भी गड़बड़ी या शिकायत पर त्वरित कार्रवाई की जा सकेगी।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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