
स्वास्थ्य सिस्टम की मजबूती के लिए तैनात राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के कर्मचारी इन दिनों गहरे आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। प्रदेश के कई जिलों में पिछले तीन महीनों से कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है जिससे उनके सामने घर चलाने का संकट खड़ा हो गया है। कोंडागांव जिले में हालात इतने खराब हो गए कि करीब 500 कर्मचारियों को अपने छोटे बच्चों और परिवार के साथ कलेक्ट्रेट का घेराव करना पड़ा। कर्मचारियों का कहना है कि हड़ताल खत्म होने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि स्थितियां सामान्य होंगी लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी बैंक खातों में वेतन नहीं पहुंचा है।
कोंडागांव में सपरिवार सड़क पर उतरे स्वास्थ्यकर्मी, कलेक्टर के आश्वासन पर टिकी नजरें
परिवार और बच्चों के साथ प्रदर्शन करने पहुंची एक महिला कर्मचारी ने बताया कि लगातार वेतन न मिलने से उन पर मानसिक और आर्थिक दबाव असहनीय हो गया है। कोंडागांव जैसे आदिवासी बहुल जिले में ये कर्मचारी स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाते हैं लेकिन अब वे खुद उधारी के बोझ तले दबे हैं। प्रदर्शनकारियों ने कलेक्टर से मिलकर अपनी व्यथा सुनाई और सवाल किया कि जब राज्य के अन्य कुछ जिलों में भुगतान हो रहा है तो केवल कुछ ही जगहों पर प्रशासनिक देरी क्यों हो रही है। कलेक्टर ने जल्द भुगतान का भरोसा तो दिया है लेकिन कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द पैसा नहीं मिला तो वे काम बंद कर देंगे।
प्रदेश के 15 जिलों में तकनीकी और प्रशासनिक खामियों से रुका वेतन भुगतान
संगठन के प्रांतीय नेताओं के मुताबिक केवल कोंडागांव ही नहीं बल्कि प्रदेश के लगभग 15 जिलों में यही स्थिति बनी हुई है। एनएचएम कर्मचारी संगठन के नेता हेमंत कुमार का कहना है कि वेतन रुकने के पीछे मुख्य वजह प्रशासनिक सुस्ती और तकनीकी खामियां हैं। जिलों में फंड होने के बावजूद फाइलों के अटकने से जमीनी स्तर पर काम करने वाले डॉक्टर, नर्स और अन्य स्टाफ को भुगतान नहीं हो पा रहा है। कर्मचारी अब इस देरी को लापरवाही मान रहे हैं और सरकार से इस मामले में सीधे दखल की मांग कर रहे हैं ताकि त्यौहारों और दैनिक खर्चों के लिए उन्हें दर-दर न भटकना पड़े।
बर्खास्त कर्मचारी नेताओं की बहाली का मामला भी अधर में, बढ़ रहा है आक्रोश
Suspension और बर्खास्तगी का दंश झेल रहे कर्मचारी नेताओं की समस्या भी कम नहीं हुई है। पिछले दिनों हुई हड़ताल के दौरान सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए करीब 25 कर्मचारी नेताओं को सेवा से पृथक कर दिया था। बताया जा रहा है कि स्वास्थ्य विभाग की हालिया बैठक में इन नेताओं की बहाली पर सहमति बन चुकी है लेकिन अभी तक लिखित आदेश जारी नहीं हुए हैं। बहाली में हो रही इस देरी ने कर्मचारियों के गुस्से को और हवा दे दी है। संगठन का मानना है कि जब समझौता हो चुका है तो आदेश रोकने का कोई तुक नहीं बनता है।
काम बंद करने की चेतावनी और स्वास्थ्य सेवाओं पर गहराता संकट
आंदोलन की आहट एक बार फिर प्रदेश के स्वास्थ्य केंद्रों में सुनाई देने लगी है। कर्मचारियों का स्पष्ट कहना है कि बिना वेतन के वे अब और काम करने की स्थिति में नहीं हैं। यदि अगले कुछ दिनों में बकाया मानदेय का भुगतान और बर्खास्त साथियों की वापसी नहीं हुई तो पूरे प्रदेश में एक बार फिर बड़ा आंदोलन शुरू हो सकता है। ग्रामीण इलाकों में टीकाकरण और प्रसव जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं पूरी तरह एनएचएम स्टाफ के भरोसे हैं। ऐसे में अगर ये कर्मचारी फिर से सड़कों पर उतरते हैं तो राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा सकती है जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।



